एक ही रात में चार हत्याओं ने राजधानी की कानून-व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लोगों के मन में सवाल है कि जब नए साल से पहले पुलिस हाई अलर्ट पर थी, तो अपराधी इतनी आसानी से वारदातों को कैसे अंजाम दे गए। अब देखने वाली बात यह होगी कि दिल्ली पुलिस इन मामलों में कितनी तेजी से कार्रवाई करती है।

नए साल की दस्तक से ठीक पहले देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर खौफनाक वारदातों की गवाह बनी हुई है। एक ही रात में राजधानी के चार अलग-अलग इलाकों में चार लोगों की हत्या से पूरे शहर में हड़कंप मच गया है। इन घटनाओं ने दिल्ली पुलिस की गश्त, खुफिया तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आपसी विवाद, लूटपाट और पुरानी रंजिश से जुड़ी इन हत्याओं ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, जबकि पुलिस हाई अलर्ट का दावा करती रही है।
मंगोलपुरी इलाके के डी-ब्लॉक में गुरुवार देर रात पुराना विवाद हिंसक रूप ले बैठा। छह हमलावरों ने 20 वर्षीय ई-रिक्शा चालक विकास कुमार पर चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इस घटना में उसका एक साथी गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के अनुसार मृतक के खिलाफ पहले से चोरी और झपटमारी के मामले दर्ज थे। इस मामले में चार नाबालिगों समेत छह आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।
सुल्तानपुरी के सी-ब्लॉक में रात करीब 11 बजे 15 वर्षीय किशोर पर चाकू से हमला कर दिया गया। गंभीर हालत में उसे संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि कुछ दिन पहले आरोपी युवक धमकी देकर गया था, जिसकी शिकायत पुलिस से की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने मुख्य आरोपी विक्रम उर्फ विक्की को गिरफ्तार कर हथियार बरामद कर लिया है।
आदर्श नगर थाना क्षेत्र में लूट की कोशिश का विरोध करना एक व्यक्ति को जान से हाथ धोने का कारण बन गया। 50 वर्षीय बिहारी लाल पर चाकू से हमला कर उसकी मौके पर ही हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक आरोपी लूट के इरादे से आए थे और वारदात के बाद फरार हो गए।
नरेला इलाके में एक युवक की हत्या कर शव को लामपुर गांव के एक खेत में जला दिया गया। पुलिस को खेत से अधजली लाश मिली, जिसके पास से 500 रुपये के नोट और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। मृतक की पहचान सोनीपत निवासी भूपेंद्र उर्फ बीनू के रूप में हुई है, जो अपने भाई के साथ प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था। शुरुआती जांच में लूट के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है।
दिल्ली सरकार यदि मामलों की गहन जांच कराए तो कई ऐसे केस सामने आ सकते हैं, जिनमें पुलिस की लापरवाही की भूमिका रही है। आरोप हैं कि कई बार पुलिस की गलतियों का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है, जिससे लोग मजबूरी में अदालतों का रुख करते हैं। बता दें कि एक सर्वे के अनुसार, दिल्ली पुलिस द्वारा की गई चूकों के कारण कई निर्दोष लोग कोर्ट के चक्कर काटने को मजबूर होते हैं। यदि इन मामलों की निष्पक्ष जांच हो, तो कई लोग बेगुनाह साबित हो सकते हैं और पुलिस की कार्यशैली पर से पर्दा उठ सकता है।
बता दें कि दिल्ली में पुलिस की लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला फिर से सुर्खियों में है। आम जनता का कहना है कि पुलिस महकमा पैसे के लेन-देन और अपने स्वार्थ के लिए अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट जाता है, जिससे न्याय व्यवस्था कमजोर हो रही है। दिल्ली में महिलाओं की छोटी-सी गलती या मामूली विवाद को लेकर कई लोग कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं। इनमें से अधिकतर मामलों में पुलिस की लापरवाही और भ्रष्टाचार की बात सामने आ रही है। कहा जाता है कि पुलिस अपनी भूमिका से भागते हुए पैसे का लेन-देन कर मामले को खत्म करने का प्रयास करती है, जिससे कोर्ट में केस लंबित रह जाते हैं।