स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जानिए हिंदी सिनेमा के 78 साल पुराने देशभक्ति गीत वतन की राह में की कहानी, जिसे दिलीप कुमार पर फिल्माया गया था और मोहम्मद रफी ने आवाज दी थी।

स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त के मौके पर देशभर में देशभक्ति का माहौल देखने को मिलता है। इस खास दिन पर देशभक्ति गीतों की गूंज भी सुनाई देती है। हिंदी सिनेमा में देशभक्ति गीतों की एक लंबी और खास परंपरा रही है। इन गीतों ने लोगों के दिलों में देश के प्रति प्रेम और जज्बे को मजबूत करने का काम किया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदी सिनेमा के शुरुआती देशभक्ति गीतों में एक बेहद खास गीत 78 साल पहले सामने आया था, जिसे दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार पर फिल्माया गया था और मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी थी।
साल 1948 में रिलीज हुई फिल्म शहीद का गीत वतन की राह में देशभक्ति गीतों के इतिहास में खास जगह रखता है। आजादी के दौर के ठीक बाद आई इस फिल्म में देशभक्ति की भावना प्रमुख रूप से दिखाई गई थी। इसी फिल्म के इस गीत को हिंदी सिनेमा के पहले देशभक्ति गीत के तौर पर बताया जाता है।
वतन की राह में गीत को दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार पर फिल्माया गया था। उस दौर में देश आजादी की नई भावना से गुजर रहा था और ऐसे समय में देशभक्ति से जुड़ा यह गीत लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना। यही वजह है कि आज भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इस गीत को याद किया जाता है।
फिल्म शहीद के इस यादगार गीत को मोहम्मद रफी और खान मस्ताना ने अपनी आवाज दी थी। मोहम्मद रफी की आवाज ने गीत के भाव को और प्रभावशाली बना दिया। गीत के बोल राजा मेहदी अली खान ने लिखे थे, जबकि इसका संगीत गुलाम हैदर ने तैयार किया था।
वतन की राह में के बोल देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले नौजवानों की भावना पर केंद्रित थे। गीत में देश के लिए बलिदान देने और मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव नजर आता है। यही भाव इस गीत को बाकी गीतों से अलग बनाता है।
फिल्म शहीद में दिलीप कुमार ने अहम भूमिका निभाई थी और वतन की राह में गीत भी उन्हीं पर फिल्माया गया था। उस समय दिलीप कुमार हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं में शामिल थे। ऐसे में उनकी अदाकारी और मोहम्मद रफी की आवाज के मेल ने इस गीत को यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाई।
फिल्म में दिलीप कुमार के अलावा कामिनी कौशल, लीला चिटनिस और प्रभु दयाल जैसे कलाकार भी नजर आए थे। फिल्म की कहानी और गीतों में देशभक्ति का रंग प्रमुख था।
हर साल 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभर में देशभक्ति के गीत सुनाई देते हैं। नई पीढ़ी के लिए जहां आज के दौर के देशभक्ति गीत लोकप्रिय हैं, वहीं पुराने गीतों की अपनी अलग पहचान है। वतन की राह में ऐसा ही एक गीत है, जो आजादी के शुरुआती दौर की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
78 साल पुराने इस गीत की खासियत सिर्फ इसकी धुन या आवाज नहीं, बल्कि इसका भाव भी है। मोहम्मद रफी और खान मस्ताना की आवाज, राजा मेहदी अली खान के बोल और गुलाम हैदर का संगीत इसे हिंदी सिनेमा के यादगार देशभक्ति गीतों में शामिल करते हैं।
साल 1948 में रिलीज हुई शहीद को देशभक्ति की भावना से जुड़ी फिल्मों में अहम माना जाता है। फिल्म में आजादी के दौर की भावनाओं को पर्दे पर दिखाने की कोशिश की गई थी। इसी वजह से फिल्म का वतन की राह में गीत भी दर्शकों के लिए खास बन गया।
इस गीत को आजादी के बाद के शुरुआती दौर में देशभक्ति की भावना को सामने लाने वाले गीत के रूप में याद किया जाता है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब पुराने हिंदी फिल्मी गीतों की बात होती है, तो वतन की राह में का नाम भी सामने आता है।
15 अगस्त सिर्फ आजादी का जश्न मनाने का दिन नहीं है, बल्कि उन लोगों के संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर भी है, जिनकी वजह से देश आजाद हुआ। ऐसे में देशभक्ति गीत उस दौर की भावनाओं को आज की पीढ़ी तक पहुंचाने का एक माध्यम बनते हैं।
वतन की राह में भी इसी भावना से जुड़ा गीत है। 1948 में आई फिल्म शहीद का यह गीत आज भी अपने भाव और रफी की आवाज के कारण लोगों के बीच याद किया जाता है। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले इस 78 साल पुराने देशभक्ति गीत को याद करना उस दौर के हिंदी सिनेमा और उसकी देशभक्ति की भावना को समझने का एक दिलचस्प मौका है।
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