DU ने PhD Admission के नियम बदले हैं। अब 4 साल की Graduation पूरी करने वाले छात्र बिना मास्टर डिग्री के सीधे PhD में प्रवेश ले सकेंगे।

DU PhD Admission 2026 : दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने पीएचडी दाखिले के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (UG) पूरा करने वाले छात्र बिना मास्टर डिग्री के सीधे पीएचडी में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और चार वर्षीय स्नातक व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
DU PhD Admission 2026
दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल ने चार वर्षीय स्नातक डिग्री (UGCF 2022 के तहत) पूरी करने वाले विद्यार्थियों को सीधे PhD कार्यक्रम में प्रवेश देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। पहले पीएचडी के लिए मास्टर डिग्री अनिवार्य मानी जाती थी, लेकिन नए नियमों के बाद चार साल की UG डिग्री वाले मेधावी छात्र सीधे रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगे।
DU PhD Admission 2026
चार वर्षीय ग्रेजुएशन के आधार पर पीएचडी में दाखिले के लिए छात्रों को न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक या इसके बराबर CGPA हासिल करना होगा। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), OBC-NCL, दिव्यांग (PwBD) और EWS वर्ग के उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार 5 प्रतिशत तक छूट दी जा सकती है।
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सीधे पीएचडी में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों को विश्वविद्यालय की निर्धारित चयन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसमें प्रवेश परीक्षा, UGC NET/CSIR NET जैसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षाएं और विभागीय इंटरव्यू शामिल हो सकते हैं। अंतिम चयन विश्वविद्यालय के पीएचडी नियमों के अनुसार किया जाएगा।
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जिन छात्रों ने तीन वर्षीय स्नातक डिग्री के बाद मास्टर डिग्री पूरी की है, उनके लिए पीएचडी पात्रता के पुराने नियम लागू रहेंगे। वहीं एमफिल (M.Phil) करने वाले उम्मीदवार भी निर्धारित योग्यता के आधार पर आवेदन कर सकेंगे।
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शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव उन छात्रों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो कम उम्र में शोध और अकादमिक क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। चार वर्षीय UG के बाद सीधे PhD का विकल्प मिलने से छात्रों का समय बच सकता है और वे जल्दी रिसर्च प्रोजेक्ट से जुड़ सकेंगे।
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