
Noida News : आप सहज ही कल्पना कर सकते हैं जब 50 साल बाद दोस्त आपस में मिलेंगे तो क्या नजारा बनेगा। आधी सदी बीतने के बाद दोस्तों के आपस में मिलने के ऐसे ही एक नजारे का हम यहां जिक्र कर रहे हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, दिल्ली तथा दूसरे अनेक स्थानों पर रहने वाले दोस्त जैसे ही दिल्ली की डिफेंस कालोनी में एक जगह जमा हुए तो उन सब दोस्तों के चेहरे अचानक खिल उठे।
यह किस्सा है मेरठ शहर में स्थित मेरठ कालेज के पूर्व छात्रों का। दरअसल, 50 साल पहले मेरठ कालेज से राजनीति शास्त्र में एमए करने वाले छात्रों ने अपनी एमए की डिग्री की स्वर्ण जयंती मनायी। स्वर्ण जयंती मनाने का यह कार्यक्रम बेहद अनोखा और खास था। इस आयोजन की पहल नोएडा क्षेत्र के जाने माने शिक्षाविद् व समाजसेवी आनंद चौहान ने की। आप जानते ही होंगे कि आनंद चौहान एमिटी विश्वविद्यालय के संस्थापक प्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. अशोक चौहान के छोटे भाई तथा एमिटी का संचालन करने वाली संस्था एमिटी एजुकेशनल ग्रुप एवं एकेसी ग्रुप के प्रमुख निदेशक हैं। आनंद चौहान के बेहतरीन कार्यों से नोएडा का प्रत्येक नागरिक परिचित है। आनंद चौहान की पहल पर ही मेरठ कालेज के पूर्व छात्र स्वर्ण जयंती समारोह मनाने के लिए दिल्ली की डिफेंस कालोनी में स्थित आनंद चौहान के आवास पर एकत्र हुए। इस आयोजन में वर्ष 1973 में मेरठ कालेज से एमए करने वाले अनेक दोस्त एकत्र हुए। एक दूसरे से मिलते ही इन दोस्तों के चेहरे चमक उठे।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद तथा दिल्ली आदि दूसरे शहरों में रहने वाले मेरठ कालेज के पूर्व छात्र अब अपने अपने क्षेत्रों में दिग्गज व्यक्तित्व बन चुके हैं। जिन दोस्तों ने स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया, उनमें प्रसिद्ध पत्रकार व नवभारत टाइम्स अखबार के संपादक हेमंत स्नेही, मेरठ के प्रसिद्ध कारोबारी हीरा हॉलमार्किंग सेंटर के सीईओ अशोक गुप्ता, एमिटी समूह के निदेशक तथा कॉस्टोकॉम इंडिया लि. नामक प्रसिद्ध प्लास्टिक, मोल्डिंग कंपनी के प्रबंध निदेशक आनंद चौहान, बृजभूषण कौशिक, श्रीमती कंचन भाटिया (जयपुर), कुसुमलता (बंगलुरु) सुशीला सिसौदिया समेत अनेक पुराने दोस्तों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के संयोजक बृजभूषण कौशिक के अनुसार सम्मेलन में चार छात्राओं- कंचन भाटिया, कुसुमलता, सुशीला सिसोदिया और कमलेश बंसल ने भी भाग लिया। महोत्सव में भाग लेने के लिए कंचन जयपुर से और कुसुम बंगलौर से दिल्ली आईं। सम्मेलन में सुशीला ने अपने गायन से और कंचन व कुसुम ने अपने नृत्य से खूब तालियाँ बटोरी। हेमन्त स्नेही का काव्यपाठ विशेष रूप से सराहा गया। जिसमें सभी छात्रों की ही नहीं, तत्कालीन प्राध्यापकों की भी विशेषताओं का सुरुचिपूर्ण चित्रण किया गया था।
आनन्द चौहान और उनके परिजनों ने अपने आतिथ्य सत्कार से सभी का मन मोह लिया। सम्मेलन के समापन से पूर्व परस्पर उपहारों का आदान-प्रदान भी किया गया। सभी को सम्मेलन के स्मृति चिह्न भी प्रदान किए गए। यह भी निश्चय किया गया कि आगामी सम्मेलन से पूर्व बैच के कुछ और सदस्यों को खोजने का भरसक प्रयास किया जाए।