छठे दिन लोकसभा में भारी शोर-शराबे के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित रही। इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दे पाए। दूसरी ओर, राज्यसभा में चर्चा लगातार चलती रही और कई प्रमुख नेताओं ने सरकार की नीतियों पर अपने विचार रखे।

New Delhi News : संसद के बजट सत्र के छठे दिन लोकसभा में भारी शोर-शराबे के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित रही। इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दे पाए। दूसरी ओर, राज्यसभा में चर्चा लगातार चलती रही और कई प्रमुख नेताओं ने सरकार की नीतियों पर अपने विचार रखे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री को शाम पांच बजे लोकसभा में बोलना था, लेकिन विपक्षी सदस्यों के विरोध और नारेबाजी के चलते सदन सुचारु रूप से नहीं चल सका। पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने सदस्यों से संयम बरतने और कार्यवाही आगे बढ़ाने की अपील की, लेकिन विरोध जारी रहा, जिसके कारण प्रधानमंत्री का वक्तव्य स्थगित करना पड़ा।
वहीं, उच्च सदन यानी राज्यसभा में राजनीतिक बहस बिना रुकावट जारी रही। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जे. पी. नड्डा और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने-अपने तर्कों के माध्यम से सदन को संबोधित किया। बिहार से निर्वाचित राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने प्रसिद्ध कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। इसके बाद तमिलनाडु से राज्यसभा पहुंचे अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने सदन में अपना पहला भाषण दिया।
अपने वक्तव्य में कमल हासन ने महात्मा गांधी, पेरियार और अन्य सामाजिक विचारकों के विचारों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना की। सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने यह उल्लेख किया कि यह उनका पहला संबोधन है और सदस्यों से अनुरोध किया कि वे भाषण के दौरान किसी भी तरह का व्यवधान न डालें। कुल मिलाकर, दिन की कार्यवाही ने एक बार फिर लोकसभा में गतिरोध और राज्यसभा में सक्रिय बहस के स्पष्ट अंतर को उजागर किया।