बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धुरंधर 2’ आखिरकार सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है और रिलीज के साथ ही इसने दर्शकों के बीच जोरदार हलचल पैदा कर दी है। बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह ने अपने दमदार अभिनय से एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे चुनौतीपूर्ण किरदारों को बड़ी मजबूती से निभाना जानते हैं।

Dhurandhar 2 : बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धुरंधर 2’ आखिरकार सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है और रिलीज के साथ ही इसने दर्शकों के बीच जोरदार हलचल पैदा कर दी है। बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह ने अपने दमदार अभिनय से एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे चुनौतीपूर्ण किरदारों को बड़ी मजबूती से निभाना जानते हैं। वहीं निर्देशक आदित्य धर ने भी फिल्म को जिस अंदाज में पर्दे पर उतारा है, उसने दर्शकों का दिल जीत लिया है। बैकग्राउंड स्कोर, विजुअल ट्रीटमेंट और वीएफएक्स हर स्तर पर फिल्म काफी मजबूत नजर आती है। फिल्म की कहानी मुख्य रूप से हमजा और जसकीरत सिंह रांगी के इर्द-गिर्द घूमती है, और इन दोनों भूमिकाओं में रणवीर सिंह दिखाई देते हैं। संजय दत्त और अर्जुन रामपाल ने भी अपने किरदारों में पूरी ताकत झोंक दी है। इसके बावजूद अगर बात फिल्म के सबसे बड़े गेमचेंजर की की जाए, तो यह नाम न रणवीर सिंह का है, न संजय दत्त का और न ही अर्जुन रामपाल का। अक्सर किसी फिल्म की चर्चा उसके हीरो, हीरोइन या खलनायक के इर्द-गिर्द ही सिमट जाती है। लेकिन कई बार कोई ऐसा किरदार सामने आता है, जिसे भले ही सीमित स्क्रीन टाइम मिलता है, पर कहानी का सबसे बड़ा मोड़ वही तय करता है। धुरंधर 2 में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिलता है। फिल्म में रणवीर सिंह के डबल रोल, अर्जुन रामपाल के साथ उनका टकराव और संजय दत्त की मौजूदगी दर्शकों को खूब प्रभावित करती है। अक्षय खन्ना भी रहमान डकैत के किरदार में मजबूत नजर आते हैं। हालांकि, फिल्म के अंत तक पहुंचते-पहुंचते यह साफ हो जाता है कि असली चाल किसी और ने चली थी।
फिल्म में जमील जमाली के किरदार में नजर आए राकेश बेदी ने चुपचाप पूरी कहानी की दिशा बदल दी। यालिना के पिता और हमजा के ससुर के रूप में उनका किरदार शुरुआत में हल्का-फुल्का और कुछ हद तक हास्य से भरा हुआ लगता है। दर्शकों को यही एहसास होता है कि वह कहानी में एक सपोर्टिंग भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन यही भ्रम आगे चलकर सबसे बड़ा ट्विस्ट साबित होता है। जमील जमाली का किरदार दरअसल बेहद शातिर, धैर्यवान और रणनीतिक दिमाग वाला साबित होता है। वह सत्ता के करीब भी रहा, दुश्मनों के बीच भी मौजूद रहा और हर चाल पर नजर बनाए रखी। रहमान डकैत के साथ रहते हुए उसने पूरी साजिश की परतें समझीं, फिर सही समय पर हमजा के साथ मिलकर खेल पलट दिया।
फिल्म के क्लाइमैक्स में यह खुलासा कहानी को एक नया आयाम दे देता है कि वर्षों से पाकिस्तान में रहकर भारत के लिए काम करने वाला जासूस कोई और नहीं, बल्कि जमील जमाली ही है। यही किरदार हमजा को एयरपोर्ट तक छोड़ने जाता है और फिर सच सामने आता है कि वह लंबे समय से पर्दे के पीछे रहकर पूरा मिशन संभाल रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दाऊद की बिगड़ती हालत के पीछे भी उसी का दिमाग काम कर रहा था। फिल्म में दिखाया गया है कि उसने ही ऐसा जहर बड़े साहब के शरीर तक पहुंचाया, जिसने अंदर ही अंदर उन्हें कमजोर कर दिया। इस खुलासे के बाद साफ हो जाता है कि जमील जमाली सिर्फ एक सहायक किरदार नहीं, बल्कि पूरी कहानी का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड है। जहां रणवीर सिंह फिल्म में अपनी ऊर्जा, तीव्रता और डबल रोल से छाप छोड़ते हैं, वहीं राकेश बेदी बिना शोर किए अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। उनका किरदार न केवल कहानी को आगे बढ़ाता है, बल्कि अंत में वही सबसे बड़ा सरप्राइज भी बनकर सामने आता है। यही वजह है कि Dhurandhar 2 में असली बाजी किसी बड़े एक्शन हीरो ने नहीं, बल्कि एक शांत, चतुर और बेहद सोच-समझकर खेला गया किरदार जीतता है। Dhurandhar 2