महाकुंभ में पहुंचे हठयोगियों का अनोखा तप, किसी का शरीर लकड़ी की तरह अकड़ा तो कोई...
Mahakumbh 2025
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 05:21 PM
Mahakumbh 2025 : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ में इस बार हठयोगियों की अद्भुत तपस्या ने श्रद्धालुओं और आगंतुकों को हैरान कर दिया है। मकर संक्रांति से शुरू होने वाले इस महाकुंभ में, जहां एक ओर अखाड़ों के साधु अपने-अपने धूने रमा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ हठयोगी अपनी असाधारण साधना और तप के कारण ध्यान का केंद्र बने हुए हैं। ये साधु अपनी अनोखी तपस्या के जरिए जीवन के प्रति अपने दृढ़ संकल्प और भक्ति को साबित कर रहे हैं।
जब तक गोहत्या होती रहेगी तब तक...
महाकाल गिरी अद्भुत नामक हठयोगी पिछले 9 सालों से अपना बायां हाथ खड़ा किए हुए हैं। उनका यह हाथ अब लकड़ी की तरह अकड़ चुका है और नाखून भी टेढ़े-मेढ़े हो गए हैं। इन हठयोगियों का कहना है कि उनका यह हठ गौ माता के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। उनका मानना है कि जब तक गोहत्या होती रहेगी वे इसी तरह हठयोग करेंगे। उनका मिशन गौ माता की रक्षा और गोहत्या बंद करने का है। महाकाल गिरी का कहना है कि अगले 12 साल में वे अपनी सिद्धि प्राप्त करेंगे लेकिन इसके बाद वे आजीवन इसी अवस्था में रहेंगे।
खड़े हठयोगी ने किया अनोखा तप
आवाहन अखाड़े के खड़ेश्वर महाराज पिछले 11 सालों से कभी भी बैठने या सोने के लिए नहीं रुके हैं। इनका हठयोग इतना सख्त है कि वे लगातार खड़े रहते हैं और उनके पैर अब पत्थर जैसे हो गए हैं। उनका कहना है कि, धर्म कल्याण के उद्देश्य से उन्होंने यह हठयोग अपनाया है। खड़ेश्वर महाराज के पास एक सहारे के लिए टीन का ड्रम रखा हुआ है, जिस पर वह खड़े रहते है और उनका मानना है कि यह तप अन्य लोगों के भले के लिए है।
अपने हठयोग को रखेंगे जारी
इंद्र गिरी नामक एक हठयोगी पिछले 4 साल से ऑक्सीजन सिलेंडर पर निर्भर हैं, क्योंकि उनके फेफड़े खराब हो चुके हैं। डॉक्टरों ने उन्हें कई साल पहले जवाब दे दिया था, लेकिन फिर भी उनका हठयोग नहीं रुका। वे कहते हैं कि भले ही उन्हें सांस लेने में कठिनाई हो, लेकिन वे अपने हठयोग को जारी रखेंगे। उनका यह तप भी जन कल्याण के लिए है और वे इस ठंड में भी ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ अखाड़े में तप कर रहे हैं।
गीतानंद गिरी का क्या है दावा?
गीतानंद गिरी के सिर पर 45 किलो रुद्राक्ष का भार है, जो वह 24 घंटे में लगभग 12 घंटे तक उठाए रखते हैं। उनका कहना है कि यह हठयोग उन्होंने अपने गुरु से सीखा है और यह जनकल्याण और हिंदुत्व के लिए है। गीतानंद गिरी का दावा है कि उनके माता-पिता ने उन्हें बचपन में ही गुरु के पास भेज दिया था, तब से वे इसी तप में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि वे बचपन से ऐसे हैं और इस तप से कोई असर नहीं होता, सब कुछ सामान्य रहता है। Mahakumbh 2025