योजना में एरोसिटी से एयरपोर्ट टर्मिनल-1 तक 2.3 किमी का भूमिगत कॉरिडोर भी शामिल है, जिससे एयरपोर्ट तक पहुंच और ज्यादा सुगम बन सकेगी। वहीं तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार करने का प्रस्ताव है, जो दक्षिणी दिल्ली और एनसीआर के बीच आवाजाही को बेहतर करेगा।

Delhi Metro : केंद्र सरकार से दिल्ली मेट्रो के फेज-5A को मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली-एनसीआर के लाखों यात्रियों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। इस चरण में तीन नए मेट्रो कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिनका सीधा असर नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और दिल्ली एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी पर पड़ेगा। मतलब साफ है अब यात्रियों को लंबा, घुमावदार और समय खपाने वाला रास्ता नहीं चुनना पड़ेगा; सफर कम समय में, ज्यादा सहज तरीके से पूरा हो सकेगा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के अधिकारियों के अनुसार, फेज-5A के ये प्रस्तावित कॉरिडोर फेज-4 की गोल्डन लाइन विस्तार परियोजना से जुड़े होंगे। इन रूट्स के चालू होने के बाद नोएडा-फरीदाबाद-गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों से एयरपोर्ट तक पहुंच आसान होगी। इसका फायदा रोज़ाना अप-डाउन करने वालों के साथ-साथ बिजनेस ट्रैवलर्स और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को भी मिलेगा क्योंकि एयरपोर्ट कनेक्टिविटी सीधे नेटवर्क में “गांठ” की तरह जुड़ जाएगी।
फेज-4 की 23.622 किलोमीटर लंबी गोल्डन लाइन पर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और करीब 65% काम पूरा हो चुका है। इस रूट पर कुल 15 मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं, जो आसपास के रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेंगे। योजना में एरोसिटी से एयरपोर्ट टर्मिनल-1 तक 2.3 किमी का भूमिगत कॉरिडोर भी शामिल है, जिससे एयरपोर्ट तक पहुंच और ज्यादा सुगम बन सकेगी। वहीं तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार करने का प्रस्ताव है, जो दक्षिणी दिल्ली और एनसीआर के बीच आवाजाही को बेहतर करेगा।
फेज-5A के तहत एरोसिटी मेट्रो स्टेशन को एक बड़े इंटरचेंज के रूप में विकसित किया जाएगा। अभी एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर द्वारका सेक्टर-21 से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बीच यात्रियों के लिए विकल्प तो हैं, लेकिन एक मजबूत इंटरचेंज की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। एरोसिटी के इंटरचेंज बनने से दक्षिणी दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम से आने-जाने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट और अन्य लाइनों तक सीधी और आसान कनेक्टिविटी मिल सकेगी। इसका एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि हौज खास जैसे अत्यधिक भीड़ वाले स्टेशनों पर यात्रियों का दबाव घटेगा। दूसरी तरफ, तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को गोल्डन लाइन का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इसे फेज-4 की परियोजनाओं के साथ ही पूरा करने की योजना है। अगर टेंडर प्रक्रिया और समयसीमा सुचारू रही, तो इस रूट पर निर्माण गति पकड़ सकता है और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली से एनसीआर की कड़ी मजबूत हो जाएगी।
फेज-4 और फेज-5A की परियोजनाएं पूरी होने के बाद दिल्ली मेट्रो नेटवर्क 475 किमी से बढ़कर 500 किमी से अधिक हो जाएगा। इससे एनसीआर के ज्यादा हिस्सों में मेट्रो की पहुंच बढ़ेगी, सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा और प्रदूषण घटने की उम्मीद भी मजबूत होगी। कुल मिलाकर, यह विस्तार सिर्फ “नई लाइन” नहीं, बल्कि एनसीआर की रोजमर्रा की आवाजाही को तेज, स्मार्ट और ज्यादा भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। Delhi Metro