भारत सरकार सख्त : चीन से आने वाले निगरानी उपकरणों की पहले होगी जांच, फिर मिलेगा बाजार
Delhi News
दिल्ली
चेतना मंच
29 Nov 2025 02:52 PM
Delhi News : भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अब चीन समेत अन्य देशों से आने वाले सभी इंटरनेट-आधारित निगरानी उपकरणों (सीसीटीवी कैमरे आदि) पर सख्त निगरानी और जांच का फैसला लिया है। सरकार ने साफ किया है कि अब कोई भी निगरानी उपकरण भारत में तब तक नहीं बेचा जाएगा, जब तक वह भारतीय लैब में परीक्षण पास नहीं कर लेता।
पहले लैब में होगा टेस्ट, फिर मिलेगा बाजार
नए सुरक्षा नियमों के तहत कंपनियों को अपने हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सोर्स कोड सरकारी लैब में परीक्षण के लिए देना होगा। परीक्षण में पास हुए उपकरणों को ही भारत में बेचा जा सकेगा। ये नियम 9 अप्रैल 2025 से लागू कर दिए गए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब दुनिया भर में चीन द्वारा साइबर जासूसी, डेटा चोरी और निगरानी की आशंका तेजी से बढ़ रही है।
चीन से आ रहे संदिग्ध पैकेज पर भारत की सतर्क निगाहें
हाल ही में चीन से भारत आ रहे कुछ निगरानी उपकरणों पर संदेह जताया गया। कुछ डिवाइस के अंदर संभावित निगरानी या जासूसी चिप्स की आशंका जताई गई। सरकार ने साफ कहा है कि पहले हमें दिखाओ कि बॉक्स में क्या है। हम जांच करेंगे। फिर ही देश में प्रवेश मिलेगा। इस कदम से यह साफ संकेत है कि भारत अब ओपन बॉक्स पॉलिसी अपना रहा है। यानी जो भी डिवाइस आएंगे, उनकी पूरी पारदर्शी जांच होगी।
जासूसी का खतरा क्यों है इतना बड़ा?
पूर्व साइबर सुरक्षा प्रमुख गुलशन राय के मुताबिक, किसी भी इंटरनेट से जुड़े कैमरे को दूर से नियंत्रित किया जा सकता है। यदि उसके अंदर मालवेयर या बैकडोर हैं, तो वो देश की सुरक्षा एजेंसियों, सामरिक ठिकानों या नागरिकों की गोपनीयता को खतरे में डाल सकते हैं। इसलिए अब ऐसे किसी भी डिवाइस को बिना जांच पास किए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उद्योग जगत में मची हलचल
हिकविजन, दहुआ, श्याओमी जैसी चीनी कंपनियों के साथ साथ दक्षिण कोरिया की हनवा और अमेरिका की मोटोरोला सॉल्यूशंस को भी इन नियमों के तहत उपकरणों की जांच करानी होगी। उद्योग जगत का कहना है कि नए नियमों से सप्लाई चेन बाधित हो रही है। कई कंपनियों ने अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसे सरकार ने ठुकरा दिया। Delhi News
भारत का सीसीटीवी बाजार : एक नजर में
2024 में बाजार मूल्य: $3.5 बिलियन
अनुमानित बाजार मूल्य 2030 तक: $7 बिलियन
बाजार हिस्सेदारी:
हिकविजन + दहुआ (चीन): 30%
सीपी प्लस (भारत): 48%
80% से अधिक कंपोनेंट चीन से आते हैं। Delhi News
कई डिवाइस पहले ही बैन
अमेरिका में 2022 में हिकविजन और दहुआ के उपकरणों पर बैन लगाया गया। ब्रिटेन और आॅस्ट्रेलिया भी चीन निर्मित निगरानी उपकरणों पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। भारत सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे से बचाना। डेटा संप्रभुता सुनिश्चित करना, भारतीय नागरिकों और संस्थाओं का डेटा भारत में ही रहे। स्वदेशी विनिर्माण और "मेक इन इंडिया" को बढ़ावा देना।
भारत सरकार का यह कदम दिखाता है कि अब राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी पहलू पर कोई समझौता नहीं होगा। चीन से आने वाले हर डिवाइस की सूक्ष्म जांच होगी, चाहे वह कितना भी सामान्य क्यों न लगे। इस नीति से भारत को एक सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में कदम रखने में मदद मिलेगी। Delhi News