दिल्ली में सामने आए आतंकी मॉड्यूल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राजधानी को अस्थिर करने की साजिश कितनी गहराई से रची जा रही थी। आतंकी शबीर अहमद लोन से जुड़े इस नेटवर्क की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं।

Delhi News : दिल्ली में सामने आए आतंकी मॉड्यूल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राजधानी को अस्थिर करने की साजिश कितनी गहराई से रची जा रही थी। आतंकी शबीर अहमद लोन से जुड़े इस नेटवर्क की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह मॉड्यूल किसी सीमित स्तर की हरकत में नहीं, बल्कि बड़े आतंकी हमले की पूरी पटकथा तैयार करने में जुटा था। मेट्रो और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए पोस्टरों को अब जांच एजेंसियां एक रणनीतिक ‘टेस्ट ऑपरेशन’ के तौर पर देख रही हैं। माना जा रहा है कि इसके जरिए मॉड्यूल यह जांच रहा था कि वह कितनी तेजी, कितनी खामोशी और कितनी संगठित तरीके से अपने मंसूबों को जमीन पर उतार सकता है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में यह सामने आया है कि इस मॉड्यूल से जुड़े लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय थे। उनका फोकस सिर्फ आम भीड़भाड़ वाले इलाकों तक सीमित नहीं था, बल्कि धार्मिक स्थलों को भी संभावित निशाने के रूप में देखा जा रहा था। जांच में पता चला है कि कई मंदिरों और ज्यादा आवाजाही वाले इलाकों की रेकी की गई थी। इन स्थानों के वीडियो और विजुअल रिकॉर्डिंग तैयार कर उन्हें पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचाया जा रहा था, ताकि आगे की साजिश को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सके।
जांच एजेंसियों को मिले इनपुट के अनुसार, इस पूरे मॉड्यूल की कमान पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैंडलर्स के हाथ में थी। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क को सीधे नहीं, बल्कि बांग्लादेश के रास्ते संचालित किया जा रहा था। पहले पूर्वी भारत, खासकर कोलकाता में एक आधार तैयार किया गया और फिर उसी नेटवर्क को धीरे-धीरे दूसरे शहरों तक फैलाया गया। बाद में दिल्ली समेत अन्य प्रमुख इलाकों में इसकी गतिविधियां तेज की गईं। जांच में यह भी सामने आया है कि हाल में जिन आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, वे इसी मॉड्यूल का हिस्सा थे। इनमें सात बांग्लादेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। इनकी जिम्मेदारी केवल पोस्टर लगाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि रेकी करना, लोकल सपोर्ट जुटाना और जमीन स्तर पर नेटवर्क को मजबूत करना भी इनके काम का हिस्सा था। पोस्टर लगाने की घटनाओं ने जब सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान खींचा, तभी इस पूरे मॉड्यूल की परतें खुलनी शुरू हुईं और जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह मॉड्यूल आगे चलकर टारगेट किलिंग जैसे हमलों को अंजाम देने की दिशा में भी काम कर रहा था। इसके लिए संभावित ठिकानों की पहचान, नए लोगों की भर्ती और स्थानीय संपर्कों को मजबूत करने की कोशिशें जारी थीं। हाल में पकड़ा गया शबीर अहमद लोन इस नेटवर्क का अहम हैंडलर माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि वह लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़ा रहा है और इस मॉड्यूल को दिशा देने में उसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Delhi News