
देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर सूफी संगीत की धुन की गवाह बनने जा रही है। दिल्ली का कमानी ऑडिटोरियम 12 सितंबर को सूफी संगीत के जादुई रंगों से रोशन होने वाली है। Wishes and Blessings नामक NGO द्वारा आयोजित ‘जश्न-ए-कव्वाली’ में मशहूर कव्वाल नियाजी निजामी ब्रदर्स अपनी सूफियाना पेशकश से महफिल सजाने वाले हैं। इस कॉन्सर्ट में निज़ामी ब्रदर्स अपने लोकप्रिय नग़मों, खासकर “हंसता हुआ नूरानी चेहरा” जैसे सदाबहार गीतों से श्रोताओं को रूहानी सफर पर ले जाएंगे। Jashn-e-Qawwali
दिल्ली एक बार फिर सूफी सरगमों का गवाह बनने जा रही है। कमानी ऑडिटोरियम में होने वाले इस जश्न-ए-कव्वाली में जब नियाजी निजामी ब्रदर्स अपनी सूफियाना आवाज़ों से समां बांधेंगे, तो सिर्फ महफिल ही नहीं सजेगी, बल्कि इंसानियत का पैगाम भी फैलेगा। इस कॉन्सर्ट से जुटाई गई राशि दिल्ली स्थित वृद्धाश्रम ‘मन का तिलक’ के लिए स्थायी घर बनाने में इस्तेमाल होगी, जो अब तक सैकड़ों बेसहारा बुजुर्गों का सहारा बन चुका है।
हैदर निजामी , हसन निजामी और इमरान निजामी — ये तीनों भाई मिलकर ‘नियाजी निजामी ब्रदर्स’ के नाम से मशहूर हैं। दिल्ली के सिकंदराबाद घराने से ताल्लुक रखने वाले ये कलाकार लंबे समय से सूफी संगीत की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन दरगाह पर इनके कव्वाली कार्यक्रमों में हर बार बड़ी संख्या में श्रोता उमड़ते हैं। Wishes and Blessings की फाउंडर गीताांजलि चोपड़ा का कहना है— हम ऐसा समाज बनाना चाहते हैं जहां कोई बुजुर्ग खुद को अकेला न महसूस करे। जश्न-ए-कव्वाली हमारी उस सोच की ओर एक और कदम है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम की शुरुआत कोविड-19 के दौर में रामपुर घराने के कलाकारों को सपोर्ट करने के लिए की गई थी। अब यह चौथे एडिशन में पहुंच चुका है और पहले तीन आयोजन बेहद सफल रहे थे।
12 सितंबर की शाम दिल्ली का कमानी ऑडिटोरियम सूफी सुरों से गूंजेगा। मंडी हाउस के इस मशहूर मंच पर जब नियाजी निजामी अपनी कव्वाली से समां बांधेंगे, तो श्रोता न सिर्फ रूहानी संगीत का आनंद उठाएंगे, बल्कि एक नेक पहल का हिस्सा भी बनेंगे। महज ₹499 के टिकट पर यह शाम परिवार संग बिताने का ऐसा मौका है, जो दिल और दुआ दोनों जीत लेगा। Jashn-e-Qawwali