विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर सख्त टिप्पणी करते हुए रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु के टीवीके विधायक आर. श्रीनिवास सेतुुपति को फ्लोर टेस्ट में मतदान करने से रोका गया था।

Delhi News : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर सख्त टिप्पणी करते हुए रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु के टीवीके विधायक आर. श्रीनिवास सेतुुपति को फ्लोर टेस्ट में मतदान करने से रोका गया था। शीर्ष अदालत ने इस आदेश को बेहद आपत्तिजनक करार दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगाते हुए विधायक को विश्वास मत (कन्फीडेंस मोसन) में भाग लेने की अनुमति दे दी है। Delhi News
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति नाथ ने स्पष्ट कहा कि अदालत किसी भी राजनीतिक दल के साथ भेदभाव नहीं करती, चाहे वह डीएमके, एआईएडीएमके, टीवीके या बीजेपी ही क्यों न हो। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि न्यायिक प्रक्रिया में इस तरह का हस्तक्षेप लोकतांत्रिक व्यवस्था और विधानसभा की कार्यवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। Delhi News
यह मामला तब सामने आया जब मद्रास हाईकोर्ट ने टीवीके विधायक को विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट में वोट डालने से रोक दिया था। यह आदेश ऐसे समय में आया जब राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर विश्वास मत की प्रक्रिया चल रही थी। हाईकोर्ट के इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी और मामला तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। Delhi News
सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप न केवल एक विधायक के मतदान अधिकार से जुड़ा है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि विधानसभा की कार्यवाही में न्यायपालिका की सीमाएं क्या होनी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप बेहद सावधानी से और संवैधानिक दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। तमिलनाडु में टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार के गठन को लेकर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच यह फ्लोर टेस्ट बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी दौरान विधायक को वोटिंग से रोकने का आदेश जारी हुआ था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी रूप से रोक दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने न सिर्फ मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी साफ किया है कि विधानसभा में विधायकों के अधिकारों को बिना ठोस आधार के सीमित नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजरें फ्लोर टेस्ट और आगे की कानूनी कार्यवाही पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है। Delhi News
विज्ञापन