
ACB की दर्ज प्राथमिकी में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और तत्कालीन शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व लोक निर्माण मंत्री सत्येंद्र जैन सहित कई सरकारी अधिकारियों और निजी ठेकेदारों के नाम शामिल हैं। जांच में यह सामने आया है कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच जहां केवल 2,405 कक्षाओं की वास्तविक आवश्यकता थी, वहां इस संख्या को बढ़ाकर 12,748 तक पहुंचा दिया गया — वह भी बिना किसी नियामक स्वीकृति के। इसके साथ ही निर्माण लागत में लगभग 49% की अस्वाभाविक बढ़ोतरी दर्ज की गई ।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 जून 2025 को दिल्ली-एनसीआर के 37 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में जो साक्ष्य सामने आए, उन्होंने घोटाले की गहराई को उजागर कर दिया। निजी ठेकेदारों के दफ्तरों से न केवल सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की असली फाइलें बरामद हुईं, बल्कि अधिकारियों की फर्जी मुहरें, 322 संदिग्ध बैंक पासबुक, नकली लेटरहेड और कई शेल कंपनियों से जुड़े अहम दस्तावेज भी जब्त किए गए ।
जिसमें बताया गया कि इन बैंक खातों को मजदूरों के नाम पर खोलकर बड़े पैमाने पर सरकारी धन की हेराफेरी की गई। जांच में यह भी सामने आया है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से जानबूझकर महंगे और घटिया निर्माण प्रस्तावों को चुना गया। एक ओर ज़रूरत से तीन गुना अधिक क्लासरूम बनवाए गए, वहीं दूसरी ओर इन क्लासरूम्स के निर्माण में वास्तविक से कई गुना अधिक खर्च दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। Delhi Classroom Scam