What is Brachytherapy: अस्पताल में ब्रैकीथेरेपी का पहला केस सफलतापूर्वक पूरा किया गया जिसके बाद इस सुविधा की शुरुआत हुई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस सेवा के शुरू होने से कई मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में जाने की जरूरत कम होगी और उन्हें एक ही जगह पर बेहतर कैंसर देखभाल मिल सकेगी

दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (DSCI) में अब ब्रैकीथेरेपी की सुविधा शुरू कर दी गई है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से कैंसर के मरीजों को ज्यादा सटीक तरीके से रेडिएशन ट्रीटमेंट दिया जा सकेगा। अस्पताल में ब्रैकीथेरेपी का पहला केस सफलतापूर्वक पूरा किया गया जिसके बाद इस सुविधा की शुरुआत हुई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस सेवा के शुरू होने से कई मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में जाने की जरूरत कम होगी और उन्हें एक ही जगह पर बेहतर कैंसर देखभाल मिल सकेगी।
ब्रैकीथेरेपी एक तरह की रेडिएशन थेरेपी है जिसमें रेडिएशन देने वाले स्रोत को कैंसर ट्यूमर के अंदर या उसके बेहद करीब रखा जाता है। इसका उद्देश्य कैंसर प्रभावित कोशिकाओं पर ज्यादा प्रभावी तरीके से रेडिएशन पहुंचाना होता है। इस तकनीक में कोशिश की जाती है कि कैंसर कोशिकाओं को ज्यादा रेडिएशन मिले जबकि आसपास के स्वस्थ ऊतकों को कम से कम नुकसान पहुंचे। इसी वजह से कई कैंसर मरीजों के इलाज में इसे एक महत्वपूर्ण तकनीक माना जाता है।
ब्रैकीथेरेपी का इस्तेमाल कई तरह के कैंसर के इलाज में किया जाता है। यह खासतौर पर सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) और एंडोमेट्रियल कैंसर जैसे मामलों में उपयोगी मानी जाती है। इसके अलावा कुछ परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल ब्रेस्ट कैंसर, स्किन कैंसर और अन्य चुनिंदा कैंसर के इलाज में भी किया जा सकता है। हालांकि, किसी मरीज के लिए यह तकनीक उपयुक्त है या नहीं इसका फैसला डॉक्टर मरीज की बीमारी की स्थिति, कैंसर के प्रकार और स्टेज को देखकर करते हैं।
ब्रैकीथेरेपी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। इनमें लो-डोज रेट (LDR) और हाई-डोज रेट (HDR) शामिल हैं। लो-डोज रेट ब्रैकीथेरेपी में रेडियोएक्टिव स्रोत को शरीर में लंबे समय तक रखा जाता है जबकि हाई-डोज रेट ब्रैकीथेरेपी में थोड़े समय के लिए ज्यादा मात्रा में रेडिएशन दिया जाता है और फिर स्रोत को हटा लिया जाता है। किस मरीज को कौन-सी तकनीक दी जाएगी यह कैंसर के प्रकार, बीमारी की स्थिति और मरीज के स्वास्थ्य के आधार पर तय किया जाता है।
ब्रैकीथेरेपी एक आधुनिक उपचार तकनीक है लेकिन कुछ मरीजों में इसके बाद हल्के साइड इफेक्ट देखने को मिल सकते हैं। इनमें इलाज वाली जगह पर हल्का दर्द, सूजन, जलन या थकान जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। आमतौर पर ये परेशानियां समय के साथ कम हो जाती हैं। इलाज के दौरान डॉक्टर मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं और जरूरत के अनुसार देखभाल करते हैं।
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की लिंक ऑफिसर टू डायरेक्टर डॉ. सविता अरोरा ने बताया कि ब्रैकीथेरेपी केस का सफलतापूर्वक पूरा होना अस्पताल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से कैंसर मरीजों को सुरक्षित और समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। वहीं, क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने बताया कि ब्रैकीथेरेपी आधुनिक रेडिएशन ऑन्कोलॉजी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस सुविधा के दोबारा शुरू होने से कई मरीजों को अब इसी संस्थान में सटीक और वैज्ञानिक तरीके से इलाज मिल सकेगा।
ब्रैकीथेरेपी सुविधा शुरू होने के बाद कैंसर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे केंद्रों पर भेजने की जरूरत कम होगी। यह सेवा रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, मेडिकल फिजिसिस्ट, रेडिएशन टेक्नोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ की टीम के सहयोग से संचालित की जाएगी। अस्पताल का लक्ष्य है कि मरीजों को एक ही जगह पर बेहतर और आसान कैंसर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
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