अयोध्या में भी बड़ी तबाही की साजिश रची गई थी, और इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए गिरफ्तार डॉक्टर शाहीना ने अयोध्या के स्लीपर मॉड्यूल को सक्रिय कर रखा था। सूत्रों के अनुसार, डॉक्टर शाहीना फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़ी हैं और लखनऊ की निवासी हैं।

दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार शाम हुए भयानक विस्फोट ने देश की सुरक्षा एजेंसियों को गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। जांच के शुरुआती संकेतों के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती अब बचे हुए 300 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट को सुरक्षित बरामद करना है, जो अभी भी संदिग्धों के कब्जे में हैं। सूत्रों का कहना है कि अलग-अलग छापेमारी में अब तक 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किए जा चुके हैं, लेकिन देश के कई हिस्सों में अभी भी ये खतरनाक सामग्री छिपी हुई है। जांच में यह भी पता चला है कि गिरफ्तार आतंकियों ने यह विस्फोटक बांग्लादेश होते हुए नेपाल और फिर भारत में smuggle किया था। शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि किसी फर्टिलाइजर कंपनी से यह अमोनियम नाइट्रेट चोरी कराकर लाया गया। कुल मिलाकर आतंकियों ने देश में 3,200 किलोग्राम विस्फोटक की खेप पहुंचाई है, जिसके चलते नेपाल और भारत के पूरे रूट को अलर्ट पर रखा गया है। इस ब्लास्ट ने देशभर में सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता को बढ़ा दिया है और साफ संकेत दिया है कि खतरा अभी टला नहीं है।
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आतंकवादियों के नेटवर्क ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों को अपने हमलों का लक्ष्य बनाया था। खास तौर पर अयोध्या और वाराणसी (काशी) उनके मुख्य निशाने थे। अयोध्या में भी बड़ी तबाही की साजिश रची गई थी, और इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए गिरफ्तार डॉक्टर शाहीना ने अयोध्या के स्लीपर मॉड्यूल को सक्रिय कर रखा था। सूत्रों के अनुसार, डॉक्टर शाहीना फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से जुड़ी हैं और लखनऊ की निवासी हैं। उनका यह मॉड्यूल अयोध्या में आतंक फैलाने की योजना में अहम कड़ी था। हालांकि, अयोध्या में इसका क्रियान्वयन होने से पहले ही यह बड़ा विस्फोट दिल्ली में हुआ और सुरक्षा एजेंसियों को सक्रिय होने का मौका मिला।
जम्मू‑कश्मीर पुलिस की त्वरित छापेमारी में फरीदाबाद स्थित टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ और वहां से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किए गए। जांच के शुरुआती निष्कर्ष बताते हैं कि लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए ब्लास्ट को मॉड्यूल ने सीधे तौर पर योजना में नहीं रखा था। विस्फोटक में किसी प्रकार का टाइमर या नियंत्रित यंत्र नहीं पाया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह घटना हड़बड़ी और जल्दबाजी में हुई। पुलिस पूछताछ में आतंकियों ने स्वीकार किया कि उनका असली उद्देश्य अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले पब्लिक प्लेस को निशाना बनाकर अधिकतम जनहानि करना था। यह खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी की घंटी है कि देश में ऐसे स्लीपर सेल अभी भी सक्रिय हैं और कहीं भी अचानक हमले की योजना बना सकते हैं।