दिल्ली हाईकोर्ट ने दिखाया सख्त रवैया, DUSU अध्यक्ष-सचिव को भेजा नोटिस
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 09:03 PM
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनावों के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष आर्यन मान और सचिव कुणाल चौधरी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनावी नियमों के उल्लंघन के मामले में दोनों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने चुनावों में कम मतदान प्रतिशत और 10 गुना अधिक ट्रैफिक चालानों को लेकर भी सख्त टिप्पणी की है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी। DUSU
क्या है पूरा मामला?
DUSU चुनाव 2025 में अध्यक्ष, सचिव, उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव पदों के लिए मतदान हुआ था। ABVP को अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत मिली जबकि उपाध्यक्ष पद NSUI ने अपने नाम किया। चुनाव संपन्न होते ही एक याचिका के जरिए दिल्ली हाईकोर्ट में शिकायत दर्ज करवाई गई कि चुनावों में दिल्ली संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, लिंगदोह समिति की सिफारिशों और डूसू आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने डूसू अध्यक्ष आर्यन मान और सचिव कुणाल चौधरी को नोटिस भेजा है। साथ ही जिन उम्मीदवारों को पहले ही दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने नोटिस जारी किए थे उन्हें भी इस मामले में पक्षकार बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने जताई नाराजगी
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि डूसू चुनावों को लेकर पहले ही अदालत ने दिशानिर्देश जारी किए थे जिनमें सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पोस्टरबाजी और विजय जुलूसों पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया था। बावजूद इसके इन आदेशों की अनदेखी की गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि जीत के बाद विजय जुलूस निकाले गए जबकि इस पर स्पष्ट रोक थी। यह सीधा-सीधा अदालत की अवमानना है।
चालानों की बाढ़ और कम मतदान ने खींचा ध्यान
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बताया कि चुनाव के दौरान करीब 6,000 ट्रैफिक चालान काटे गए। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेशों के पालन में पुलिस ने पूरी मेहनत की लेकिन छात्रों द्वारा नियमों का जमकर उल्लंघन किया गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि "जब मतदान सिर्फ 39% हुआ हो और चालान 10 गुना बढ़ गए हों तो ये साफ संकेत हैं कि चुनाव व्यवस्थित तरीके से नहीं कराए गए।"
अदालत ने सवाल उठाया कि, "छात्र पढ़े-लिखे हैं, जागरूक हैं। फिर भी मतदान के लिए नहीं आए। आखिर क्यों? कहीं वे भयभीत तो नहीं थे? कहीं चुनावी माहौल ऐसा तो नहीं था कि आम छात्र वोट डालने से कतराने लगे?" कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कम मतदान और ज्यादा चालान जैसे सूचकांक यह बताने के लिए काफी हैं कि चुनाव प्रक्रिया में खामियां थीं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी। हाईकोर्ट ने DU प्रशासन से भी रिपोर्ट मांगी है कि किस स्तर पर चुनावी नियमों का उल्लंघन हुआ और इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। DUSU