
15 अगस्त की सुबह जब पूरा देश आज़ादी का जश्न मनाने के लिए तैयार होगा, उसी समय दिल्ली मेट्रो भी राजधानीवासियों को एक खास तोहफा देगी। 15 अगस्त 2025 को लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने वालों के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने विशेष परिचालन व्यवस्था की घोषणा की है। इस दिन राजधानी की सभी मेट्रो लाइनों पर सेवाएं सामान्य से पहले, सुबह 4 बजे से शुरू हो जाएंगी। DMRC
DMRC के मुताबिक, सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच मेट्रो हर 30 मिनट के अंतराल पर चलेगी। इसके बाद सेवाएं सामान्य समय सारिणी के अनुसार जारी रहेंगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य समारोह में पहुंचने वाले आम नागरिकों, आमंत्रित मेहमानों और विशिष्ट अतिथियों को सहज आवागमन सुविधा प्रदान करना है। जिन यात्रियों के पास रक्षा मंत्रालय का आधिकारिक निमंत्रण पत्र होगा, वे DMRC द्वारा जारी किए गए विशेष क्यूआर टिकट का उपयोग करके लाल किला और अपने गंतव्य के बीच मुफ्त यात्रा कर सकेंगे। इस यात्रा का किराया रक्षा मंत्रालय वहन करेगा और DMRC को इसकी प्रतिपूर्ति की जाएगी।
इस स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली मेट्रो तकनीकी इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है। मजलिस पार्क से शिव विहार के बीच चलने वाली पिंक लाइन अब पूरी तरह ‘ड्राइवरलेस’ मोड में दौड़ेगी। DMRC का कहना है कि यह उपलब्धि दिल्ली मेट्रो को दुनिया के सबसे बड़े चालक रहित मेट्रो नेटवर्क की श्रेणी में ले जाएगी, जिससे राजधानी का सार्वजनिक परिवहन एक नए युग में प्रवेश करेगा।
‘अनअटेंडेड ट्रेन ऑपरेशंस’ (UTO) वह तकनीक है जिसमें ट्रेन का संचालन पूरी तरह स्वचालित प्रणाली से होता है। ट्रेन का चलना, रुकना, दरवाजों का खुलना-बंद होना और आपातकालीन स्थितियों का प्रबंधन बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के किया जाता है। दिल्ली मेट्रो ने 2020 में UTO तकनीक की शुरुआत की थी। पहले इसे मैजेंटा लाइन (जनकपुरी पश्चिम से बॉटनिकल गार्डन) पर लागू किया गया था, जहां यह अब पूरी तरह क्रियान्वित है। मार्च 2025 में पिंक लाइन पर इसकी प्रक्रिया शुरू हुई और जून तक यह दूसरे चरण में पहुंच गई। आने वाले तीन-चार महीनों में पिंक लाइन भी 100% चालक रहित हो जाएगी।
मैजेंटा और पिंक दोनों लाइनों पर UTO के लागू होने के बाद, दिल्ली-एनसीआर के 395 किलोमीटर लंबे नेटवर्क में से 97 किलोमीटर स्वचालित कॉरिडोर के अंतर्गत आ जाएंगे। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि विश्वस्तर पर दिल्ली मेट्रो की पहचान को भी मजबूत करेगी। DMRC