रोमांस के लिए टीनएजर्स हुए AI पर निर्भर! सर्वे में हुआ खुलासा
भारत
चेतना मंच
30 Oct 2025 01:26 PM
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ सवालों के जवाब देने या काम आसान बनाने का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि यह किशोरों के भावनात्मक जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहा है। ताजा शोध में सामने आया है कि किशोरावस्था के लड़के अब थेरेपी और रोमांस दोनों के लिए AI चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं, जो विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है। New Delhi News :
एआई पर बढ़ती निर्भरता
एआई की लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी है कि अब यह लोगों के व्यक्तिगत जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है। कई किशोर किसी भी सवाल, सलाह या मन की बात कहने के लिए अब इंसानों की बजाय AI चैटबॉट्स की शरण में जाते हैं। शोधकतार्ओं का कहना है कि AI का पर्सनलाइज्ड नेचर यानी हर यूजर के हिसाब से जवाब देना युवाओं को खासा आकर्षित कर रहा है।
किशोर मान रहे एआई को अपना दोस्त
अमेरिका के सेकेंडरी स्कूलों में किए गए एक सर्वे के अनुसार, करीब एक-तिहाई किशोर लड़के AI को अपना दोस्त मानकर उससे रोज बात करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की भावनात्मक निर्भरता बच्चों के सामाजिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है। थेरेपी या AI थेरेपिस्ट नाम से चल रहे चैटबॉट्स की लोकप्रियता में भी भारी इजाफा हुआ है। शोध के मुताबिक, साइकोलॉजिस्ट नामक एक लोकप्रियAI चैटबॉट को एक साल में 7.8 करोड़ से ज्यादा मैसेज मिले। संगठनों ने चेतावनी दी है कि AI गर्लफ्रेंड्स जैसे ट्रेंड भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां यूजर्स वर्चुअल पार्टनर का लुक, नेचर और बातचीत का तरीका तक खुद तय कर सकते हैं।
एआई कंपनियां हुईं सख्त
हाल ही में एक प्रसिद्ध चैटबॉट कंपनी ने किशोरों और एआई चैटबॉट्स के बीच ओपन-एंडेड बातचीत पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब एक 14 वर्षीय अमेरिकी किशोर की आत्महत्या का मामला सामने आया, जिसके बारे में उसकी मां ने दावा किया कि वह एआई चैटबॉट के प्रति आसक्त हो गया था और चैटबॉट ने उसे आत्महत्या के लिए उकसाया था।
वर्चुअल दुनिया को मानते हैं बेहतर
इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के 37 स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों पर हुए एक सर्वे में पाया गया कि 53 फीसदी किशोरों को वास्तविक दुनिया के बजाय आॅनलाइन दुनिया अधिक सुकून देने वाली लगती है। यह आंकड़ा बताता है कि आज की डिजिटल पीढ़ी के लिए वर्चुअल कनेक्शन ही नया रियलिटी जोन बन गया है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि किशोर उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से संवेदनशील होते हैं और अगर वे एआई से भावनात्मक जुड़ाव महसूस करने लगें तो इससे वास्तविक रिश्तों की समझ और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। New Delhi News