दिल्ली में भव्य राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन

हिंदी देश को जोड़ने का कार्य करती है। कवि समाज का वह सूत्रधार है, जो कठिन से कठिन बात को सरल शब्दों में कह देता है और व्यंग्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच जगाता है।

Delhi Arya Samaj Srinivas Puri
राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का सफल आयोजन (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar06 Mar 2026 05:48 PM
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Delhi News : केंद्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में दिल्ली आर्य समाज, श्रीनिवास पुरी में एक भव्य राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं कुशल संचालन करते हुए केंद्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि हिंदी के विकास में कवि सम्मेलनों का अत्यधिक योगदान रहा है।

हिंदी देश को जोड़ती है

अपने संबोधन के दौरान अनिल आर्य ने कहा कि हिंदी देश को जोड़ने का कार्य करती है। कवि समाज का वह सूत्रधार है, जो कठिन से कठिन बात को सरल शब्दों में कह देता है और व्यंग्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच जगाता है। उन्होंने इस तरह के आयोजनों को सामाजिक जागरूकता के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

कवियों ने बांधा समा

इस मंच पर राष्ट्रीय कवि प्रो. सारस्वत मोहन मनीषी ने अपनी कविताओं के माध्यम से व्यवस्था पर कटाक्ष किया और कहा कि जिस दिन दिल्ली ठीक हो गई, देश ठीक हो जाएगा। वहीं, सत्य प्रकाश भारद्वाज ने देशभक्ति पूर्ण गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। गायिका पिंकी आर्या ने ओजस्वी गीतों से वातावरण में जोश भर दिया, जबकि कुलदीप बृजवासी ने हास्य-व्यंग्य से लोगों का खूब मनोरंजन किया।

सामाजिक समरसता का संदेश

आर्य रवि देव गुप्त ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें सामाजिक समरसता के लिए कार्य करते हुए समाज को जोड़ने का कार्य करना होगा। इस अवसर पर प्रांत अध्यक्ष प्रवीण आर्य ने अमर शहीद पंडित लेख राम के बलिदान दिवस को याद किया और कहा कि वे हिंदू धर्म के लिए बलिदान हो गए, उन्हें शत-शत नमन। Delhi News

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महीनों से समुद्र में भटक रहे रूसी तेल जहाज भारत लौटे, सप्लाई कटने का डर खत्म?

अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापारिक दबाव के चलते भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल की खरीद कम कर रही थीं। इस वजह से रूस को चीन में नए खरीदार तलाशने पड़े थे। लेकिन ईरान युद्ध के बीच होर्मुज की खाड़ी के बंद होने की आशंका ने तस्वीर पालट दी है।

India-Russian oil ship oil
भारत ने फिर उठाया रूसी तेल का सहारा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar05 Mar 2026 08:06 PM
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Russian oil ship India : मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक तेल व्यापार की दिशा ही बदल दी है। अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के बीच, महीनों से भारतीय समुद्री क्षेत्र के पास भटक रहे रूसी तेल जहाजों को अचानक नई राह मिली है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, जो रूसी कार्गो जहाज पहले पूर्वी एशिया का रुख कर रहे थे, उन्होंने अपना रास्ता बदलकर भारत की ओर रुख कर लिया है। इसका सीधा मतलब है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत एक बार फिर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने की राह पर अग्रसर है।

जाने कैसे बदला खेल?

पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापारिक दबाव के चलते भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल की खरीद कम कर रही थीं। इस वजह से रूस को चीन में नए खरीदार तलाशने पड़े थे। लेकिन ईरान युद्ध के बीच होर्मुज की खाड़ी के बंद होने की आशंका ने तस्वीर पालट दी है। तेल की आपूर्ति में कमी की आशंका से घिरे भारत ने रणनीति बदली है और रूसी सप्लायर्स को फिर से मौका मिला है।

भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे जहाज

तेल टैंकरों पर नजर रखने वाली कंपनियों Kpler और Vortexa के आंकड़ों के मुताबिक, रूसी 'यूराल' ग्रेड के करीब 14 लाख बैरल कच्चा तेल ले जा रहे दो बड़े टैंकर इस हफ्ते भारत पहुंच रहे हैं:

  1. ओड्यून (Odyun): 7.3 लाख बैरल तेल ले जा रहा यह सूएजमैक्स टैंकर बुधवार को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर पहुंच गया है।
  2. मतारी (Matri): 7 लाख से ज्यादा बैरल तेल लेकर आ रहा यह अफ्रामैक्स टैंकर गुरुवार को गुजरात के वडिनार बंदरगाह पहुंचने वाला है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इन जहाजों ने पहले संकेत दिया था कि वे पूर्वी एशिया की ओर जा रहे हैं, लेकिन अचानक से उनकी दिशा भारत की ओर हो गई। एक अन्य टैंकर 'इंड्री' ने भी सिंगापुर का रुख करने के बाद अचानक मोड़ लेकर भारत की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया। बता दें कि इन तीनों जहाजों को पिछले साल ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने प्रतिबंधित जहाजों की सूची में शामिल किया था।

रिफाइनरियों को जल्द मिलेगी राहत

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, मध्य-पूर्व में युद्ध के कारण तेल सप्लाई में रुकावट आने की आशंका के बीच रूस भारत को तेल भेजने के लिए पूरी तरह तैयार है। सूत्रों की मानें, तकरीबन 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल ऐसे जहाजों में है जो भारतीय समुद्री क्षेत्र के पास पहुंच चुके हैं और कुछ हफ्तों के भीतर भारतीय बंदरगाहों पर उतारे जा सकते हैं।

इसे लेकर भारतीय रिफाइनरियों में राहत की लहर है, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार और उपभोक्ता है। भारत के पास कच्चे तेल का भंडार महज 25 दिनों की मांग को ही पूरा कर सकता है। ऐसे में मध्य-पूर्व के संकट के बीच रूसी तेल का यह बैकअप भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बहुत अहम साबित हो रहा है। Russian oil ship India

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फिनलैंड के राष्ट्रपति के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में PM मोदी ने दिया शांति का बड़ा संदेश

पीएम मोदी ने कहा, "हम इस बात से सहमत हैं कि कोई भी मुद्दा सिर्फ़ मिलिट्री लड़ाई से हल नहीं हो सकता। चाहे यूक्रेन हो या वेस्ट एशिया, हम लड़ाई को जल्दी खत्म करने और शांति बहाल करने की हर कोशिश का सपोर्ट करते रहेंगे।" उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड दोनों ही 'रूल ऑफ लॉ' और संवाद में विश्वास रखते हैं।

Prime Minister Narendra Modi Delhi
PM मोदी और फिनलैंड के राष्ट्रपति की ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar05 Mar 2026 04:58 PM
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PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के बीच हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आज कई बड़ी घोषणाएं की गईं। इस दौरान पीएम मोदी ने वैश्विक शांति और कूटनीति पर जोर देते हुए एक स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी मुद्दा केवल सैन्य बल या संघर्ष से हल नहीं हो सकता।

युद्ध से नहीं, संवाद से होगा समाधान

पीएम मोदी ने कहा, "हम इस बात से सहमत हैं कि कोई भी मुद्दा सिर्फ़ मिलिट्री लड़ाई से हल नहीं हो सकता। चाहे यूक्रेन हो या वेस्ट एशिया, हम लड़ाई को जल्दी खत्म करने और शांति बहाल करने की हर कोशिश का सपोर्ट करते रहेंगे।" उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड दोनों ही 'रूल ऑफ लॉ' और संवाद में विश्वास रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं (Global Institutions) में सुधार करना अब न केवल आवश्यक हो गया है, बल्कि यह अत्यंत तत्काल है। साथ ही, आतंकवाद को उसके सभी रूपों में खत्म करना दोनों देशों का साझा वादा है।

तकनीक और व्यापार में नई उड़ान: 6G और क्वांटम कंप्यूटिंग पर जोर

इस मौके पर दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को लेकर भी बड़े कदम उठाए गए। पीएम मोदी ने घोषणा की कि साल 2026 की शुरुआत में होने वाला ऐतिहासिक भारत-यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को और मजबूत करेगा। भारत और फिनलैंड अपने संबंधों को एक 'रणनीतिक साझेदारी' का रूप दे रहे हैं, जिसका केंद्र डिजिटलीकरण और सस्टेनेबिलिटी होगा। इस साझेदारी के तहत 6G टेलीकॉम, क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लीन एनर्जी जैसे हाई-टेक सेक्टरों में सहयोग को गति मिलेगी। पीएम मोदी ने कहा कि यह कदम दोनों देशों को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

छात्रों और प्रतिभाओं के लिए नए रास्ते

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि फिनलैंड भारतीय छात्रों और प्रतिभाओं के लिए एक पसंदीदा गंतव्य (Preferred Destination) बनता जा रहा है। उन्होंने कहा, "दोनों देशों के इनोवेशन इको-सिस्टम को जोड़ने के लिए आज हमने फिनलैंड के साथ एक व्यापक माइग्रेशन एंड मोबिलिटी एग्रीमेंट किया है। इसके साथ ही हम जॉइंट रिसर्च एंड स्टार्टअप सहयोग को भी और मजबूत करने जा रहे हैं।" PM Modi

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