शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों को नसीहत देते हुए कहा है कि यदि वे चाहें तो वे उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने के टिप्स भी दे सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 दिसंबर, 2025 से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र से पहले विपक्षी दलों से कहा है कि वे "ड्रामा" करने के बजाय संसद में "डिलीवरी" यानी कामकाजी नतीजों पर ध्यान केंद्रित करें। संसद भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों, विशेष रूप से विपक्षी नेताओं से यह अपील की कि वे नाटकीयता से बचें और संसदीय आचरण का पालन करते हुए परिणामों पर ध्यान दें।
प्रधानमंत्री ने इस सत्र को सिर्फ एक अनुष्ठान के रूप में न देखकर इसे विकास और प्रगति के लिए ऊर्जा देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र काम कर सकता है। इस शीतकालीन सत्र में हमें यह चर्चा करनी चाहिए कि संसद क्या सोचती है, क्या करना चाहती है और देश के लिए क्या करने जा रही है।
प्रधानमंत्री ने विपक्ष को आलोचना करते हुए कहा कि कुछ विपक्षी दल अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और इसने उन्हें परेशान कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से पालन करना चाहिए और सदन में गंभीर और मजबूत मुद्दों को उठाना चाहिए, न कि केवल नाटकीयता का सहारा लेना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने नए और युवा सांसदों की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है। उनका मानना है कि हर सांसद को अपनी बात रखने का अधिकार है, चाहे वह किसी भी पार्टी से हो। उन्होंने कहा कि हमें नाटक रचने के बजाय इन मुद्दों को गंभीरता से लेना चाहिए। यह स्थान डिलीवरी के लिए है, न कि नाटक के लिए।
शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें कुल 15 बैठकें होने की संभावना है। इस दौरान, 'परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025' और भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक समेत करीब 10 मसौदा विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, विपक्ष द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा, दिल्ली विस्फोट, वायु प्रदूषण और वोट चोरी के आरोपों जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि यह सत्र गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर है। विपक्ष को हार की निराशा से उबर कर मजबूत मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, "विपक्ष को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और संसद में ऐसी बहस को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे देश को फायद हो।"