Delhi News: हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) की दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष इशिता जैन ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर PUBG/BGMI जैसे ऑनलाइन गेम्स के संबंध में सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ऑनलाइन गेमिंग आज युवाओं की दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन चुका है। मनोरंजन से शुरू हुआ गेमिंग का यह चलन कई लोगों के लिए समय बिताने का माध्यम है लेकिन इसके साथ स्क्रीन टाइम, गेमिंग की लत, ऑनलाइन सुरक्षा और हिंसक कंटेंट को लेकर बहस भी लगातार तेज हो रही है। इसी मुद्दे को लेकर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) की दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष इशिता जैन ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर PUBG/BGMI जैसे ऑनलाइन गेम्स के संबंध में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इशिता जैन का कहना है कि युवाओं के भविष्य को लेकर केवल बातें करना पर्याप्त नहीं है। अगर वास्तव में युवा पीढ़ी के बेहतर भविष्य की चिंता है तो उन चीजों पर भी ध्यान देना होगा जो उनके समय, सोच और जीवनशैली को प्रभावित कर रही हैं। उनके मुताबिक ऑनलाइन गेमिंग इसी व्यापक बहस का हिस्सा है। उन्होंने PUBG/BGMI जैसे गेम्स में बंदूक, गोलीबारी, हमला और दूसरे खिलाड़ियों को खत्म करने जैसी गतिविधियों को लेकर चिंता जाहिर की है। उनका तर्क है कि लंबे समय तक ऐसे कंटेंट के संपर्क में रहने के संभावित प्रभावों पर गंभीरता से विशेषज्ञ स्तर पर अध्ययन और समीक्षा की जानी चाहिए।
इशिता जैन ने केवल PUBG/BGMI का नाम नहीं लिया है। उन्होंने Free Fire MAX, Call of Duty: Mobile और इसी तरह के अत्यधिक हिंसक या addictive बताए जाने वाले गेम्स की भी विशेषज्ञ समीक्षा की मांग की है। उनकी मांग का केंद्र केवल गेम्स पर रोक लगाना नहीं है। वह चाहती हैं कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पर उम्र की सही पहचान करने की व्यवस्था मजबूत हो, बच्चों को अनजान ऑनलाइन यूजर्स से सुरक्षित रखने के उपाय किए जाएं और कंपनियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
ऑनलाइन गेमिंग में केवल गेम का कंटेंट ही चिंता का विषय नहीं है। कई गेम्स में वॉइस और चैट फीचर्स के जरिए खिलाड़ी दूसरे यूजर्स से सीधे बातचीत कर सकते हैं। इशिता जैन ने बच्चों के अनजान लोगों के संपर्क में आने की संभावना को भी डिजिटल सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। उनका कहना है कि कई बार माता-पिता को यह जानकारी भी नहीं होती कि बच्चा गेम के दौरान किन लोगों के संपर्क में है। ऐसे में Age Verification, Parental Safeguards और ऑनलाइन सुरक्षा के प्रभावी उपायों को मजबूत करना जरूरी है।
इशिता जैन ने Gaming Addiction को भी अपनी चिंता का प्रमुख हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि अगर कोई युवा लगातार घंटों ऑनलाइन गेमिंग में व्यस्त रहता है तो पढ़ाई, काम, शारीरिक गतिविधियों, परिवार और दैनिक दिनचर्या के लिए उपलब्ध समय प्रभावित हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऑनलाइन गेम्स को समाज में हिंसा का एकमात्र कारण नहीं मानतीं। उनकी चिंता खास तौर पर लंबे समय तक Virtual Killing, Aggression और Extreme Violence वाले कंटेंट के संपर्क में रहने के संभावित मानसिक और व्यवहारिक प्रभावों को लेकर है।
इशिता जैन ने इस मुद्दे पर एक वैकल्पिक रास्ते की भी बात की है। उनके अनुसार केवल गेम्स पर प्रतिबंध लगा देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। युवाओं को ऐसे गेम्स और डिजिटल कंटेंट की ओर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जो उनकी सीखने की क्षमता और रचनात्मकता को बढ़ाएं। उन्होंने Learning, Puzzles, Mathematics, Strategy, Creativity, भारतीय इतिहास, Skill Development और Problem-Solving जैसे क्षेत्रों पर आधारित गेम्स को बढ़ावा देने की जरूरत बताई है। उनके मुताबिक मनोरंजन के साथ अगर गेमिंग युवाओं की सोच और कौशल को विकसित करने का माध्यम बने तो उसका सकारात्मक इस्तेमाल किया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र के जरिए इशिता जैन ने अत्यधिक हिंसक और Addictive गेम्स को लेकर विशेषज्ञ समीक्षा की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने मजबूत Age Verification, बच्चों को अनजान ऑनलाइन यूजर्स से सुरक्षा और Gaming Platforms की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर ऐसे गेम्स के खिलाफ प्रतिबंध जैसे सख्त कदम पर विचार करने की मांग भी रखी है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये इशिता जैन द्वारा सरकार के सामने रखी गई मांगें हैं इन्हें सरकार के फैसले या किसी नए प्रतिबंध की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विज्ञापन