
Noida News: Mirror roaming in the city[/caption]
आरडब्ल्यूए के दूसरे उपाध्यक्ष एन.सी. वरुण का मानना हैं कि सेक्टर-19 में लगभग 1 साल पहले सीवर लाइन डाली गई थी। पर कहीं-कहीं सीवर लाइन को फ्लैटों के साथ जोड़ा ही नहीं गया। जैसे कि बी-48, बी-128, सी-196, यहां तो हालात बहुत ही खराब हैं। घर के सीवर के साथ सीवर लाइन जोड़ी ही नहीं गई है। घर का सीपेज नीचे गड्ढे में फैल रहा है। रेजिडेंट्स बार-बार आरडब्लूए को कभी नोएडा अथॉरिटी को शिकायत करते हैं। चक्कर-पे-चक्कर लगा रहे हैं। प्राधिकरण से कुछ कर्मचारी आकर देख भी जाते हैं। सीवर लाइन जैसी की तैसी ही बनी हुई है।
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Noida News: Mirror roaming in the city[/caption]
आरडब्ल्यूए के संयुक्त सचिव विरेन्द गुप्ता के अनुसार सेक्टर-19 के अंदर की सडक़ें डांबर तथा आरसीसी से बनी हैं। अब इन दोनों की ही हालत खराब है। सडक़ों पर गहरे गड्ढे हैं। चलो तो ऐसा लगता है जैसे कि सेक्टर-19 में नहीं बल्कि किसी गांव में घूम रहे हों।
इसी सेक्टर के रहने वाले एम. एल. प्रताप के अनुसार गर्मियों में पानी की समस्या तो बहुत ही ज्यादा है। पानी कभी भी गंदा आने लगता है। कभी प्रेशर कम, तो कभी पानी कम समय के लिए आता है। तो कभी समय पर नहीं आता। फिर भी पहले चला जाता है। सैक्टर-19 में पानी स्ंबंधिंत परेशानी का सबसे बड़ा कारण है आधे सेक्टर के लिए पानी यूजीआर सेक्टर-27 से आता है। यदि 27 की लाइट चली जाए तो सैक्टर के आधे हिस्से से पानी गायब हो जाता है। आधे सेक्टर-19 के लिए पानी आता है सैक्टर-19 के यूजीआर से अब यदि सैक्टर-19 की लाइट चली जाए तो सैक्टर-19 वाले आधे भाग का पानी गायब हो जाता है। हरे भरे पार्क हैं फिर भी जनसंख्या के हिसाब से हरित स्थानों की कमी ही है। इससे निवासियों के लिए ताजी हवा और मनोरंजन के अवसरों की कमी है।
यातायात की समस्या
यह सैक्टर पीक आवर्स के दौरान भारी ट्रैफिक समस्या से जूझता है, जिससे यात्रियों को देरी होने से निराशा भी झेलनी पड़ती है। सार्वजनिक परिवहन भी सीमित हैं यद्यपि बसें और ऑटो-रिक्शा, इसका विकल्प होते हैं। स्वास्थ्य सुविधाएं यानि सरकारी अस्पताल या क्लीनिक भी सेक्टर में मौजूद नहीं हैं।
सुरक्षा की दृष्टिï से
सेक्टर-19 बड़ा सेक्टर है। जिसमें कुछ मुख्य ऑफिस, मशहूर सनातन धर्म मंदिर, स्कूल, नर्सिंग होम शनि बाजार ग्राउंड है। इन सबको देखते हुए सेक्टर-19 को सुरक्षा की तो अत्यधिक आवश्यकता है। यहां की आरडब्ल्यूए का मानना है कि हमारे यहां पुलिस पेट्रोलिंग बिल्कुल भी नहीं है। सिर्फ पीसीआर वैन घूमती है। आरडब्लूए की मांग है गर्मियों की दोपहर में तो कम से कम पुलिस पेट्रोलिंग होनी ही चाहिए। यहां दिनदहाड़े 13-14 साल के लडक़े सैक्टर के अंदर घुस आते हैं। जिम में बैठे रहते हैं और कभी भी कहीं किसी भी घर से साइकिल उठाकर ले जाते हैं। छोटी- मोटी उठाईगिरी तो यहां पर चलती ही रहती है।
ये हैं आरडब्लूए पदाधिकारी
अध्यक्ष आर.सी. गुप्ता, महासचिव लक्ष्मी नारायण, उपाध्यक्ष-एन.सी. वरुण, उपाध्यक्ष अशोक कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष राम कुमार शर्मा, संयुक्त सचिव कृष्णा शर्मा, राजकुमार चौहान एवं एम.एल. प्रताप कार्यकारिणी सदस्य हैं।