विज्ञान गढ़ रहा है भविष्य की कोख, मां के बिना जन्म लेंगे बच्चे!
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 12:41 PM
क्या आने वाले समय में बच्चे मां के गर्भ से नहीं बल्कि रोबोट से जन्म लेंगे? ये सवाल अब सिर्फ साइंस फिक्शन फिल्मों तक सीमित नहीं है। चीन में वैज्ञानिक ऐसा प्रेगनेंसी रोबोट विकसित कर रहे हैं जो इंसानी भ्रूण को गर्भ में पाल-पोसकर जन्म दे सकेगा। लेकिन क्या यह वाकई मुमकिन है? क्या रोबोट इंसानी गर्भावस्था को दोहरा सकते हैं? और अगर हां, तो इसका समाज पर क्या असर होगा? आइए, जानते हैं विज्ञान इस तकनीक के बारे में क्या कहता है। Pregnancy Robot
क्या है प्रेगनेंसी रोबोट?
चीन की एक बायोटेक कंपनी काइवा टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. झांग क्यूफेंग एक ऐसे ह्यूमनॉइड रोबोट पर काम कर रहे हैं, जिसमें कृत्रिम गर्भाशय (Artificial Womb) होगा। यह रोबोट इंसानी भ्रूण को गर्भधारण से लेकर जन्म तक की पूरी प्रक्रिया में सहायता कर सकेगा। इस कृत्रिम गर्भाशय में विशेष तरल (Artificial Amniotic Fluid) होगा जो सामान्य गर्भ में पाए जाने वाले एम्नियोटिक फ्लूइड की तरह काम करेगा। भ्रूण को पोषक तत्व एक ट्यूब के जरिए मिलेंगे और रोबोट का सिस्टम हर गतिविधि की निगरानी करेगा। डॉ. झांग का दावा है कि इसका प्रोटोटाइप 2026 तक तैयार हो जाएगा जिसकी अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये होगी।
क्या यह तकनीक वाकई संभव है?
विज्ञान के हिसाब से, पूरी गर्भावस्था को कृत्रिम रूप से दोहराना अभी संभव नहीं है लेकिन शुरुआत हो चुकी है। 2017 में अमेरिका के चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल ऑफ फिलाडेल्फिया के वैज्ञानिकों ने एक बायोबैग तैयार किया था, जिसमें समय से पहले जन्मे मेमने को कुछ हफ्तों तक जीवित रखा गया। यह एक कृत्रिम गर्भ जैसा था, जिसमें भ्रूण को तरल और पोषण मिला। मेमना सुरक्षित रूप से विकसित हुआ और जीवित रहा। लेकिन इंसानी भ्रूण की बात अलग है। गर्भधारण और विकास में कई जटिल जैविक प्रक्रियाएं होती हैं जैसे-
निषेचन (Fertilization): अंडाणु और शुक्राणु का मिलन।
भ्रूण का प्रत्यारोपण (Implantation): गर्भाशय की दीवार पर भ्रूण का चिपकना।
गर्भकाल (Gestation): 9 महीने तक भ्रूण का पोषण और विकास।
प्रसव (Delivery): बच्चे का सुरक्षित जन्म।
इन सभी प्रक्रियाओं को कृत्रिम रूप से करना बेहद कठिन और संवेदनशील है। खासकर, मां के शरीर में मौजूद हार्मोन और प्रतिरक्षा तंत्र की भूमिका को तकनीक से दोहराना एक बड़ी चुनौती है।
निकट भविष्य में क्या संभव हो सकता है?
2026 तक प्रोटोटाइप तैयार होने की उम्मीद है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआती चरण होगा और सबसे पहले जानवरों पर परीक्षण किया जाएगा। बांझपन के इलाज में मददगार हो सकता है खासकर चीन जैसे देशों में, जहां 2020 तक बांझपन की दर बढ़कर 18% हो गई है। प्रीमैच्योर बच्चों को बचाने के लिए यह तकनीक उपयोगी हो सकती है यानी वो बच्चे जो समय से पहले जन्म लेते हैं और गर्भ के बाहर जीवित नहीं रह सकते।
अगर रोबोट से बच्चे पैदा हुए तो क्या होंगे असर?
सामाजिक बदलाव
महिलाओं की भूमिका पर असर: कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे महिलाओं को गर्भावस्था की शारीरिक तकलीफों से मुक्ति मिलेगी, लेकिन नारीवादियों का मानना है कि इससे मातृत्व की भावनात्मक भूमिका कमजोर हो सकती है।
पारिवारिक रिश्तों पर असर: बिना मां के गर्भ में पले बच्चों का भावनात्मक विकास और मां से जुड़ाव सवालों के घेरे में आ सकता है।
जनसंख्या संकट का समाधान: जिन देशों में जन्म दर कम है, वहां ये तकनीक नई उम्मीद बन सकती है।
नैतिक सवाल
मां-बच्चे के रिश्ते का क्या होगा?
अंडाणु और शुक्राणु कहां से आएंगे? क्या इससे ब्लैक मार्केटिंग बढ़ेगी?
बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य कैसे प्रभावित होगा अगर उसे पता चले कि वह मां के गर्भ से नहीं, बल्कि रोबोट से जन्मा है?
कानूनी चुनौतियां
कानून की जरूरत: फिलहाल चीन में इंसानी भ्रूण को कृत्रिम गर्भ में दो हफ्तों से ज्यादा विकसित करना गैरकानूनी है। भविष्य में इसके लिए पूरी कानूनी संरचना बनानी होगी।
गलती की कोई गुंजाइश नहीं: अगर किसी तकनीकी त्रुटि से भ्रूण को नुकसान होता है, तो उसके जिम्मेदार कौन होंगे? यह भी बड़ा सवाल है।
विज्ञान क्या कहता है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि कृत्रिम गर्भाशय तकनीक समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए उम्मीद की किरण हो सकती है, लेकिन पूरी गर्भावस्था को दोहराना अभी दूर की बात है। मां के शरीर में होने वाले प्राकृतिक जैविक, हार्मोनल और प्रतिरक्षात्मक परिवर्तन अभी भी किसी मशीन से दोहराना असंभव है। इस तकनीक को इंसानों के लिए सुरक्षित और नैतिक रूप से स्वीकार्य बनाने में कम से कम 10 से 20 साल लग सकते हैं।
रोबोट से बच्चे पैदा करने का विचार भले ही सुनने में अविश्वसनीय लगे, लेकिन विज्ञान उसी दिशा में छोटे-छोटे कदम बढ़ा रहा है। 2026 में इसका प्रोटोटाइप जरूर सामने आ सकता है, पर इंसानी गर्भावस्था को पूरी तरह रोबोट से दोहराने में अभी लंबा सफर तय करना बाकी है। साथ ही, इसका सामाजिक, नैतिक और कानूनी असर भी बहुत गहरा होगा, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। Pregnancy Robot