अरे बाप रे! दिल्ली की इतनी आबादी की आंखें हुई कमजोर, आंकड़े हैं चौंकाने वाले

दिल्ली की लगभग 30% आबादी की नजर कमजोर है। मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का बढ़ता उपयोग आंखों पर भारी असर डाल रहा है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की थकान और दृष्टि कमजोर होना आम समस्या बन गई है। खासकर युवा और कामकाजी वर्ग में ये समस्या तेजी से बढ़ रही है।

Eye Health
दिल्ली की 30% आबादी की नजर कमजोर
locationभारत
userअसमीना
calendar10 Mar 2026 01:13 PM
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दिल्ली में आंखों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। हाल ही में एम्स (AIIMS) की रिपोर्ट में सामने आया है कि दिल्ली की लगभग 30% आबादी की नजर कमजोर है। यानी करीब 60 लाख लोग ऐसी समस्या से जूझ रहे हैं जिनमें रिफ्रैक्टिव एरर और प्रेसबायोपिया जैसी परेशानियां शामिल हैं। यह जानकारी WHO को भेजी गई RESAT रिपोर्ट में सामने आई है जो शहर में आंखों के स्वास्थ्य की स्थिति का विश्लेषण करती है।

बदलती लाइफस्टाइल और गैजेट्स का असर

AIIMS के डॉ. ने बताया कि मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का बढ़ता उपयोग आंखों पर भारी असर डाल रहा है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की थकान और दृष्टि कमजोर होना आम समस्या बन गई है। खासकर युवा और कामकाजी वर्ग में ये समस्या तेजी से बढ़ रही है।

RESAT प्रोग्राम क्या है?

RESAT (Refractive Error Situation Analysis Tool) WHO द्वारा तैयार किया गया एक टूल है। यह टूल किसी इलाके में आंखों की बीमारियों, विशेषकर नजर की समस्याओं की स्थिति और इलाज की उपलब्ध सुविधाओं का विश्लेषण करता है। RESAT यह भी बताता है कि किस तरह से इलाज की सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकता है।

दिल्ली में कितने लोग प्रभावित हैं?

रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में लगभग 29.5% लोग चश्मे की जरूरत रखते हैं लेकिन सही इलाज या चश्मा नहीं ले पा रहे हैं। 50 साल से अधिक उम्र के करीब 70% लोगों में नजर से जुड़ी परेशानियां पाई गई हैं। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों में मायोपिया (दूर की चीजें धुंधली दिखना) तेजी से बढ़ रही है।

आंखों के डॉक्टर और सुविधाओं की कमी

दिल्ली में वर्तमान में 249 आई केयर संस्थान हैं जिनमें से 77.5% निजी, 14.5% सरकारी और 8% NGO द्वारा संचालित हैं। कुल मिलाकर शहर में 1085 आंखों के डॉक्टर और 489 ऑप्टोमेट्रिस्ट या आई टेक्नीशियन हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में कम से कम 270 आई केयर सेंटर की जरूरत है जबकि वर्तमान में सिर्फ 50 ही हैं।

समय पर जांच और इलाज क्यों जरूरी है?

समय पर आंखों की जांच न होने पर छोटे-मोटे समस्या बढ़कर गंभीर बीमारी बन सकती है। महिला और बच्चों को इलाज की सुविधाएं पुरुषों की तुलना में कम मिलती हैं जिससे उनकी आंखों की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। सही समय पर चश्मा या उपचार मिलने से नजर कमजोर होने की प्रक्रिया को रोका जा सकता है।

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एक छत के नीचे मिलेगा देशभर का खास सामान, दिल्ली में बनेगा नया मॉल

दिल्ली सरकार इस मॉल को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित मॉल में दिल्ली सहित देशभर के जिलों और राज्यों के खास उत्पादों को प्रदर्शित और विक्रय के लिए रखा जाएगा।

दिल्ली में सजेगा देश का हुनर
दिल्ली में सजेगा देश का हुनर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Mar 2026 01:10 PM
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Delhi News : दिल्लीवासियों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। राजधानी दिल्ली में जल्द ही पीएम एकता मॉल विकसित किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मकसद देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों के पारंपरिक, स्थानीय और विशिष्ट उत्पादों को एक ही जगह उपलब्ध कराना है। इस पहल से न केवल उपभोक्ताओं को भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव मिलेगा, बल्कि कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को भी अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार हासिल होगा। दिल्ली सरकार इस मॉल को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित मॉल में दिल्ली सहित देशभर के जिलों और राज्यों के खास उत्पादों को प्रदर्शित और विक्रय के लिए रखा जाएगा। इनमें हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, पारंपरिक परिधान, मसाले, खाद्य सामग्री और अन्य स्थानीय वस्तुएं शामिल होंगी।

डिजाइन तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू

इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC) ने मॉल के आर्किटेक्चरल डिजाइन और विस्तृत रूपरेखा तैयार करने हेतु अनुभवी सलाहकार की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नियुक्त किया जाने वाला सलाहकार मॉल की संरचना, सुविधाओं, उपयोगिता और समग्र विकास योजना पर काम करेगा। सरकार की मंशा है कि यह मॉल केवल खरीदारी का केंद्र न बनकर एक ऐसा मंच बने, जहां भारत की पारंपरिक कला, शिल्प और सांस्कृतिक विविधता एक साथ दिखाई दे। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल पीएम एकता मॉल के लिए राजधानी में उपयुक्त स्थान की पहचान की जा रही है। इसके लिए दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों पर विचार किया जा रहा है। संभावित स्थलों में आईएनए मार्केट, मजनू का टीला और पीतमपुरा जैसे क्षेत्र शामिल बताए जा रहे हैं। सरकार ऐसी जगह चुनना चाहती है, जहां लोगों की आवाजाही अधिक हो और जो पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षक हो। इससे मॉल में अधिक संख्या में पर्यटक और खरीदार पहुंच सकेंगे, जिसका सीधा लाभ देशभर के स्थानीय उत्पादों और उनसे जुड़े कारीगरों को मिलेगा।

36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगे अलग स्पेस

प्रस्तावित पीएम एकता मॉल को व्यापक स्वरूप देने की तैयारी है। अधिकारियों के अनुसार, इस मॉल में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कुल 36 अलग-अलग स्थान निर्धारित किए जाएंगे। यहां जीआई-टैग वाले उत्पाद, ODOP योजना के उत्पाद और अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक हस्तशिल्प सामग्री उपलब्ध होगी। सरकार इस परियोजना पर करीब 100 करोड़ रुपये तक खर्च कर सकती है। प्रस्ताव है कि मॉल को लगभग 1,200 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विकसित किया जाए। पीएम एकता मॉल को सिर्फ व्यावसायिक परिसर तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे एक बहुउद्देश्यीय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी विकसित करने की योजना है। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां, शिखर सम्मेलन और अन्य आयोजन आयोजित किए जा सकेंगे। इसके साथ ही आगंतुकों के लिए फूड कोर्ट और मनोरंजन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। ऐसे में यह मॉल खरीदारी, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।

केंद्र सरकार पहले ही कर चुकी है बजट प्रावधान

गौरतलब है कि केंद्र सरकार देशभर में पीएम एकता मॉल, जिसे यूनिटी मॉल के रूप में भी देखा जा रहा है, स्थापित करने की व्यापक योजना पर काम कर रही है। इस योजना के तहत अब तक 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मॉल निर्माण के लिए धनराशि आवंटित की जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों में यूनिटी मॉल विकसित करने के लिए लगभग 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों के स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुओं को एक साझा मंच पर लाना है।

‘विविधता में एकता’ का प्रतीक बनेगा यह मॉल

पीएम एकता मॉल को भारत की ‘विविधता में एकता’ की भावना का प्रतीक माना जा रहा है। यहां देश के अलग-अलग राज्यों की कला, संस्कृति, खानपान, परंपरा और स्थानीय उत्पादों की झलक एक ही स्थान पर देखने को मिलेगी। यह पहल न केवल ODOP योजना को मजबूत करेगी, बल्कि स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और पारंपरिक व्यवसायों को नई पहचान और बाजार भी देगी। ऐसे में दिल्ली का यह प्रस्तावित मॉल राजधानी के लिए एक नया आकर्षण और देश के स्थानीय उत्पादों के लिए एक अहम मंच साबित हो सकता है। Delhi News

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'संख्या का डर' और खाड़ी संकट ने बदली इंडिया ब्लॉक की रणनीति

कांग्रेस के केरल के सांसदों ने इस मुद्दे को बैठक में बेहद गंभीरता से उठाया। केरल के करीब 25 लाख लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं और वहां के हालात का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विपक्ष का मानना था कि करीब एक करोड़ भारतीयों की जान और रोज़गार संकट में है।

India Block strategy
भारी हंगामे के बीच विपक्ष (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar09 Mar 2026 07:02 PM
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Delhi News : संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का आगाज़ भारी हंगामे और स्थगन के साथ हुआ, लेकिन सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' की अचानक बदली गई रणनीति को लेकर है। जहां एक तरफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की धमकी दी जा रही थी, वहीं टीएमसी (TMC) समेत सभी विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर वोटिंग कराने की बात कही थी। लेकिन, अचानक इंडिया ब्लॉक ने इस मुद्दे से हाथ खींच लिया। सवाल उठ रहा है कि आखिर विपक्ष को इस मुद्दे पर पल्ला झाड़ना पड़ा और क्या हैं इस 'पलटाव' के असली वजह?

सुबह की बैठक में बदला 'खेल'

दरअसल, संसद में कार्यवाही शुरू होने से पहले इंडिया ब्लॉक की हुई महत्वपूर्क बैठक में ही रणनीति बदलने का फैसला लिया गया। राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत तमाम विपक्षी नेताओं की इस बैठक में दो बड़े कारण सामने आए, जिनके चलते स्पीकर के खिलाफ नोटिस पर जोर देने से गुरेज किया गया।

'आंकड़ों का डर' (Fear of Numbers)

बैठक में सबसे बड़ी चिंता विपक्ष के सामने 'आंकड़ों' की थी। विपक्षी नेताओं को यह आशंका थी कि अगर अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होती है, तो सदन में सरकार के पास बहुमत होने के कारण विपक्ष को निश्चित हार का सामना करना पड़ेगा। विपक्ष को इस बात का अंदेशा था कि यह हार उनके लिए राजनीतिक तौर पर नुकसानदेय साबित हो सकती थी और सरकार इस मुद्दे को अपने पक्ष में कैश कर सकती है।

खाड़ी देशों में बनी स्थिति और केरल का दबाव

दूसरा और तत्कालिक कारण खाड़ी देशों में बनी गंभीर स्थिति थी। कांग्रेस के केरल के सांसदों ने इस मुद्दे को बैठक में बेहद गंभीरता से उठाया। केरल के करीब 25 लाख लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं और वहां के हालात का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विपक्ष का मानना था कि करीब एक करोड़ भारतीयों की जान और रोज़गार संकट में है, इसलिए इस मुद्दे को स्पीकर के मुद्दे से ज्यादा तरजीह देनी चाहिए।

राहुल गांधी का स्पष्टीकरण

बैठक के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बदलाव को स्पष्ट करते हुए कहा, "वेस्ट एशिया में जो हो रहा है, उससे हमारी अर्थव्यवस्था को जबरदस्त नुकसान होने वाला है। स्टॉक मार्केट गिर रहा है, तेल के दाम बढ़ेंगे। ये जनता के मुद्दे हैं। हमने सोचा कि इस पर चर्चा जरूरी है। स्पीकर का मुद्दा बाद में उठाया जा सकता है।"

सदन में हंगामा और सरकार का जवाबी हमला

इस बदली रणनीति के बाद विपक्ष ने सदन में विदेश मंत्री के बयान के तुरंत बाद खाड़ी संकट पर चर्चा की मांग की और जमकर हंगामा किया। विपक्षी सांसदों ने 'मध्यपूर्व जल रहा है, भारतीय फंसे हुए हैं' जैसे बैनर पकड़कर नारेबाजी की। इस हंगामे के चलते कार्यवाही कई बार स्थगित हुई और आखिरकार दिन भर के लिए सदन टाल दिया गया।

विपक्ष के इस 'पलटाव' पर सरकार ने जोरदार हमला बोला। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर 'फेल्ड नेता' (Failed Leader) होने का तंज कसा। वहीं, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, "विपक्ष स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाता है और फिर चर्चा से भाग निकलता है। ये सिर्फ नाटक और हंगामा करने का मामला है।" Delhi News

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