कांग्रेस के केरल के सांसदों ने इस मुद्दे को बैठक में बेहद गंभीरता से उठाया। केरल के करीब 25 लाख लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं और वहां के हालात का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विपक्ष का मानना था कि करीब एक करोड़ भारतीयों की जान और रोज़गार संकट में है।

Delhi News : संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का आगाज़ भारी हंगामे और स्थगन के साथ हुआ, लेकिन सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' की अचानक बदली गई रणनीति को लेकर है। जहां एक तरफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की धमकी दी जा रही थी, वहीं टीएमसी (TMC) समेत सभी विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर वोटिंग कराने की बात कही थी। लेकिन, अचानक इंडिया ब्लॉक ने इस मुद्दे से हाथ खींच लिया। सवाल उठ रहा है कि आखिर विपक्ष को इस मुद्दे पर पल्ला झाड़ना पड़ा और क्या हैं इस 'पलटाव' के असली वजह?
दरअसल, संसद में कार्यवाही शुरू होने से पहले इंडिया ब्लॉक की हुई महत्वपूर्क बैठक में ही रणनीति बदलने का फैसला लिया गया। राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत तमाम विपक्षी नेताओं की इस बैठक में दो बड़े कारण सामने आए, जिनके चलते स्पीकर के खिलाफ नोटिस पर जोर देने से गुरेज किया गया।
बैठक में सबसे बड़ी चिंता विपक्ष के सामने 'आंकड़ों' की थी। विपक्षी नेताओं को यह आशंका थी कि अगर अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होती है, तो सदन में सरकार के पास बहुमत होने के कारण विपक्ष को निश्चित हार का सामना करना पड़ेगा। विपक्ष को इस बात का अंदेशा था कि यह हार उनके लिए राजनीतिक तौर पर नुकसानदेय साबित हो सकती थी और सरकार इस मुद्दे को अपने पक्ष में कैश कर सकती है।
दूसरा और तत्कालिक कारण खाड़ी देशों में बनी गंभीर स्थिति थी। कांग्रेस के केरल के सांसदों ने इस मुद्दे को बैठक में बेहद गंभीरता से उठाया। केरल के करीब 25 लाख लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं और वहां के हालात का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विपक्ष का मानना था कि करीब एक करोड़ भारतीयों की जान और रोज़गार संकट में है, इसलिए इस मुद्दे को स्पीकर के मुद्दे से ज्यादा तरजीह देनी चाहिए।
बैठक के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बदलाव को स्पष्ट करते हुए कहा, "वेस्ट एशिया में जो हो रहा है, उससे हमारी अर्थव्यवस्था को जबरदस्त नुकसान होने वाला है। स्टॉक मार्केट गिर रहा है, तेल के दाम बढ़ेंगे। ये जनता के मुद्दे हैं। हमने सोचा कि इस पर चर्चा जरूरी है। स्पीकर का मुद्दा बाद में उठाया जा सकता है।"
इस बदली रणनीति के बाद विपक्ष ने सदन में विदेश मंत्री के बयान के तुरंत बाद खाड़ी संकट पर चर्चा की मांग की और जमकर हंगामा किया। विपक्षी सांसदों ने 'मध्यपूर्व जल रहा है, भारतीय फंसे हुए हैं' जैसे बैनर पकड़कर नारेबाजी की। इस हंगामे के चलते कार्यवाही कई बार स्थगित हुई और आखिरकार दिन भर के लिए सदन टाल दिया गया।
विपक्ष के इस 'पलटाव' पर सरकार ने जोरदार हमला बोला। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर 'फेल्ड नेता' (Failed Leader) होने का तंज कसा। वहीं, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, "विपक्ष स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाता है और फिर चर्चा से भाग निकलता है। ये सिर्फ नाटक और हंगामा करने का मामला है।" Delhi News