राजधानी दिल्ली के चार सबसे बड़े केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है।

Health News : राजधानी दिल्ली के चार सबसे बड़े केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। लोकसभा में केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि 2025-26 तक इन अस्पतालों में कुल 1,523 पद रिक्त हैं। हालांकि पिछले तीन वर्षों में रिक्त पदों की संख्या 2,015 से घटकर 1,523 हो गई है, लेकिन मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कमी अब भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने संसद में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
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लोकसभा में सांसद के प्रश्न के उत्तर में सरकार ने बताया कि सफदरजंग अस्पताल, डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा नजफगढ़ स्थित ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (RHTC) में डॉक्टर, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के बड़ी संख्या में पद अब भी खाली हैं। सरकार का कहना है कि रिक्तियों को भरने के लिए लगातार भर्ती प्रक्रियाएं चलाई जा रही हैं। डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए UPSC को समय पर रिक्तियां भेजी जा रही हैं, जबकि नर्सिंग पदों के लिए NORCET परीक्षा नियमित रूप से आयोजित की जा रही है। ग्रुप-बी और ग्रुप-सी के गैर-शिक्षण पदों की भर्ती कॉमन रिक्रूटमेंट एग्जाम (CRE) और अन्य माध्यमों से की जा रही है।
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दिल्ली का सफदरजंग अस्पताल देश के सबसे व्यस्त सरकारी अस्पतालों में गिना जाता है। यहां प्रतिदिन 10 हजार से अधिक मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं, जबकि अस्पताल में लगभग 3 हजार से ज्यादा बेड उपलब्ध हैं। इसके बावजूद डॉक्टरों के कई पद रिक्त हैं। नर्सिंग स्टाफ में भी सैकड़ों पद खाली हैं, जबकि पैरामेडिकल कर्मचारियों की कमी सबसे अधिक चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार इस श्रेणी में अब भी 500 से ज्यादा पद खाली हैं, जिससे अस्पताल की कार्यक्षमता पर असर पड़ रहा है।
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डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में प्रतिदिन करीब 3,500 से 4,000 मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां डॉक्टरों के कुछ पद अब भी रिक्त हैं, लेकिन नर्सिंग स्टाफ की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। हालांकि पैरामेडिकल कर्मचारियों की कमी अभी भी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ भी मरीजों की देखभाल के लिए उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
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महिलाओं और बच्चों के इलाज के लिए प्रसिद्ध लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रोजाना 6 हजार से अधिक मरीज पहुंचते हैं। यहां डॉक्टरों और नर्सों दोनों के रिक्त पदों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि पैरामेडिकल कर्मचारियों के कुछ पद जरूर भरे गए हैं, लेकिन कुल मिलाकर स्टाफ की कमी अस्पताल के कामकाज को प्रभावित कर रही है।
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नजफगढ़ स्थित ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (RHTC) आकार में छोटा जरूर है, लेकिन यहां रिक्त पदों का प्रतिशत सबसे अधिक है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार यहां नर्सिंग स्टाफ के अधिकांश पद वर्षों से खाली हैं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की भी भारी कमी बनी हुई है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि रिक्त पदों को भरना एक सतत प्रक्रिया है। योग्य उम्मीदवारों की उपलब्धता, आरक्षण रोस्टर और भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नियुक्तियां की जाती हैं। सरकार का दावा है कि चिकित्सा शिक्षा का विस्तार किया जा रहा है, नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं और डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बावजूद बड़े सरकारी अस्पतालों में बढ़ती मरीज संख्या के कारण मानव संसाधन की चुनौती अभी भी बनी हुई है।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ता है। इससे इलाज में देरी, लंबी प्रतीक्षा, कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार और मेडिकल शिक्षा से जुड़े संस्थानों में प्रशिक्षण की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। दिल्ली के ये अस्पताल देशभर से आने वाले मरीजों का इलाज करते हैं, इसलिए यहां स्टाफ की कमी केवल राजधानी ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
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