शनि त्रयोदशी की पूजा से नहीं सताता,साढ़े साती और ढैय्या का प्रभाव
Shani Trayodashi Vrat
भारत
चेतना मंच
05 Apr 2024 08:49 PM
Shani Trayodashi Vrat : पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि बहुत महत्वपूर्ण होती है, किंतु जब इस दिन शनिवार का दिन पड़ता है तो यह शनि त्रयोदशी के रुप में पूजनीय होती है. शनि त्रयोदशी की पूजा से नहीं सताता है शनि साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव
शनि त्रयोदशी व्रत का प्रभाव शनि दोषों से मुक्ति के लिए अत्यंत ही विशेष माना गया है. शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन त्रयोदशी तिथि का योग विशेष संयोग बनाता है. शनि त्रयोदशी के शुभ योग में त्र्योदशी पूजा के साथ शनि व्रत करने से मिलता है विशेष सुख.
शनि त्रयोदशी पूजा मुहूर्त 2024
शनि त्रयोदशी का व्रत 6 अप्रैल, 2024 को शनिवार के दिन रखा जाएगा. इस दिन को शनि प्रदोष व्रत के रुप में भी पूजा जाएगा. शनि त्रयोदशी तिथि पूजा का शुभ समय शाम 06:42 से 08:58 तक रहेगा. त्रयोदशी तिथि का प्रारम्भ 06 अप्रैल को सुबह 10:19 पर होगा और त्रयोदशी तिथि की समाप्ति 07 अप्रैल सुबह 06:53 पर होगी.
शनि त्रयोदशी व्रत को करते समय पूजा के साथ ध्यान साधना का विशेष ध्यान रखा जाता है. हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. क्योंकि त्रयोदशी समय भगवान शिव को समर्पित है और शनि त्रयोदशी व्रत के दिन भोलेनाथ के साथ शनि देव की भी पूजा की जाती है. जब भी त्रयोदशी के दिन शनिवार का समय होता है तो यह उत्तम समय माना गया है. इस दिन भक्त व्रत रखता है ओर विधि विधान के साथ पूजन कार्य संपन्न करता है.
Shani Trayodashi Vrat से दूर होते हैं शनि दोष
शनि त्रयोदशी व्रत को करते समय पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ने या सुनने का विशेष ध्यान रखा जाता है. कथा के बिना व्रत पूरा नहीं माना जाता है. हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. क्योंकि त्रयोदशी समय भगवान शिव को समर्पित है और शनि त्रयोदशी व्रत के दिन भोलेनाथ के साथ शनि देव की भी पूजा की जाती है. जब भी त्रयोदशी के दिन शनिवार का समय होता है तो यह उत्तम समय माना गया है. इस दिन भक्त व्रत रखता है ओर विधि विधान के साथ पूजन कार्य संपन्न करता है.
Shani Trayodashi Vrat
शनि देव की शुभता को पाने के लिए यह व्रत का विशेष महत्व रखता है. इस दिन कन्याएं एवं महिलाएं सुख सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं तथा जो भक्त शनि के प्रभाव से पीड़ीत है वह इस दिन यदि व्रत रखें तो उसे शनि देव की शुभता प्राप्त होती है. यह भी कहा जाता है कि प्रदोष व्रत करने से नि:संतान दंपत्ति की संतान प्राप्ति की इच्छा भी पूरी हो जाती है.
एस्ट्रोलॉजर राजरानी