दिल्ली सरकार की बड़ी पहल, 1.60 लाख लड़कियों को मिलेगा फ्री टीका

दिल्ली सरकार तीन महीने के भीतर 14 साल की उम्र पूरी कर चुकी 1.60 लाख लड़कियों को फ्री वैक्सीन देकर एक ऐसी बीमारी के खिलाफ सुरक्षा कवच तैयार करना चाहती है, जिसे समय रहते रोका जा सकता है।

दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य मुहिम
दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य मुहिम
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Feb 2026 04:44 PM
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Delhi News : दिल्ली में महिलाओं की सेहत को लेकर एक बड़ा प्रिवेंटिव अभियान शुरू होने जा रहा है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने एचपीवी वैक्सीनेशन ड्राइव की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। शनिवार से राजधानी में यह अभियान शुरू होगा और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जीटीबी अस्पताल से इसे लॉन्च करेंगी। दिल्ली सरकार तीन महीने के भीतर 14 साल की उम्र पूरी कर चुकी 1.60 लाख लड़कियों को फ्री वैक्सीन देकर एक ऐसी बीमारी के खिलाफ सुरक्षा कवच तैयार करना चाहती है, जिसे समय रहते रोका जा सकता है।

604 केंद्रों पर होगा मुफ्त टीकाकरण

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दिल्ली में कुल 604 स्वास्थ्य केंद्रों पर यह टीका निशुल्क लगाया जाएगा। इनमें कई आयुष्मान आरोग्य मंदिर, डिस्पेंसरियां और अस्पताल भी शामिल होंगे। टीकाकरण के लिए कोल्ड-चेन व्यवस्था भी इसी नेटवर्क के जरिए संचालित की जाएगी, ताकि वैक्सीन का सुरक्षित भंडारण और वितरण सुनिश्चित हो सके। अभियान में अभिभावकों की सहमति को अनिवार्य रखा गया है। टीकाकरण से पहले माता-पिता के मोबाइल नंबर पर ओटीपी (OTP) भेजा जाएगा, जिसके माध्यम से सहमति दर्ज होगी। साथ ही, यूवीन पोर्टल पर पहले से ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेकर स्लॉट बुक करने की सुविधा भी दी जा रही है, ताकि केंद्रों पर भीड़ और अव्यवस्था से बचा जा सके।

3 महीने तक चलेगा अभियान

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि यह अभियान तीन महीनों तक चलेगा। इस अवधि में करीब 4,000 वैक्सीनेशन सेशन आयोजित करने की योजना है। विभाग का फोकस अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करना है, क्योंकि टीकाकरण केंद्रों तक लड़कियों को लाना और समय पर टीका लगवाना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। अभियान को सफल बनाने के लिए स्कूल स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। पीटीएम (Parent-Teacher Meeting) में अभिभावकों को एचपीवी वैक्सीनेशन के फायदे, प्रक्रिया और जरूरत के बारे में जानकारी दी जाएगी, ताकि वे अपनी बेटियों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करें।

पहले भी लग चुका है टीका

योजना के तहत पात्र लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन की एक डोज दी जाएगी। विभाग के मुताबिक, केंद्र सरकार ने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप गार्डासिल वैक्सीन की करीब 50 प्रतिशत डोज उपलब्ध करा दी है और शेष आपूर्ति को लेकर भी व्यवस्था की जा रही है। एचपीवी टीका बाजार में पहले से उपलब्ध है और जानकारी के मुताबिक दिल्ली में 14 वर्ष आयु वर्ग की करीब 10 हजार लड़कियां पहले ही यह टीका लगवा चुकी हैं। पहले दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान ने भी अपने स्तर पर 9 से 14 वर्ष की उम्र की करीब 3,000 लड़कियों को यह टीका देने की पहल की थी, हालांकि कोरोना काल के दौरान वह कार्यक्रम बंद हो गया था। Delhi News

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NCERT की किताब पर 48 घंटे में सुप्रीम कोर्ट का 'ब्लैंकेट बैन'

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने कई जगहों पर किताब ढूंढने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बीच, एक वरिष्ठ अधिकारी को करोल बाग स्थित एक बुकस्टोर की याद आई। दुकान के पास बिक्री के लिए कोई कॉपी नहीं थी, लेकिन वहां एक 'सैंपल कॉपी' मौजूद थी।

Vishwas Social Welfare Society
NCERT किताब को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मचा हड़कंप (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar26 Feb 2026 02:30 PM
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The Supreme Court's 'blanket ban' : सुप्रीम कोर्ट द्वारा NCERT की कक्षा 8 की एक किताब पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध की पृष्ठभूमि किसी राजनीतिक थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। एक अखबार की रिपोर्ट से शुरू होकर, करोल बाग की एक दुकान से किताब की 'सैंपल कॉपी' तलाशने और फिर जजों की कॉफी मीटिंग तक—यह पूरा सिलसिला सिर्फ 48 घंटों में देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा।

कैसे शुरू हुआ सिलसिला?

मामले की शुरुआत मंगलवार की सुबह हुई, जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सुर्या कांत ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' में छपी एक रिपोर्ट देखी। रिपोर्ट में NCERT की नई किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' पर लिखा एक सेक्शन चर्चा में था। इसे देखकर CJI चौंक पड़े और उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि किताब की कॉपी उपलब्ध कराई जाए। हालांकि, चुनौती यह थी कि बाजार में उस समय किताब की कुल 32 ही कॉपियां पहुंची थीं और उसे ढूंढना लगभग असंभव था।

करोल बाग का मिशन और 'सैंपल कॉपी'

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने कई जगहों पर किताब ढूंढने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बीच, एक वरिष्ठ अधिकारी को करोल बाग स्थित एक बुकस्टोर की याद आई। दुकान के पास बिक्री के लिए कोई कॉपी नहीं थी, लेकिन वहां एक 'सैंपल कॉपी' मौजूद थी। अधिकारियों ने झटपट उस कॉपी को CJI तक पहुंचाया। इसके बाद शाम तक NCERT की ओर से भी आधिकारिक कॉपी मंगवा ली गई।

कॉफी मीटिंग में तय हुआ 'सुओ मोटू' एक्शन

बुधवार की सुबह, CJI यह किताब जजों की रोजाना होने वाली कॉफी मीटिंग में लेकर पहुंचे। उन्होंने सभी जजों को विवादित अध्याय दिखाते हुए राय मांगी। सभी जजों ने एकमत से कहा कि यह न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा प्रहार है और अदालत को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। इसी मीटिंग में 'सुओ मोटू' (स्वतः) कार्रवाई करने का फैसला लिया गया।

CJI की गरज- 'ज्यूडिशियरी को बदनाम करने का अधिकार किसी को नहीं'

दोपहर तक मामला अदालत में आया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने भी किताब की सामग्री पर गंभीर चिंता जताई। CJI ने बयान दिया,"मैं किसी को न्यायपालिका की साख पर चोट नहीं करने दूंगा, चाहे वो कितना भी ऊंचा क्यों न हो। कानून अपना काम करेगा।"

अंतिम फैसला: ब्लैंकेट बैन और 'हेड्स मस्ट रोल'

गुरुवार तक, यानी महज 48 घंटे के भीतर, सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए किताब पर पूर्ण प्रतिबंध (Blanket Ban) लगा दिया। अदालत ने सभी प्रिंट कॉपियों की जप्ती और डिजिटल वर्जन को तुरंत हटाने के आदेश दिए। CJI ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर इसे नहीं रोका गया तो लोगों का न्यायपालिका से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "हेड्स मस्ट रोल" (जिम्मेदार लोगों को नहीं छोड़ा जाएगा)। सरकार की ओर से यह कहने पर कि दो जिम्मेदार लोग भविष्य में UGC या मंत्रालयों के साथ काम नहीं करेंगे, CJI ने कहा, "यह छोटी बात है। गोली चली है और न्यायपालिका घायल हुई है।" The Supreme Court's 'blanket ban'

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जब दिल्ली पुलिस के जवान बने गिरफ्तारी के शिकार, 20 जवान हिरासत में

दिल्ली में आयोजित एक एआई समिट के दौरान तीन युवा कांग्रेस कार्यकतार्ओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद वे हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू क्षेत्र में चले गए और वहीं ठहर गए।

dp
दिल्ली पुलिस
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar25 Feb 2026 07:13 PM
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Delhi News : हिमाचल प्रदेश में हुई इस घटना ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा पैदा कर दी है। मामला उस समय शुरू हुआ जब दिल्ली में आयोजित एक एआई समिट के दौरान तीन युवा कांग्रेस कार्यकतार्ओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद वे हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू क्षेत्र में चले गए और वहीं ठहर गए। बताया जाता है कि देलही पुलिस को उनकी मौजूदगी की जानकारी मिली, जिसके बाद एक टीम उन्हें हिरासत में लेने हिमाचल पहुंची। टीम ने तीनों को पकड़ा और दिल्ली ले जाने के लिए रवाना हो गई। हालांकि, रास्ते में घटनाक्रम ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया।

दिल्ली पुलिस के 20 जवानों को हिरासत में लिया गया

जैसे ही स्थानीय प्रशासन को इस कार्रवाई की खबर मिली, सोलन पुलिस ने धर्मपुर के पास चंडीगढ़-कालका-शिमला हाईवे पर नाकाबंदी कर दी। आरोप है कि दूसरे राज्य में कार्रवाई से पहले आवश्यक औपचारिक सूचनाएं नहीं दी गई थीं। इसी आधार पर सोलन पुलिस ने दिल्ली पुलिस के 20 जवानों को रोककर हिरासत में ले लिया। कुछ समय के लिए दोनों राज्यों की पुलिस आमने-सामने आ गई, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

कानून के दायरे में रहकर कदम उठाना चाहिए

बाद में तीनों युवाओं को शिमला की अदालत में पेश किया गया। इस पूरी घटना ने कानूनी प्रक्रिया, अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय और राजनीतिक दखल जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया। विपक्ष ने इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्होंने कानून के दायरे में रहकर कदम उठाया। इस प्रकरण ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जब एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में कार्रवाई करती है तो किन प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। यही प्रक्रिया इस पूरे विवाद का मुख्य कारण बनती दिखाई दे रही है।


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