संसद के मानसून सत्र में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान दिल्ली में छात्र प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया।

New Delhi News : संसद के मानसून सत्र में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान दिल्ली में छात्र प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ सांसद रामगोपाल यादव ने केंद्र सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब अयोध्या गोलीकांड की बात आती है तो तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के मामले में सरकार प्रशासन का हवाला देती है।
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान के बाद शुरू हुए विवाद के बीच रामगोपाल यादव ने कहा कि अगर अयोध्या में हुई फायरिंग के लिए मुलायम सिंह यादव को जिम्मेदार माना गया था, तो दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित गोलीबारी या बल प्रयोग के मामले में भी वही पैमाना अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अलग-अलग मामलों में अलग-अलग तर्क देकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
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सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने भी सरकार के जवाब पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पहले सरकार कहती है कि गोली नहीं चली, और यदि कार्रवाई हुई भी तो उसका आदेश गृह मंत्री ने नहीं दिया। उन्होंने पूछा कि जब अयोध्या की घटना का जिक्र होता है, तब भाजपा मुलायम सिंह यादव को सीधे जिम्मेदार ठहराती है, लेकिन दिल्ली के मामले में प्रशासन का हवाला क्यों दिया जा रहा है।
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लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष यह साबित नहीं कर पाए कि गृह मंत्री ने गोली चलाने का कोई आदेश दिया था। उनके अनुसार, "जब गोली ही नहीं चली तो आदेश देने का सवाल ही नहीं उठता। गोली चलाने का आदेश किसी मंत्री की ओर से नहीं बल्कि मजिस्ट्रेट या संबंधित अधिकारी की ओर से दिया जाता है। प्रदर्शनकारियों पर केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।"
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राहुल गांधी के बयान से बढ़ा विवाद
इससे पहले राहुल गांधी ने लोकसभा में 20 जुलाई को दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग हुआ और पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए। राहुल गांधी के इन आरोपों पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। भाजपा सांसदों ने उनके बयान का विरोध करते हुए माफी की मांग भी की। इस विवाद के बीच दिल्ली पुलिस ने भी स्पष्ट किया कि छात्र प्रदर्शन के दौरान किसी छात्र को गोली लगने की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट (MLC) का हवाला देते हुए कहा कि गोली लगने के दावों का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
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