
दरे-दिल पर मुसलसल हो रही है देर से दस्तक,
ज़रा ए दर्द उठकर देख, अबके मौत ही होगी।
- सीमाब सुल्तानपुरी
रू-ब-रू बुजुर्गों के सहमे सहमे रहने को,
एहतराम कहते हैं, खौफ़ डर नहीं कहते।
- शकील शिफ़ाई
तड़पता देखकर बोला शिकारी,
निशाना चूक जाना चाहिए था।
- दीक्षित दनकौरी
सच घिसटता है अपाहिज की तरह,
झूठ की रफ़्तार कितनी तेज़ है।
- अब्दुल रहमान 'मन्सूर'
हम इतनी बार पहने जा चुके हैं,
हमारा दाम आधा हो चुका है।
- अजय 'अक्स'
अजीब मरहला है ये रह ए मुहब्बत में,
मेरा सुकूं है वो जिसकी मैं बेकरारी हूं।
- नीना सहर
हैं तेरे दिल में कई रास्ते औरों के लिए,
अब तेरे दिल से उतर जाने को जी चाहता है।
- बेगम नसीम
रौशनाई हैं अगरचे ये हमारे आंसू,
दर्द उठता है तो काग़ज़ पे बहा लेते हैं|
- आशीष सिन्हा 'क़ासिद'
गोष्ठी में भारत के सबसे अधिक आयु के शायर चर्चा का विषय बने रहे। शायर जगदीश जैन 101 साल के हो गए हैं, फिर भी ना केवल वे बिना किसी सहारे के चलते हैं, बल्कि इतनी उम्दा शायरी करते हैं, लगता है कि मानो उनके ऊपर जवानी अभी अभी आई है।