दिल्ली भाजपा कार्यालय में उत्सव का माहौल, नितिन नबीन बने आकर्षण का केंद्र

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बुधवार को दिल्ली प्रदेश भाजपा पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित मकर संक्रांति मिलन समारोह राजनीतिक उत्साह और संगठनात्मक एकजुटता का प्रतीक बनकर उभरा है।

Delhi BJP Office Makar Sakrati
दिल्ली भाजपा में दिखा नया उत्साह (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar14 Jan 2026 10:09 PM
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ढोल-नगाड़ों की गूंज, “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के नारों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं ने नितिन नबीन का जोरदार स्वागत किया। पूरे परिसर को केसरिया झंडों और फूलों से सजाया गया था, जिससे कार्यक्रम का माहौल उत्सवपूर्ण नजर आया। इस अवसर पर भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का दिल्ली भाजपा की ओर से भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

पारंपरिक अंदाज में हुआ स्वागत

बता दें कि कार्यक्रम की मेजबानी कर रहे दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने नितिन नबीन का पारंपरिक शैली में स्वागत किया। उन्होंने मखाने की माला पहनाकर मकर संक्रांति के प्रतीक स्वरूप खिचड़ी और तिल-कुट भेंट किया। इस दौरान सचदेवा ने कहा कि मकर संक्रांति परिवर्तन और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है और नितिन नबीन जैसे युवा, कर्मठ नेतृत्व के आगमन से संगठन को नई दिशा और गति मिलेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे दिल्ली की सेवा के लिए एकजुट होकर कार्य करें और संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाएं।

समरसता और भाईचारे का पर्व है मकर संक्रांति

प्रदेश अध्यक्ष ने दिल्लीवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व समाज में समरसता, एकता और भाईचारे का संदेश देता है। जिस प्रकार सूर्य उत्तरायण होकर प्रकाश फैलाता है, उसी तरह जनता के सहयोग से दिल्ली में विकास और खुशहाली का नया अध्याय लिखा जाएगा। अपने स्वागत से अभिभूत नितिन नबीन ने दिल्ली भाजपा संगठन की सराहना करते हुए कहा कि मकर संक्रांति बदलाव और नई शुरुआत का प्रतीक है। दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ताओं का उत्साह यह दर्शाता है कि संगठन आने वाली राजनीतिक चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने और संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का आग्रह किया।

खिचड़ी भोज में दिखी संगठन की एकजुटता

समारोह के दौरान पारंपरिक खिचड़ी भोज का आयोजन भी किया गया, जिसमें वरिष्ठ नेताओं से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं ने एक साथ भोजन किया। कार्यक्रम में दिल्ली के सांसदों, विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व महापौरों, विधायकों, निगम पार्षदों सहित हजारों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही। मंच पर कुलजीत चहल, वीरेंद्र सचदेवा, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, सांसद योगेंद्र चंदोलिया, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, संजय मयूख, पूर्वांचल मोर्चा अध्यक्ष संजय ओझा, कमलजीत सेहरावत, महामंत्री विष्णु मित्तल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

राजनीतिक संकेतों से भरपूर आयोजन

तिल-गुड़ और खिचड़ी के प्रसाद वितरण के साथ आयोजित यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब नितिन नबीन के जल्द ही पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने की चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में यह आयोजन न सिर्फ सांस्कृतिक उत्सव रहा, बल्कि भाजपा की संगठनात्मक एकजुटता और आगामी राजनीतिक रणनीतियों का भी स्पष्ट संदेश देता नजर आया।

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क्यों बदला पीएमओ का पता? जानिए ‘सेवा तीर्थ’ की पूरी कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी 2026 को अपने नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट हो रहे है।

PMO Learn about 'Seva Teerth
‘सेवा और कर्तव्य’ की थीम पर बना पीएमओ का नया कार्यालय (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar14 Jan 2026 06:21 PM
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यह कदम सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आधुनिक, एकीकृत और अधिक प्रभावी बनाना है। आज़ादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) साउथ ब्लॉक से बाहर स्थानांतरित हुआ है।

 1,189 करोड़ की लागत से बना आधुनिक परिसर

बता दें कि ‘सेवा तीर्थ’ परिसर का निर्माण 1,189 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह करीब 2,26,203 वर्ग फुट में फैला हुआ है और इसका निर्माण देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने किया है। यह पूरा परिसर औपनिवेशिक विरासत से बाहर निकलकर नए भारत की प्रशासनिक सोच को दर्शाता है।

तीन इमारतों का संगम है ‘सेवा तीर्थ’

बता दें कि ‘सेवा तीर्थ’ को तीन अलग-अलग लेकिन आपस में जुड़े भवनों में विकसित किया गया है सेवा तीर्थ-1: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय (सितंबर 2024 में ही शिफ्ट), सेवा तीर्थ-3: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) इन तीनों प्रमुख विभागों का एक ही परिसर में होना प्रशासनिक समन्वय, निर्णय प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा।

साउथ और नॉर्थ ब्लॉक बनेंगे म्यूजियम

बता दें कि PMO के शिफ्ट होते ही ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को सार्वजनिक संग्रहालय में बदला जाएगा। इसका नाम ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ रखा गया है। इसके तकनीकी और डिजाइन विकास के लिए 19 दिसंबर 2024 को फ्रांस की एक म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ समझौता किया गया है। यह संग्रहालय भारत की सभ्यता, शासन व्यवस्था और विकास यात्रा को आम जनता के सामने प्रस्तुत होगा।

औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति का विजन

‘सेवा तीर्थ’ में पीएमओ का स्थानांतरण प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत औपनिवेशिक प्रतीकों और मानसिकता से मुक्ति पर जोर दिया जा रहा है। इससे पहले राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया गया था। इसी क्षेत्र में प्रधानमंत्री का नया आवास ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव पार्ट-2’ भी निर्माणाधीन है।

आधुनिकता और कार्यकुशलता पर फोकस

सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत कॉमन सेंट्रल सचिवालय (CCS) का निर्माण भी किया जा रहा है, ताकि दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में फैले मंत्रालयों को एक ही जगह लाया जा सके। हाल ही में शुरू हुआ ‘कर्तव्य भवन’ इसका उदाहरण है। ‘सेवा तीर्थ’ इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो सेवा और कर्तव्य की थीम पर आधारित है।

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पर्यावरण संरक्षण के साथ कमाई का रास्ता, दिल्ली सरकार लाई नई नीति

दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में ‘कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क’ को मंजूरी दे दी गई।

Chief Minister Rekha Gupta
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar14 Jan 2026 02:56 PM
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इस नई नीति के तहत दिल्ली सरकार अपने विभिन्न ग्रीन प्रोजेक्ट्स से होने वाली कार्बन उत्सर्जन में कमी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजार में बेचकर अतिरिक्त राजस्व जुटाएगी।

पर्यावरण संरक्षण के साथ मिलेगा नया राजस्व स्रोत

बता दें कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार जलवायु परिवर्तन के खिलाफ पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। कार्बन क्रेडिट नीति के लागू होने से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सरकार को एक नया और स्थायी राजस्व स्रोत भी प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस नीति से होने वाली आय राज्य के समेकित कोष (Consolidated Fund of the State) में जमा की जाएगी और इसका उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों में किया जाएगा।

दिल्ली बनेगी कार्बन मार्केट में अग्रणी राज्य

बता दें कि मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस पहल के माध्यम से दिल्ली सरकार भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में नेतृत्व करेगी। साथ ही, यह नीति स्थायी विकास के लिए नए वित्तीय अवसर भी खोलेगी। दिल्ली देश का ऐसा प्रमुख राज्य बनकर उभरेगा जो कार्बन मार्केट का प्रभावी ढंग से लाभ उठाएगा।

किन योजनाओं से बनेंगे कार्बन क्रेडिट?

दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के अनुसार, यह फ्रेमवर्क विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही उन योजनाओं को कवर करेगा जिनसे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। इनमें प्रमुख रूप से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन, बड़े पैमाने पर पौधारोपण, सौर ऊर्जा को बढ़ावा और कचरा प्रबंधन और वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन सभी पहलों से होने वाली प्रदूषण में कमी को वैज्ञानिक पद्धति से मापा जाएगा, फिर उन्हें कार्बन क्रेडिट के रूप में रजिस्टर कर बाजार में बेचा जाएगा।

बिना सरकारी खर्च के होगी कमाई

इस नीति की सबसे बड़ी खासियत इसका रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल है। पर्यावरण विभाग पारदर्शी RFP प्रक्रिया के तहत एक विशेषज्ञ एजेंसी का चयन करेगा। यही एजेंसी कार्बन क्रेडिट की पहचान, दस्तावेजीकरण, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार रजिस्ट्रेशन और मार्केट में बिक्री की पूरी प्रक्रिया संभालेगी। इस पर सरकार को कोई अग्रिम खर्च नहीं करना होगा। होने वाली कमाई का एक हिस्सा एजेंसी को मिलेगा, जबकि अधिकांश राशि सीधे सरकार के खाते में जाएगी।

राज्य के खजाने में सीधे जमा होगी आय

कार्बन क्रेडिट की बिक्री से प्राप्त पूरी राशि सीधे दिल्ली सरकार के संचित कोष में जमा की जाएगी और इसे सरकारी वित्तीय खातों में दर्शाया जाएगा। इस धनराशि का उपयोग राजधानी में पर्यावरण सुधार और विकास कार्यों को और गति देने के लिए किया जाएगा।

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