
Delhi News : हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा एल टी जी सभागार, कोपरनिकस मार्ग, नई दिल्ली में गीत ग़ज़ल की जुगलबंदी का एक अनूठा आयोजन किया गया। अकादमी के सचिव संजय गर्ग ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया और आगंतुक श्रोताओं का स्वागत किया। डॉ. ओम निश्चल के संचालन में काव्यपाठ की शुरुआत प्रख्यात कवि विष्णु सक्सेना ने अपने सुमधुर कंठ से की।
डॉ. विष्णु सक्सेना ने अपना हाले दिल कुछ इस तरह से बयां किया.. दिले बीमार सही हो वो दवाएं दे दे, मैं सब पे प्यार लुटाऊं वो दुआएं दे दे। ऐ मेरे रब मैं सांस-सांस में महक जाऊं, मेरी आवाज़ की खुश्बू को हवाएं दे दे।
अपने इस मुक्तक और और शानदार गीतों से डॉ. विष्णु सक्सेना ने श्रोताओं को रससिक्त कर तालियां बटोरीं।
इसके बाद नामचीन शायर दीक्षित दनकौरी ने अपने दिलकश तरन्नुम में ग़ज़ल का आह्वान किया -
'ऐ ग़ज़ल पास आ गुनगुना लूं तुझे, तू संवारे मुझे मैं संवारूं तुझे'।
और अपनी लाजवाब ग़ज़लों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करके वाह वाही लूटी।
इतनी नफ़रत यार कहां से लाते हो ? लफ़्ज़ों में अंगार कहां से लाते हो ? कल जो थे तुम,आज नहीं हो, कल कुछ और, रोज़ नए किरदार कहां से लाते हो ?
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि अलग-अलग काव्य विधाओं के मात्र दो रचनाकारों विष्णु सक्सेना और दीक्षित दनकौरी ने 20-20 मिनट बारी-बारी, करीब ढाई घंटे तक काव्यपाठ किया। हॉल में उपस्थित दिल्ली और एनसीआर के सैकड़ों श्रोताओं ने इस जुगलबंदी का भरपूर आनंद लिया और अकादमी के इस अभिनव प्रयोग की सराहना की। अंत में अकादमी के उपसचिव ऋषि कुमार शर्मा ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।