दिल्ली SIR अभियान में 31.63 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस मिला। CM रेखा गुप्ता, अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार समेत कई बड़े नाम जांच के दायरे में आए। पूरी जानकारी पढ़ें।

New Delhi : नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अब तक 31,63,930 मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। खास बात यह है कि नोटिस पाने वालों में दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, पूर्व दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और भाजपा नेता सुधांशु मित्तल जैसे चर्चित नाम भी शामिल हैं।
दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के मौजूदा विवरण का पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सामने आए हैं जिनकी जानकारी 2002 की पिछली SIR मतदाता सूची से लिंक नहीं हो सकी। इसके अलावा कुछ मतदाताओं के नाम, जन्मतिथि अथवा अन्य विवरण में ऐसी विसंगतियां मिली हैं जिन्हें चुनाव अधिकारियों द्वारा सत्यापित किया जाना जरूरी है। इन्हीं मामलों में नोटिस जारी कर संबंधित मतदाता से जवाब और आवश्यक दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। दिल्ली के ड्राफ्ट वोटर रोल में 33.13 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड ऐसे चिन्हित किए गए हैं जिनमें विसंगतियां मिलीं, जबकि 19 सितंबर तक इनमें से 31.63 लाख से अधिक को नोटिस भेजे जा चुके थे।
SIR अभियान में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक और मीडिया हलकों में इसकी खास चर्चा हुई। अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री की प्रविष्टि में उम्र से संबंधित विसंगति चिन्हित हुई थी। इसके बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया और बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के माध्यम से भौतिक सत्यापन कराया गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि सत्यापन और दस्तावेजों की जांच के बाद रेखा गुप्ता की मतदाता प्रविष्टि को वैध घोषित कर दिया गया है। उनका नाम शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने के लिए रखा गया है। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होनी है। चुनाव कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री को नोटिस मिलना किसी अलग या विशेष कार्रवाई का संकेत नहीं है, बल्कि उनकी प्रविष्टि भी उसी व्यापक SIR प्रक्रिया के तहत जांच के दायरे में आई थी।
पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल से जुड़ा मामला भी इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चर्चा में है। केजरीवाल के अलावा उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, पिता गोबिंद राम केजरीवाल, माता गीता देवी और बेटे पुलकित केजरीवाल को भी नोटिस जारी किए गए हैं। इन मामलों में नोटिस का प्रमुख कारण “Unmapped with Last SIR” बताया गया है। यानी संबंधित रिकॉर्ड पिछली SIR मतदाता सूची से आवश्यक तरीके से लिंक नहीं हो पाया। नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से जुड़े रिकॉर्ड में केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम इस श्रेणी में सामने आए हैं। दिल्ली के चुनाव अधिकारियों के अनुसार संबंधित परिवार के सदस्यों द्वारा जमा किए गए Enumeration Forms में पिछली मतदाता सूची से लिंक करने के लिए जरूरी विवरण पूरी तरह उपलब्ध नहीं थे।
केजरीवाल और उनके परिवार को नोटिस जारी होने के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने इस मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नामों के संबंध में ऐसी स्थिति कैसे बनी। यह AAP की राजनीतिक प्रतिक्रिया है; दूसरी ओर चुनाव अधिकारियों का कहना है कि नोटिस SIR के तहत रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
SIR नोटिस पाने वाले प्रमुख लोगों में केवल वर्तमान या पूर्व मुख्यमंत्री ही नहीं हैं। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को भी “Unmapped with Last SIR” श्रेणी में नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा पूर्व दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को नाम से संबंधित विसंगति के मामले में नोटिस मिला है। भाजपा नेता सुधांशु मित्तल का नाम भी नोटिस पाने वाले प्रमुख लोगों में शामिल है। वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि आवश्यक दस्तावेज जमा कर वह विवरण को ठीक करा लेंगे। उनके परिवार के कुछ सदस्यों को भी नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई है।
दिल्ली SIR का दायरा समझने के लिए यह आंकड़ा भी बेहद महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली की लगभग 1.45 करोड़ मतदाताओं वाली सूची में से करीब 47 लाख नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। इसके बाद ऐसे मामलों में दस्तावेजों के सत्यापन और सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है। इसी क्रम में लाखों मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं और उनसे संबंधित दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगति है या जिनका पिछली SIR सूची से मिलान नहीं हो पाया, उनके मामले में आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जा सके।
दिल्ली में SIR के तहत दावा और आपत्ति की प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलनी है। जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, उन्हें अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के Electoral Registration Officer (ERO) के समक्ष जवाब और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। अधिकारियों के मुताबिक जरूरत के अनुसार सुनवाई के लिए विशेष शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। नोटिस पाने वाले मतदाताओं के मामलों का निस्तारण दस्तावेजों और सत्यापन के आधार पर किया जाएगा। इसके बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।
दिल्ली SIR की सबसे बड़ी चर्चा अब केवल लाखों आम मतदाताओं तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार, कपिल सिब्बल तथा भाजपा के प्रमुख नेताओं के नाम सामने आने के बाद यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि चुनाव अधिकारियों का कहना है कि प्रमुख सार्वजनिक हस्तियों के नाम यदि चुनावी डेटाबेस में पहले से चिन्हित विसंगतियों के साथ सामने आए हैं तो उन्हें ड्राफ्ट रोल में शामिल कर दावा-आपत्ति चरण में आवश्यक दस्तावेज लेने की व्यवस्था चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुरूप की गई है। यानी दिल्ली का SIR अभियान अब उस महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है, जहां लाखों मतदाताओं के रिकॉर्ड की दोबारा जांच हो रही है। मुख्यमंत्री से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ सांसदों तक को नोटिस मिलना इस व्यापक सत्यापन प्रक्रिया की गंभीरता को सामने लाता है। अब निगाहें 30 सितंबर की दावा-आपत्ति प्रक्रिया और 4 नवंबर को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर रहेंगी। New Delhi :
विज्ञापन