
2009 से 2012 के बीच तत्कालीन सरकार ने यमुना (Yamuna) की सफाई के लिए इंटरसेप्टर सीवर प्रोजेक्ट पर भारी खर्च किया। दिल्ली जल बोर्ड द्वारा लागू किया गया यह प्रोजेक्ट सीवरेज को यमुना में गिरने से पहले रोकने का था। यमुना एक्शन प्लान के तहत फंड जुटाए गए, लेकिन इस योजना को अब तक पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है। परिणामस्वरूप, सीवरेज अब भी यमुना में गिर रहा है, और नदी की हालत जस की तस बनी हुई है।
दिल्ली में अनुमानित 792 एमजीडी सीवरेज उत्पन्न होता है, जबकि सीवर ट्रीटमेंट क्षमता केवल 712 एमजीडी की है। इस कारण से केवल 607.1 एमजीडी सीवरेज ही ट्रीट हो पा रहा है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इंटरसेप्टर सीवर प्रोजेक्ट के तहत नजफगढ़ और शाहदरा ड्रेनों को पूरी तरह से तकनीकी तौर पर ट्रैप करना असंभव है। फिलहाल 9 नालों को ट्रैप किया जा चुका है, जबकि 2 आंशिक तौर पर और 9 अन्य नालों को ट्रैप करना बाकी है।
2018 में दिल्ली सरकार ने यमुना (Yamuna) नदी में बहाव बढ़ाने के लिए एक योजना बनाई थी, जिसके तहत ट्रीटेड पानी को यमुना में छोड़ा जाना था। इसका उद्देश्य यमुना(Yamuna) की सफाई और दिल्ली में पानी की आपूर्ति बढ़ाना था। हालांकि, इस परियोजना पर अभी तक कोई काम शुरू नहीं हो पाया है। इस योजना के अंतर्गत हरियाणा बॉर्डर के पास 200 एमजीडी पानी की सप्लाई बढ़ाने का लक्ष्य था।
यमुना के बाढ़ क्षेत्र को रिवरफ्रंट के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत डीडीए 22 किलोमीटर लंबा रिवरफ्रंट विकसित कर रहा है। इसमें लगभग 1400 हेक्टेयर भूमि को विकसित किया जा रहा है। इस प्रयास के माध्यम से यमुना को दिल्लीवासियों से जोड़ा जा रहा है। फिलहाल, असीता ईस्ट, वासुदेव घाट, और यमुना वाटिका जैसे पार्क तैयार हो चुके हैं। यह प्रोजेक्ट एनजीटी के 2015 के निर्देशों के बाद 2017 में शुरू हुआ था।
वजीराबाद प्लांट में अमोनिया की समस्या को खत्म करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट के तहत वजीराबाद प्लांट को अपग्रेड किया जाना था और इसमें अमोनिया कंट्रोल करने के लिए नए फिल्टर्स लगाए जाने थे। हालांकि, इस परियोजना पर काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है, और अमोनिया की समस्या अब भी बनी हुई है।Yamuna: