
Kanjhawala Case : नयी दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को कंझावला कांड में आरोपी आशुतोष भारद्वाज की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कंझावला में 31 दिसंबर की देर रात को एक महिला की स्कूटी को टक्कर मारे जाने के बाद उसे कार से काफी दूर तक घसीटा गया था और उसकी मृत्यु हो गयी थी।
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सान्या दलाल ने कहा कि अपराधों की गंभीरता को देखते हुए, जांच प्रारंभिक स्तर पर होने के तथ्य पर विचार करते हुए अदालत जमानत देने की पक्षधर नहीं है।
अतिरिक्त सरकारी अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि भारद्वाज ने यह कहकर जांच को भटकाने का प्रयास किया कि सह-आरोपी दीपक कार चला रहा था।
उन्होंने कहा कि जानकारी होना और बाद में पता चलना, दोनों में अंतर की एक बारीक रेखा है। हम मामले में जांच कर रहे हैं। जब वह (भारद्वाज) आजाद था तो उसने जांच को भटकाने की कोशिश की। वह भविष्य में फिर से गुमराह कर सकता है।
अभियोजन के अनुसार भारद्वाज ने यह गलत दावा किया था कि सह-आरोपी दीपक खन्ना कार चला रहा था, जबकि जांच के दौरान सामने आया कि एक अन्य आरोपी अमित गाड़ी चला रहा था।
भारद्वाज के आचरण के बारे में सवाल उठाते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि आरोपी पुलिस को सूचित करने के लिए कानूनन बाध्य था, लेकिन बजाय इसके उसने अभियोजन को गुमराह किया।
उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि आरोपी भारद्वाज की अन्य आरोपियों से मिलीभगत हो सकती है।
अभियोजक ने कहा कि हमारा यह पक्ष कभी था ही नहीं कि भारद्वाज कार में था, बल्कि बात यह है कि उसने दुर्घटना में शामिल गाड़ी किसी और सह-आरोपी को दी थी जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस ही नहीं था।
भारद्वाज के वकील शिल्पेश चौधरी ने दलील दी कि घटना के समय वह कार में नहीं था और सभी कथित अपराध जमानती प्रकृति के हैं।
उन्होंने कहा कि भारद्वाज ने कथित घटना के बाद पुलिस के साथ सहयोग किया है और दो अन्य सह-आरोपियों की गिरफ्तारी में उनकी मदद की थी।
पुलिस ने इस मामले में दो जनवरी को दीपक खन्ना, अमित खन्ना, कृष्ण, मिथुन तथा मनोज मित्तल को गिरफ्तार किया था। चार दिन पहले आशुतोष को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को सोमवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
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