अरे बाप रे! दिल्ली की इतनी आबादी की आंखें हुई कमजोर, आंकड़े हैं चौंकाने वाले
दिल्ली की लगभग 30% आबादी की नजर कमजोर है। मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का बढ़ता उपयोग आंखों पर भारी असर डाल रहा है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की थकान और दृष्टि कमजोर होना आम समस्या बन गई है। खासकर युवा और कामकाजी वर्ग में ये समस्या तेजी से बढ़ रही है।

दिल्ली में आंखों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। हाल ही में एम्स (AIIMS) की रिपोर्ट में सामने आया है कि दिल्ली की लगभग 30% आबादी की नजर कमजोर है। यानी करीब 60 लाख लोग ऐसी समस्या से जूझ रहे हैं जिनमें रिफ्रैक्टिव एरर और प्रेसबायोपिया जैसी परेशानियां शामिल हैं। यह जानकारी WHO को भेजी गई RESAT रिपोर्ट में सामने आई है जो शहर में आंखों के स्वास्थ्य की स्थिति का विश्लेषण करती है।
बदलती लाइफस्टाइल और गैजेट्स का असर
AIIMS के डॉ. ने बताया कि मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का बढ़ता उपयोग आंखों पर भारी असर डाल रहा है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की थकान और दृष्टि कमजोर होना आम समस्या बन गई है। खासकर युवा और कामकाजी वर्ग में ये समस्या तेजी से बढ़ रही है।
RESAT प्रोग्राम क्या है?
RESAT (Refractive Error Situation Analysis Tool) WHO द्वारा तैयार किया गया एक टूल है। यह टूल किसी इलाके में आंखों की बीमारियों, विशेषकर नजर की समस्याओं की स्थिति और इलाज की उपलब्ध सुविधाओं का विश्लेषण करता है। RESAT यह भी बताता है कि किस तरह से इलाज की सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकता है।
दिल्ली में कितने लोग प्रभावित हैं?
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में लगभग 29.5% लोग चश्मे की जरूरत रखते हैं लेकिन सही इलाज या चश्मा नहीं ले पा रहे हैं। 50 साल से अधिक उम्र के करीब 70% लोगों में नजर से जुड़ी परेशानियां पाई गई हैं। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों में मायोपिया (दूर की चीजें धुंधली दिखना) तेजी से बढ़ रही है।
आंखों के डॉक्टर और सुविधाओं की कमी
दिल्ली में वर्तमान में 249 आई केयर संस्थान हैं जिनमें से 77.5% निजी, 14.5% सरकारी और 8% NGO द्वारा संचालित हैं। कुल मिलाकर शहर में 1085 आंखों के डॉक्टर और 489 ऑप्टोमेट्रिस्ट या आई टेक्नीशियन हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में कम से कम 270 आई केयर सेंटर की जरूरत है जबकि वर्तमान में सिर्फ 50 ही हैं।
समय पर जांच और इलाज क्यों जरूरी है?
समय पर आंखों की जांच न होने पर छोटे-मोटे समस्या बढ़कर गंभीर बीमारी बन सकती है। महिला और बच्चों को इलाज की सुविधाएं पुरुषों की तुलना में कम मिलती हैं जिससे उनकी आंखों की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। सही समय पर चश्मा या उपचार मिलने से नजर कमजोर होने की प्रक्रिया को रोका जा सकता है।
दिल्ली में आंखों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। हाल ही में एम्स (AIIMS) की रिपोर्ट में सामने आया है कि दिल्ली की लगभग 30% आबादी की नजर कमजोर है। यानी करीब 60 लाख लोग ऐसी समस्या से जूझ रहे हैं जिनमें रिफ्रैक्टिव एरर और प्रेसबायोपिया जैसी परेशानियां शामिल हैं। यह जानकारी WHO को भेजी गई RESAT रिपोर्ट में सामने आई है जो शहर में आंखों के स्वास्थ्य की स्थिति का विश्लेषण करती है।
बदलती लाइफस्टाइल और गैजेट्स का असर
AIIMS के डॉ. ने बताया कि मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का बढ़ता उपयोग आंखों पर भारी असर डाल रहा है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की थकान और दृष्टि कमजोर होना आम समस्या बन गई है। खासकर युवा और कामकाजी वर्ग में ये समस्या तेजी से बढ़ रही है।
RESAT प्रोग्राम क्या है?
RESAT (Refractive Error Situation Analysis Tool) WHO द्वारा तैयार किया गया एक टूल है। यह टूल किसी इलाके में आंखों की बीमारियों, विशेषकर नजर की समस्याओं की स्थिति और इलाज की उपलब्ध सुविधाओं का विश्लेषण करता है। RESAT यह भी बताता है कि किस तरह से इलाज की सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकता है।
दिल्ली में कितने लोग प्रभावित हैं?
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में लगभग 29.5% लोग चश्मे की जरूरत रखते हैं लेकिन सही इलाज या चश्मा नहीं ले पा रहे हैं। 50 साल से अधिक उम्र के करीब 70% लोगों में नजर से जुड़ी परेशानियां पाई गई हैं। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों में मायोपिया (दूर की चीजें धुंधली दिखना) तेजी से बढ़ रही है।
आंखों के डॉक्टर और सुविधाओं की कमी
दिल्ली में वर्तमान में 249 आई केयर संस्थान हैं जिनमें से 77.5% निजी, 14.5% सरकारी और 8% NGO द्वारा संचालित हैं। कुल मिलाकर शहर में 1085 आंखों के डॉक्टर और 489 ऑप्टोमेट्रिस्ट या आई टेक्नीशियन हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में कम से कम 270 आई केयर सेंटर की जरूरत है जबकि वर्तमान में सिर्फ 50 ही हैं।
समय पर जांच और इलाज क्यों जरूरी है?
समय पर आंखों की जांच न होने पर छोटे-मोटे समस्या बढ़कर गंभीर बीमारी बन सकती है। महिला और बच्चों को इलाज की सुविधाएं पुरुषों की तुलना में कम मिलती हैं जिससे उनकी आंखों की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। सही समय पर चश्मा या उपचार मिलने से नजर कमजोर होने की प्रक्रिया को रोका जा सकता है।












