बदल जाएगा बाबर रोड का नाम? साइन बोर्ड पर चिपका अयोध्या मार्ग का स्टिकर
दिल्ली
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 03:01 AM
दिल्ली
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 03:01 AM
Delhi News : राजधानी दिल्ली में शनिवार सुबह अचानक बाबर रोड का नाम ही बदल गया। दरअसल, अयोध्या राम मंदिर उद्घाटन से दो दिन पहले दिल्ली में हिंदू सेना के कुछ कार्यकर्ताओं ने बाबर रोड के लगे साइन बोड पर अयोध्या मार्ग का स्टीकर लगा दिया। इस मामले के सामने आने के बाद स्टीकर को हटा दिया गया। लेकिन अब सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी तस्वीर वायरल हो रही है।
लंबे समय से की जा रही थी मांग
इस बारे में हिन्दू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने कहा, ‘हिंदू सेना लंबे समय से मांग कर रही है कि बाबर रोड का नाम बदला जाए। यह भारत देश भगवान श्री राम, श्री कृष्ण, श्री वाल्मिकी, गुरु रविदास जैसे महापुरुषों का देश है। अयोध्या में श्री राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। जब बाबर की बाबरी ही नहीं रही, तो दिल्ली में बाबर रोड का क्या काम?’। साथ ही उन्होंने कहा कि आज हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने वह काम कर दिया और बाबर रोड का नाम बदलकर 'अयोध्या मार्ग' रख दिया। हालांकि बाद में स्टीकर को प्रशासन ने हटवा दिया।
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नई दिल्ली नगर निगर को लिख चुकें हैं पत्र
आपको बता दे इस घटना से पहले हिंदू सेना ने 8 जनवरी को नई दिल्ली नगर निगर (NDMC) को पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने बाबर रोड के नाम को बदलने की मांग की थी। पत्र में उन्होंने लिखा था कि ‘जिहादी बाबर ने भारत के लोगों पर अत्याचार किया और जबरन हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया, हमारे मठों को ध्वस्त कर दिया और मंदिर बनाए और उन पर जबरन मस्जिदें बनाईं.’। साथ ही उन्होंने लिखा कि ‘हम सभी जानते हैं कि बाबर रोड नई दिल्ली के बंगाली मार्केट में स्थित है और हम सभी बाबर की कहानी जानते हैं कि बाबर एक घुसपैठिया, आक्रमणकारी, जिहादी आतंकवादी था। बाबर रोड हमें बाबर द्वारा हिंदुओं पर की गई क्रूरता और अत्याचारों की याद दिलाता है। इसलिए आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस सड़क का नाम बदलकर अयोध्या मार्ग किया जाए.’।
हिंदू संगठनों का मुगल विरोध आ रहा सामने
जानकारी के अनुसार मुगल शासक बाबर के सेनापति मीर बांकी ने ही अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ कर बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था। जिसके बाद कई युद्ध हुए। इस युद्ध के दौरान हजारों लोगों की जानें गईं थीं। 500 सालों बाद आज अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण उसी जगह पर होना है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही एक बार फिर से हिंदू संगठनों का मुगलों को लेकर विरोध फिर से सामने आ रहा है।
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