NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देश की राजनीति लगातार गर्माती जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा पेपर लीक रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाने के बावजूद विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कायम है।

New Delhi News : NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देश की राजनीति लगातार गर्माती जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा पेपर लीक रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाने के बावजूद विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कायम है। संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा छाया रहा और विपक्षी दलों ने सरकार पर छात्रों की चिंताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि सरकार चर्चा चाहती है, लेकिन जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष इस मुद्दे पर समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं- पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय हो, शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें और प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो। राहुल ने प्रधानमंत्री के हालिया संदेश पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों की चिंताओं का समाधान केवल बयानबाजी से नहीं होगा।
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक नैतिक जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक संसद के भीतर और बाहर विपक्ष का विरोध जारी रहेगा। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर सरकार से जवाब मांगा।
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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर अलग सुझाव दिया। उनका कहना है कि सरकार यदि नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करना चाहती है तो पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले सकती है और बाद में परिस्थितियों के अनुसार आगे का निर्णय कर सकती है। उनके अनुसार इससे सरकार का संदेश जाएगा कि वह छात्रों की भावनाओं का सम्मान करती है।
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इस बीच छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत का दौर भी शुरू हुआ है। हालांकि छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि केवल कानून में संशोधन पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जिम्मेदारी तय किए बिना आंदोलन समाप्त नहीं होगा। सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पेपर लीक के मामलों में कड़े दंड के लिए विधायी बदलाव की बात कही गई है।
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फिलहाल सरकार ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच होने वाली बातचीत तथा संसद में होने वाली राजनीतिक गतिविधियां तय करेंगी कि गतिरोध टूटता है या नहीं। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को संसद और सड़क दोनों जगह उठाने की तैयारी में है, जबकि सरकार परीक्षा सुधारों और नए कानूनी प्रावधानों पर जोर दे रही है।
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