महीनों से समुद्र में भटक रहे रूसी तेल जहाज भारत लौटे, सप्लाई कटने का डर खत्म?
अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापारिक दबाव के चलते भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल की खरीद कम कर रही थीं। इस वजह से रूस को चीन में नए खरीदार तलाशने पड़े थे। लेकिन ईरान युद्ध के बीच होर्मुज की खाड़ी के बंद होने की आशंका ने तस्वीर पालट दी है।

Russian oil ship India : मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक तेल व्यापार की दिशा ही बदल दी है। अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के बीच, महीनों से भारतीय समुद्री क्षेत्र के पास भटक रहे रूसी तेल जहाजों को अचानक नई राह मिली है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, जो रूसी कार्गो जहाज पहले पूर्वी एशिया का रुख कर रहे थे, उन्होंने अपना रास्ता बदलकर भारत की ओर रुख कर लिया है। इसका सीधा मतलब है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत एक बार फिर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने की राह पर अग्रसर है।
जाने कैसे बदला खेल?
पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापारिक दबाव के चलते भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल की खरीद कम कर रही थीं। इस वजह से रूस को चीन में नए खरीदार तलाशने पड़े थे। लेकिन ईरान युद्ध के बीच होर्मुज की खाड़ी के बंद होने की आशंका ने तस्वीर पालट दी है। तेल की आपूर्ति में कमी की आशंका से घिरे भारत ने रणनीति बदली है और रूसी सप्लायर्स को फिर से मौका मिला है।
भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे जहाज
तेल टैंकरों पर नजर रखने वाली कंपनियों Kpler और Vortexa के आंकड़ों के मुताबिक, रूसी 'यूराल' ग्रेड के करीब 14 लाख बैरल कच्चा तेल ले जा रहे दो बड़े टैंकर इस हफ्ते भारत पहुंच रहे हैं:
- ओड्यून (Odyun): 7.3 लाख बैरल तेल ले जा रहा यह सूएजमैक्स टैंकर बुधवार को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर पहुंच गया है।
- मतारी (Matri): 7 लाख से ज्यादा बैरल तेल लेकर आ रहा यह अफ्रामैक्स टैंकर गुरुवार को गुजरात के वडिनार बंदरगाह पहुंचने वाला है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इन जहाजों ने पहले संकेत दिया था कि वे पूर्वी एशिया की ओर जा रहे हैं, लेकिन अचानक से उनकी दिशा भारत की ओर हो गई। एक अन्य टैंकर 'इंड्री' ने भी सिंगापुर का रुख करने के बाद अचानक मोड़ लेकर भारत की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया। बता दें कि इन तीनों जहाजों को पिछले साल ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने प्रतिबंधित जहाजों की सूची में शामिल किया था।
रिफाइनरियों को जल्द मिलेगी राहत
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, मध्य-पूर्व में युद्ध के कारण तेल सप्लाई में रुकावट आने की आशंका के बीच रूस भारत को तेल भेजने के लिए पूरी तरह तैयार है। सूत्रों की मानें, तकरीबन 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल ऐसे जहाजों में है जो भारतीय समुद्री क्षेत्र के पास पहुंच चुके हैं और कुछ हफ्तों के भीतर भारतीय बंदरगाहों पर उतारे जा सकते हैं।
इसे लेकर भारतीय रिफाइनरियों में राहत की लहर है, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार और उपभोक्ता है। भारत के पास कच्चे तेल का भंडार महज 25 दिनों की मांग को ही पूरा कर सकता है। ऐसे में मध्य-पूर्व के संकट के बीच रूसी तेल का यह बैकअप भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बहुत अहम साबित हो रहा है। Russian oil ship India
Russian oil ship India : मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक तेल व्यापार की दिशा ही बदल दी है। अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के बीच, महीनों से भारतीय समुद्री क्षेत्र के पास भटक रहे रूसी तेल जहाजों को अचानक नई राह मिली है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, जो रूसी कार्गो जहाज पहले पूर्वी एशिया का रुख कर रहे थे, उन्होंने अपना रास्ता बदलकर भारत की ओर रुख कर लिया है। इसका सीधा मतलब है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत एक बार फिर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने की राह पर अग्रसर है।
जाने कैसे बदला खेल?
पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापारिक दबाव के चलते भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल की खरीद कम कर रही थीं। इस वजह से रूस को चीन में नए खरीदार तलाशने पड़े थे। लेकिन ईरान युद्ध के बीच होर्मुज की खाड़ी के बंद होने की आशंका ने तस्वीर पालट दी है। तेल की आपूर्ति में कमी की आशंका से घिरे भारत ने रणनीति बदली है और रूसी सप्लायर्स को फिर से मौका मिला है।
भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे जहाज
तेल टैंकरों पर नजर रखने वाली कंपनियों Kpler और Vortexa के आंकड़ों के मुताबिक, रूसी 'यूराल' ग्रेड के करीब 14 लाख बैरल कच्चा तेल ले जा रहे दो बड़े टैंकर इस हफ्ते भारत पहुंच रहे हैं:
- ओड्यून (Odyun): 7.3 लाख बैरल तेल ले जा रहा यह सूएजमैक्स टैंकर बुधवार को ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर पहुंच गया है।
- मतारी (Matri): 7 लाख से ज्यादा बैरल तेल लेकर आ रहा यह अफ्रामैक्स टैंकर गुरुवार को गुजरात के वडिनार बंदरगाह पहुंचने वाला है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इन जहाजों ने पहले संकेत दिया था कि वे पूर्वी एशिया की ओर जा रहे हैं, लेकिन अचानक से उनकी दिशा भारत की ओर हो गई। एक अन्य टैंकर 'इंड्री' ने भी सिंगापुर का रुख करने के बाद अचानक मोड़ लेकर भारत की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया। बता दें कि इन तीनों जहाजों को पिछले साल ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने प्रतिबंधित जहाजों की सूची में शामिल किया था।
रिफाइनरियों को जल्द मिलेगी राहत
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, मध्य-पूर्व में युद्ध के कारण तेल सप्लाई में रुकावट आने की आशंका के बीच रूस भारत को तेल भेजने के लिए पूरी तरह तैयार है। सूत्रों की मानें, तकरीबन 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल ऐसे जहाजों में है जो भारतीय समुद्री क्षेत्र के पास पहुंच चुके हैं और कुछ हफ्तों के भीतर भारतीय बंदरगाहों पर उतारे जा सकते हैं।
इसे लेकर भारतीय रिफाइनरियों में राहत की लहर है, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार और उपभोक्ता है। भारत के पास कच्चे तेल का भंडार महज 25 दिनों की मांग को ही पूरा कर सकता है। ऐसे में मध्य-पूर्व के संकट के बीच रूसी तेल का यह बैकअप भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बहुत अहम साबित हो रहा है। Russian oil ship India












