पूछताछ में सामने आया कि कई शिक्षित लोग डॉक्टर, मौलवी, छात्र जैश से जुड़े हुए थे। इसने जन्म दिया डॉक्टर्स आफ टेरर नेटवर्क।

श्रीनगर में आतंकियों द्वारा छापे गए एक पोस्टर ने दिल्ली ब्लास्ट की परतें ही खोल दी। अगर पोस्टरों में छिपे संदेशों को पुलिस या क्राइम विभाग समय पर पढ़ने में कामयाब हो जाता तो दिल्ली ब्लास्ट जैसी दुर्घटना से बचा जा सकता था। दरअसल 18 अक्टूबर की सुबह, श्रीनगर के नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के धमकी भरे पोस्टर देखे गए। इन पोस्टरों में सुरक्षाबलों को चेतावनी दी गई थी कि जल्द ही उन्हें सबक सिखाया जाएगा। जम्मू-कश्मीर के लिए ऐसी धमकियाँ आम हैं, लेकिन पुलिस ने इसे हल्के में नहीं लिया। पोस्टरों में छिपे एन्क्रिप्टेड संदेशों को पढ़ने के लिए एक छोटी-सी टीम ने जांच शुरू की। इन संदेशों का विश्लेषण करने में लगभग 21 दिन लगे। और अब ये डाक्टरों की टेरर टीम का खुलासा हो सका। यह दिखाता है कि कैसे एक छोटा सुराग बड़े आतंकवादी नेटवर्क का पता लगाने में मदद कर सकता है।
6 नवंबर को सहारनपुर में डॉक्टर आदिल अहमद राठर को गिरफ्तार किया गया। आदिल राठर पेशे से डॉक्टर था, लेकिन गुप्त रूप से जैश मॉड्यूल के संपर्क में था। पूछताछ से पता चला कि फरीदाबाद में भी मॉड्यूल सक्रिय था। यहां मुजम्मिल अहमद नामक व्यक्ति गिरफ्तार हुआ। उसके घर से लगभग 2900 किलो विस्फोटक, इलेक्ट्रॉनिक टाइमर और विस्फोटक रसायन बरामद किया गया। अगर ये विस्फोटक इस्तेमाल होते, तो दिल्ली-एनसीआर में विनाशकारी हमले की संभावना थी।
इस नेटवर्क की खासियत थी कि इसमें सिर्फ सामान्य आतंकवादी नहीं थे, बल्कि शिक्षित पेशेवर डॉक्टर और छात्र शामिल थे। इसमें शामिल मुख्य सदस्य थे।
1. डॉ. अदील अहमद राठर (सहारनपुर)
2. डॉ. मुजम्मिल शकील (फरीदाबाद)
3. डॉ. शाहीन शाहिद (दिल्ली)
4. डॉ. उमर महमूद (भाग गया, लाल किला ब्लास्ट में शामिल)
* यह नेटवर्क विदेश में बैठे हैंडलर्स द्वारा संचालित था।
* टेलीग्राम, सिग्नल और डार्क वेब के जरिए निर्देश दिए जाते थे।
* हैंडलर्स फंडिंग, हथियार और विस्फोटक सामग्री मुहैया कराते थे।
दिल्ली के लाल किले के पास कार धमाका हुआ, जिसमें 12 लोग मारे गए और कई घायल हुए। जांच में पाया गया कि धमाका योजनाबद्ध नहीं था। उमर महमूद घबराहट में विस्फोटक को सक्रिय कर बैठा। अगर विस्फोट पूरी तरह से प्लान के अनुसार किया गया होता, तो नुकसान कई गुना ज्यादा होता। यह घटना दर्शाती है कि आतंकवादी नेटवर्क में किसी भी तरह की घबराहट या चूक भी विनाशकारी हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पोस्टर की गंभीरता को समझकर जांच तुरंत शुरू की। संयुक्त जांच में दिल्ली पुलिस, एनआईए और इंटेलिजेंस एजेंसियां शामिल थीं। छानबीन में अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और छात्र संगठनों पर निगरानी बढ़ाई गई। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने केस अपने हाथ में लिया। डीएनए परीक्षण और परिवार के सदस्यों से पूछताछ जारी है। जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है।
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