SUPRIME COURT NEWS: उम्रकैद बरकरार, गवाहों की संख्या नहीं गुणवत्ता मायने रखती है:एससी
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भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:41 AM
SUPRIME COURT NEWS: नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में वर्ष 2007 में एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या के मामले में तीन आरोपियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा और उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए कहा कि गवाहों की संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता मायने रखती है।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि एक मृतक की दो बेटियों ने देखा कि हमलावर उनके परिवार के सदस्यों की हत्या कर रहे हैं और उनमें से एक, जिससे इस मामले में अभियोजन पक्ष के एक गवाह के रूप में पूछताछ की गई और जो घटना के दौरान घायल हुई थी, ‘पूरी तरह विश्वसनीय गवाह’ थी।
न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने इससे संबंधित कई अर्जियों पर यह फैसला सुनाया जिनमें चार गुनहगारों की भी अर्जियां शामिल थीं। न्यायालय ने कहा कि एक गुनहगार अजय की मौत हो चुकी है।
निचली अदालत ने चारों को मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।
सजा बढ़ाने की उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर शीर्ष अदालत ने कहा कि मौत की सजा को कम करके उम्रकैद करने का उच्च न्यायालय ने स्पष्ट और ठोस कारण बताया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना गाजियाबाद के मुरादनगर में अगस्त 2007 में घटी। इसके तहत एक व्यक्ति, उसकी पत्नी, बेटे और साले की उनके मकान में धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी।
पुलिस ने कहा कि उनकी एक बेटी घायल अवस्था में मिली थी और जिसने देखा था कि मुकेश, ब्रज पाल सिंह, रवि और अजय उनके माता-पिता पर तलवार और अन्य हथियारों से हमला कर रहे हैं। निचली अदालत ने चारों आरोपियों को वर्ष 2009 में दोषी ठहराया था।