दिल्ली में हुआ काकोरी क्रांति गाथा का प्रभावशाली मंचन
काकोरी प्रतिरोध शताब्दी वर्ष के अवसर पर दिल्ली में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारियों को समर्पित ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति काकोरी क्रांति गाथा का भव्य मंचन किया गया।

New Delhi : काकोरी प्रतिरोध शताब्दी वर्ष के अवसर पर दिल्ली में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारियों को समर्पित ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति काकोरी क्रांति गाथा का भव्य मंचन किया गया। यह कार्यक्रम दिल्ली सरकार की साहित्य कला परिषद और सभ्यता अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में 15 मार्च 2026 को आयोजित हुआ। नाटक का मंचन नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा(एनएसडी) के अभिमंच सभागार में किया गया, जहां बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, सांस्कृतिक कर्मी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह, गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री नरेश रावल, उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य वागीश पाठक और आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर जी सहित कई प्रमुख अतिथि मौजूद रहे। आयोजन का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के उन क्रांतिकारी अध्यायों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना था, जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया।
काकोरी कांड की गाथा से दर्शक हुए भावुक
नाटक में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे साहसिक घटनाओं में से एक काकोरी कांसपाइरेसी को केंद्र में रखा गया। 9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार के खजाने से भरी ट्रेन को लखनऊ के पास काकोरी में रोककर अंग्रेजी शासन को सीधी चुनौती दी थी। इस ऐतिहासिक कार्रवाई में महान क्रांतिकारी जैसे रामप्रसाद बिस्मिल, अस्फाकउल्ला खान, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, मन्मथनाथ गुप्ता जैसे वीरों की भूमिका को प्रभावशाली तरीके से मंच पर जीवंत किया गया। कलाकारों के जोशीले संवाद, क्रांतिकारी गीतों और सशक्त मंच सज्जा ने पूरे सभागार को देशभक्ति के भाव से भर दिया।
केवल काकोरी नहीं, व्यापक क्रांतिकारी परंपरा को भी दिखाया
इस नाट्य प्रस्तुति की विशेषता यह रही कि यह केवल काकोरी घटना तक सीमित नहीं रही। मंचन में भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रारंभिक प्रतिरोध की परंपरा को भी दर्शाया गया। नाटक में आदिवासी और जनजातीय विद्रोहों से लेकर विभिन्न क्रांतिकारी आंदोलनों तक के संघर्षों की झलक दिखाई गई। इसमें ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के साहस और बलिदान को भी प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शकों को स्वतंत्रता संग्राम के व्यापक स्वरूप को समझने का अवसर मिला।
इतिहास को सही संदर्भ में समझने की जरूरत
कार्यक्रम की शुरुआत में सभ्यता अध्ययन केंद्र के निदेशक रवि शंकर ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि लंबे समय तक काकोरी की इस ऐतिहासिक घटना को केवल ट्रेन डकैती के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तव में यह ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक संगठित क्रांतिकारी प्रतिरोध था। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि काकोरी प्रतिरोध ने औपनिवेशिक शासन की नींव हिला दी थी और इसने भारतीय युवाओं में स्वतंत्रता की नई चेतना जगाई। स्वामी दीपांकर जी ने कहा कि राष्ट्र की शक्ति उसकी एकता में निहित होती है, जबकि वागीश पाठक ने इस नाट्य प्रस्तुति को देश के विभिन्न शहरों में मंचित किए जाने की आवश्यकता बताई।
ऐतिहासिक शोध पर आधारित है नाटक
काकोरी क्रांति गाथा का आलेख सभ्यता अध्ययन केंद्र के निदेशक रवि शंकर ने ऐतिहासिक शोध के आधार पर लिखा है, जबकि इसका निर्देशन प्रियंका शर्मा ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभ्यता अध्ययन केंद्र के उपाध्यक्ष प्रकाश चंद्र शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के बारे में लंबे समय तक जो कथा प्रस्तुत की जाती रही, वह आंशिक सत्य पर आधारित थी। यह नाट्य प्रस्तुति उस व्यापक ऐतिहासिक वास्तविकता को सामने लाने का प्रयास है। दिल्ली में आयोजित काकोरी क्रांति गाथा का यह मंचन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी अध्याय को नई पीढ़ी के सामने पुन: स्थापित करने का सशक्त प्रयास साबित हुआ। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि भारत की आजादी केवल राजनीतिक आंदोलन का परिणाम नहीं थी, बल्कि हजारों क्रांतिकारियों के साहस, त्याग और बलिदान की गाथा भी है।


New Delhi : काकोरी प्रतिरोध शताब्दी वर्ष के अवसर पर दिल्ली में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारियों को समर्पित ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति काकोरी क्रांति गाथा का भव्य मंचन किया गया। यह कार्यक्रम दिल्ली सरकार की साहित्य कला परिषद और सभ्यता अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में 15 मार्च 2026 को आयोजित हुआ। नाटक का मंचन नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा(एनएसडी) के अभिमंच सभागार में किया गया, जहां बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, सांस्कृतिक कर्मी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह, गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री नरेश रावल, उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य वागीश पाठक और आध्यात्मिक गुरु स्वामी दीपांकर जी सहित कई प्रमुख अतिथि मौजूद रहे। आयोजन का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के उन क्रांतिकारी अध्यायों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना था, जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया।
काकोरी कांड की गाथा से दर्शक हुए भावुक
नाटक में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे साहसिक घटनाओं में से एक काकोरी कांसपाइरेसी को केंद्र में रखा गया। 9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार के खजाने से भरी ट्रेन को लखनऊ के पास काकोरी में रोककर अंग्रेजी शासन को सीधी चुनौती दी थी। इस ऐतिहासिक कार्रवाई में महान क्रांतिकारी जैसे रामप्रसाद बिस्मिल, अस्फाकउल्ला खान, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, मन्मथनाथ गुप्ता जैसे वीरों की भूमिका को प्रभावशाली तरीके से मंच पर जीवंत किया गया। कलाकारों के जोशीले संवाद, क्रांतिकारी गीतों और सशक्त मंच सज्जा ने पूरे सभागार को देशभक्ति के भाव से भर दिया।
केवल काकोरी नहीं, व्यापक क्रांतिकारी परंपरा को भी दिखाया
इस नाट्य प्रस्तुति की विशेषता यह रही कि यह केवल काकोरी घटना तक सीमित नहीं रही। मंचन में भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रारंभिक प्रतिरोध की परंपरा को भी दर्शाया गया। नाटक में आदिवासी और जनजातीय विद्रोहों से लेकर विभिन्न क्रांतिकारी आंदोलनों तक के संघर्षों की झलक दिखाई गई। इसमें ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के साहस और बलिदान को भी प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शकों को स्वतंत्रता संग्राम के व्यापक स्वरूप को समझने का अवसर मिला।
इतिहास को सही संदर्भ में समझने की जरूरत
कार्यक्रम की शुरुआत में सभ्यता अध्ययन केंद्र के निदेशक रवि शंकर ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि लंबे समय तक काकोरी की इस ऐतिहासिक घटना को केवल ट्रेन डकैती के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तव में यह ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक संगठित क्रांतिकारी प्रतिरोध था। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि काकोरी प्रतिरोध ने औपनिवेशिक शासन की नींव हिला दी थी और इसने भारतीय युवाओं में स्वतंत्रता की नई चेतना जगाई। स्वामी दीपांकर जी ने कहा कि राष्ट्र की शक्ति उसकी एकता में निहित होती है, जबकि वागीश पाठक ने इस नाट्य प्रस्तुति को देश के विभिन्न शहरों में मंचित किए जाने की आवश्यकता बताई।
ऐतिहासिक शोध पर आधारित है नाटक
काकोरी क्रांति गाथा का आलेख सभ्यता अध्ययन केंद्र के निदेशक रवि शंकर ने ऐतिहासिक शोध के आधार पर लिखा है, जबकि इसका निर्देशन प्रियंका शर्मा ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभ्यता अध्ययन केंद्र के उपाध्यक्ष प्रकाश चंद्र शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के बारे में लंबे समय तक जो कथा प्रस्तुत की जाती रही, वह आंशिक सत्य पर आधारित थी। यह नाट्य प्रस्तुति उस व्यापक ऐतिहासिक वास्तविकता को सामने लाने का प्रयास है। दिल्ली में आयोजित काकोरी क्रांति गाथा का यह मंचन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी अध्याय को नई पीढ़ी के सामने पुन: स्थापित करने का सशक्त प्रयास साबित हुआ। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि भारत की आजादी केवल राजनीतिक आंदोलन का परिणाम नहीं थी, बल्कि हजारों क्रांतिकारियों के साहस, त्याग और बलिदान की गाथा भी है।














