
जस्टिस रविंद्र डुडेजा ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को रोकने की कोई आवश्यकता नहीं है और इस अदालत को ऐसा करने की कोई वजह नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट को इस मामले में कार्यवाही जारी रखने की पूरी छूट है। मिश्रा(Kapil Mishra) के वकील ने इस पर जोर दिया था कि आरोप तय होने की स्थिति में उनके मुवक्किल की छवि को गंभीर नुकसान हो सकता है, लेकिन हाई कोर्ट ने इस पर विचार करने से इनकार कर दिया और पुलिस को चार हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 मई को तय की गई।
मिश्रा(Kapil Mishra) ने 22 जून, 2024 को पारित ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसमें उन्हें 2020 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने के आरोप में समन किया गया था। उनका कहना था कि उनका ट्वीट किसी भी समुदाय के बीच दुश्मनी बढ़ाने के लिए नहीं था, जैसा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपी एक्ट) की धारा 125 में अनिवार्य शर्त है। उनके वकील महेश जेठमलानी ने यह भी तर्क दिया कि यह एक गैर-संज्ञेय अपराध है और एफआईआर के बिना कार्रवाई नहीं हो सकती।
वहीं, दिल्ली पुलिस के सरकारी वकील ने मिश्रा(Kapil Mishra) के ट्वीट्स को दो धार्मिक समुदायों के बीच नफरत बढ़ाने वाला बताया और कहा कि दोनों अदालतों ने इस मामले में समान राय जताई है, इसलिए आरोप तय करने के स्टेज पर विचार किया जा सकता है।Kapil Mishra: