New Delhi : जलाने से रोकने के लिए मंत्रीस्तरीय अंतर-मंत्रालयीय बैठक
New Delhi: Ministerial level inter-ministerial meeting to prevent burning
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 07:39 PM
एस एन वर्मा
New Delhi : नई दिल्ली। मौसम बदलते ही एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने लगा है। इसको देखते हुए केंद्र सरकार सतर्क हो गयी है। पराली तथा अन्य कारणों से उत्पन्न प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्र की मंत्रीस्तरीय अंतर-मंत्रालयीय बैठक केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता तथा केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव एवं केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला की सह अध्यक्षता में आयोजित की गई। पराली जलाने से रोकने को लेकर बैठक में तीनों मंत्रियों ने राज्यों के साथ विचार-विमर्श किया। श्री तोमर ने कहा कि इस संबंध में प्रभावित जिलों में संबंधित राज्य सरकार द्वारा कलेक्टरों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है। वहीं श्री यादव ने कहा कि राज्यों को तत्काल प्रभावी उपायों पर अमल करना चाहिए। श्री रूपाला ने पंजाब में पराली जलाने की समस्या के लिए विशेष रूप से सक्रियता पर बल दिया।
New Delhi :
मालूम हो कि अवशेष प्रबंधन पर केंद्रीय योजना के तहत सरकार पहले से ही पंजाब, हरियाणा, उप्र व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को पराली जलाने के कारण दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। चालू वर्ष के दौरान केंद्र द्वारा अब तक 601.53 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं। साथ ही, पिछले चार साल में दी गई राशि में से भी करीब 900 करोड़ रुपये राज्यों के पास उपलब्ध है। बैठक में राज्यों को पराली प्रबंधन के लिए भारत सरकार द्वारा प्रदान की गई इस धनराशि का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
श्री तोमर ने कहा कि राज्यों को पराली के प्रभावी इन-सीटू अपघटन के लिए पूसा संस्थान द्वारा विकसित बायो-डीकंपोजर के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों की अपेक्षाओं को पूरा करने की दिशा में केंद्र सरकार ने अपने दायित्वों का निर्वहन करने की पूरी कोशिश की है। राज्य सरकारें भी इसी तरह शिद्दत से काम करें तो इसके अच्छे परिणाम आएंगे। विशेषकर, पंजाब के अमृतसर व तरनतारण जिलों में पराली जलाने पर प्रभावी नियंत्रण कर लिया जाए तो 50 प्रतिशत उपलब्धि हासिल हो जाएंगी, क्योंकि इन दो जिलों में सर्वाधिक समस्या विद्यमान है। इन चारों राज्यों में प्रभावी नियंत्रण से अन्य राज्यों में भी समस्या का विस्तार नहीं होगा। योजनाबद्ध तरीके से समग्र प्रयासों से काम करने पर पशुओं के लिए चारे की भी उपलब्धता में आसानी होगी। श्री तोमर ने बताया कि 4 नवंबर को पूसा, दिल्ली में कार्यशाला की जा रही है, जिसमें पंजाब व आसपास के किसानों को इसी निमित्त बुलाया गया है, पंजाब के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हों, ताकि पूसा डी-कंपोजर को लेकर उनका भ्रम दूर हो सके। श्री तोमर ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पूसा डी-कंपोजर सबसे सस्ता और प्रभावी उपाय है, जिसे बढ़ाना होगा।