Singa Pandit Attack Case : किसके इशारे पर पुलिस बार बार बदल रही है थ्योरी Video
Singa Pandit Attack Case
भारत
चेतना मंच
11 Nov 2022 05:44 PM
रमाकांत पाण्डेय
Singa Pandit Attack Case : ग्रेटर नोएडा। भाजपा नेता सिंगा पंडित पर हुए हमले की वारदात के खुलासे को लेकर पुलिस ‘दो पाटों’ के बीच फंस गई है। अपनी किरकिरी से बचने के लिए पुलिस मीडिया के जरिये हर दिन अलग-अलग थ्योरी बता रही है। अब यह सवाल चर्चाओं में है कि पुलिस आखिर किसके इशारे पर बार-बार अपनी थ्योरी बदल रही है?
बता दें कि गत 3 नवंबर को भाजपा नेता सिंगा पंडित एवं ग्रेटर नोएडा भाजपा मंडल अध्यक्ष महेश चंद्र शर्मा पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें सिंगा पंडित गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस प्रकरण की गूंज जिले से लेकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक सुनाई दी। लेकिन, 10 दिन का समय बीत जाने के बाद भी पुलिस मामले का खुलासा नहीं कर पाई है और अब तक सही और गलत को लेकर अभी भी उलझी हुई है।
Singa Pandit Attack Case :
इस मामले में भाजपा का एक गुट मामले के सही खुलासे की मांग को लेकर गौतमबुद्ध नगर से लेकर लखनऊ तक आवाज उठा रहा है। वहीं, पार्टी का एक खेमा मामले को दूसरी राह पर ले जाने के लिए पुलिस पर दबाव बना रहा है। पार्टी के ही दो धड़ों की खींचतान के बीच उलझी पुलिस को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे। यही वजह है कि सत्ताधारी पार्टी के नेता पर हुए जानलेवा हमले के आरोपी घटना के 10 दिन बाद भी आजाद हैं।
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भाजपा नेता पर हुए जानलेवा हमले के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। दो दिन पूर्व इस प्रकरण को लेकर भाजपा के जिलाध्यक्ष विजय भाटी ने एसीपी को 15 सूत्री मांग पत्र सौंपा था। इसी कड़ी में भाजपा नेता लोकमन प्रधान ने पंचायत एवं ज्ञापन देकर मामले के सही खुलासे की मांग की थी। लोकमन प्रधान ने कहा कि यदि पुलिस ने गलत ढंग से खुलासा किया तो वह इस मामले को लेकर लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुलिस महानिदेशक के पास जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार में भाजपा नेता पर जानलेवा हमला हो और पुलिस कुछ नहीं कर पा रही है, यह बेहद गंभीर है।
सूत्र बताते हैं कि भाजपा के एक धड़े के दबाव में सिंगा पंडित पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस लीपापोती करने का षड्यंत्र रच रही है। लेकिन, जिस तरह से कुछ भाजपा नेता सच्चाई खोलने को लेकर मुखर हुए हैं, उससे पुलिस पूरी तरह से उलझ गई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस सिंगा पंडित के मामले को सही खोलती है या फिर अपने पुराने ढर्रे पर चलते हुए मामले की लीपापोती कर अपनी पीठ थपथपाती है।