जेएनयू में छात्रों के लिए नया फरमान, धरना प्रदर्शन करने पर भरने होंगे 20 हजार
भारत
चेतना मंच
12 Dec 2023 12:57 PM
JNU News Update: दिल्ली सहित देश और दुनिया में चर्चित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। जेएनयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिषर में अकादमिक भवनों के 100 मीटर के दायरे में धरना देने और दीवार पर पोस्टर लगाने पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना और मामला गंभीर होने पर यूनिवर्सिटी से निष्कासन तक की सजा का फैसला लिया है। इसके अलावा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के नए आदेश बताया गया है कि किसी भी राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए छात्रों को 10 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
JNU News Update
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में एक बार फिर से नए नियम लागू करने के लिए आदेश जारी कर दिया गया है। इस नियम के बाद यहां के छात्र- छात्राएं काफी परेशान हैं। इस नए नियम के मुताबिक विश्वविद्यालय परिषर में धरना देने पर छात्रों पर 20 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई राष्ट्र विरोधी नारे लगाएगा तो उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जो छात्र अपने हितों के लिए समय-समय पर विश्वविद्यालय में प्रदर्शन कर अपनी मांग उठाते थे अब उन मांगों को नहीं उठा पाएंगे। इसके लिए जेएनयू ने 20,000 का जुर्माना तय कर दिया है।
राष्ट्र-विरोधी नारों पर भरने होंगे 10 हजार
आपको बता दे कि इससे पहले जेएनयू प्रशासनिक ब्लॉक के 100 मीटर के भीतर विरोध प्रदर्शन होता था। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन को प्रतिबंधित कर दिया गया था। नए नियमों के अनुसार किसी छात्र पर शारीरिक हिंसा, दूसरे छात्र, कर्मचारी या संकाय सदस्य को गाली देने और पीटने पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगेगा। चीफ प्रॉक्टर ऑफिस की ओर से जारी आदेश के मुताबिक किसी धर्म, जाति या समुदाय या असहिष्णुता या फिर राष्ट्रविरोधी गतिविधि करने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं अपमानजनक धार्मिक, सांप्रदायिक, जातिवादी या राष्ट्र-विरोधी टिप्पणियों वाले पोस्टर या पंफ्लेट को छापने, प्रकाशित और प्रचार करने या चिपकाने पर प्रवेश पर पाबंदी लगाई गई है।
5 बार जुर्माने के बाद होंगे निष्कासित
यदि किसी छात्र पर पांच या उससे ज्यादा बार जुर्माना लग चुका है, तो उसे अध्ययन की अवधि के लिए जेएनयू से निष्कासित कर दिया जाएगा। इसके अलावा छात्र को प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया जाता है, तो उसे अगले सेमेस्टर के लिए रजिस्ट्रेशन की इजाजत नहीं दी जाएगी। किसी भी छात्र के खिलाफ झूठा आरोप यूनिवर्सिटी से निष्कासन का कारण बन सकता है।
पहले भी फरमान हुआ था जारी
बता दें कि मार्च महीने में भी जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में यह नियम लागू किया गया था। जिसमें परिसर में धरना देने पर छात्रों पर 20 हजार रुपये का जुर्माना और हिंसा करने पर उनका दाखिला रद्द किया जा सकता है, या 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। तब इस मामले को लेकर छात्र संगठनों ने काफी प्रदर्शन में किया था। बाद में इस फैसले को जेएनयू प्रशासन द्वारा वापस भी ले लिया गया। लेकिन मंगलवार को एक बार फिर से जेएनयू में एक नया फरमान जारी कर दिया है। जिसके बाद छात्र संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है।
छात्र संघ ने किया फैसले का विरोध
जेएनयू प्रशासन के इस फरमान का जेएनयू छात्र संघ ने विरोध किया है। जेएनयू छात्र संघ के नेताओं का कहना है कि यह परिसर में असहमति को दबाने का प्रयास है। जेएनयूएसयू ने इसे वापस लेने की मांग की है। यूनिवर्सिटी प्रशासन चीफ प्रॉक्टर कार्यालय के नए आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द करे। इसके विरोध में जेएनयू छात्र संघ ने गुरुवार को एक बैठक भी बुलाई है।
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