DUSU Election 2026-27 के राउंड-15 में निर्दलीय दीपांशु शौकीन 22682 वोट के साथ आगे हैं। ABVP के ईशु मौर्य को 11,670 और NSUI के वीर छत्रथ को 2,892 वोट मिले।

New Delhi : दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026-27 की मतगणना में उपाध्यक्ष पद का मुकाबला अब सबसे अधिक चर्चा में आ गया है। निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने प्रमुख छात्र संगठनों के उम्मीदवारों के बीच अपनी मजबूत स्थिति बनाते हुए लगातार बढ़त कायम रखी है। उपलब्ध राउंड-15 के आंकड़ों के मुताबिक शौकीन को 22,682 वोट मिले हैं, जबकि ABVP के ईशु मौर्य को 11,670 और NSUI के वीर छत्रथ को 2,892 वोट मिले हैं। इस चरण पर शौकीन की बढ़त 9,211 वोट की है। यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि DUSU के केंद्रीय पदों पर आमतौर पर ABVP और NSUI जैसे संगठनों के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला प्रमुखता से देखा जाता है। ऐसे चुनावी माहौल में किसी निर्दलीय प्रत्याशी का इतनी बड़ी बढ़त बनाना मतगणना की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक बन गया है।

दीपांशु शौकीन इस बार DUSU उपाध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, शौकीन ने पहले NSUI से टिकट लेने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। चुनाव परिणामों की शुरुआती गिनती से ही शौकीन का प्रदर्शन चर्चा में रहा। छठे राउंड में भी वह उपाध्यक्ष पद पर अन्य उम्मीदवारों से आगे चल रहे थे और बाद के राउंड में उनकी बढ़त लगातार बनी रही। Moneycontrol ने छठे राउंड के आंकड़ों में शौकीन के खाते में 9,379 वोट दर्ज किए थे, जबकि ईशु मौर्य 4,845 वोट के साथ दूसरे स्थान पर थे। राउंड-दर-राउंड तस्वीर में शौकीन की बढ़त का बने रहना इस चुनाव की खास बात बन गया है।
उपलब्ध राउंड-15 अपडेट के अनुसार DUSU के प्रमुख पदों की तस्वीर इस प्रकार है—
पद उम्मीदवार संगठन वोट
उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन निर्दलीय 22,682
उपाध्यक्ष ईशु मौर्य ABVP 11,670
उपाध्यक्ष वीर छत्रथ NSUI 2,892
अध्यक्ष विजय शंकर मीणा NSUI 17,021
अध्यक्ष यश डबास ABVP 17,315
सचिव रिया छावड़ी ABVP 14,731
सचिव नम्रता चौधरी NSUI 11,301
उपाध्यक्ष पद पर शौकीन और ईशु मौर्य के बीच अंतर 11,021 वोट का है। यही आंकड़ा इस समय DUSU मतगणना में सबसे बड़ी बढ़तों में से एक को दर्शाता है।
DUSU चुनाव में इस बार चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार मैदान में थे। चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद शामिल हैं।चुनाव से पहले और मतदान के दौरान मुख्य छात्र संगठनों की भूमिका प्रमुख रही। लेकिन उपाध्यक्ष पद की मतगणना ने एक अलग तस्वीर सामने रखी है। यहां निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने न केवल मुकाबले में जगह बनाई बल्कि उपलब्ध राउंड-15 आंकड़ों में काफी अंतर से आगे निकल गए। इसी वजह से DUSU चुनाव की चर्चा केवल ABVP बनाम NSUI के पारंपरिक मुकाबले तक सीमित नहीं रह गई है।
मतगणना के शुरुआती चरणों में ही शौकीन की बढ़त सामने आने लगी थी। सातवें राउंड की रिपोर्टिंग में भी वह उपाध्यक्ष पद पर आगे थे और 10वें राउंड तक भी उनकी बढ़त बनी हुई थी। अब राउंड-15 में 22,682 वोट के साथ उनका 11,012 वोट का अंतर यह बताता है कि उपाध्यक्ष पद की मतगणना में उनकी स्थिति काफी मजबूत बनी हुई है। हालांकि, चुनाव परिणाम की अंतिम पुष्टि के लिए संपूर्ण मतगणना और आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
DUSU चुनाव दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति का प्रमुख चुनाव है। इस चुनाव में छात्र संगठनों का संगठनात्मक नेटवर्क, कॉलेज स्तर की राजनीति और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पहचान सभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे माहौल में किसी उम्मीदवार का बिना किसी बड़े छात्र संगठन के चुनाव लड़ना और मतगणना में प्रमुख संगठन के उम्मीदवारों से आगे निकलना अपने आप में चुनावी घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दीपांशु शौकीन का मामला इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि उनकी बढ़त किसी एक शुरुआती राउंड तक सीमित नहीं रही। उपलब्ध रिपोर्टों में अलग-अलग चरणों में उनका नाम उपाध्यक्ष पद पर सबसे आगे रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दीपांशु शौकीन अपनी बढ़त को अंतिम परिणाम में बदल पाएंगे? राउंड-13 के आंकड़े उनके पक्ष में स्पष्ट बढ़त दिखाते हैं, लेकिन मतगणना पूरी होने से पहले अंतिम परिणाम बताना जल्दबाजी होगी। अंतिम तस्वीर विश्वविद्यालय की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी। इतना जरूर है कि 2026-27 के DUSU चुनाव में उपाध्यक्ष पद की मतगणना ने दीपांशु शौकीन को चुनाव के सबसे चर्चित चेहरों में ला दिया है। यदि अंतिम परिणाम भी इसी दिशा में रहता है तो यह DUSU की केंद्रीय राजनीति में निर्दलीय उम्मीदवार के प्रदर्शन के लिहाज से उल्लेखनीय परिणाम होगा।
DUSU चुनाव की इस मतगणना में तीन अलग-अलग तस्वीरें एक साथ दिखाई दे रही हैं—अध्यक्ष पद पर NSUI और ABVP के बीच बेहद करीबी मुकाबला, सचिव पद पर ABVP की बढ़त और उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन की बड़ी बढ़त। इसलिए इस चुनाव के अंतिम परिणाम में सबसे अधिक उत्सुकता केवल यह जानने की नहीं है कि कौन-कौन से संगठन केंद्रीय पैनल में जगह बनाते हैं, बल्कि यह भी है कि क्या एक निर्दलीय उम्मीदवार दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के केंद्रीय पद पर अपनी जगह बनाने में सफल होता है।
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