
फिल्म की पटकथा 28 जून 2022 को राजस्थान के उदयपुर में हुए टेलर कन्हैयालाल साहू की हत्या की घटना पर आधारित है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह दो युवक—रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद—एक सामान्य ग्राहक की तरह कन्हैयालाल की दुकान में दाखिल होते हैं, लेकिन चंद मिनटों बाद ही माहौल खून से सन जाता है। कैमरे में रिकॉर्ड हुई इस निर्मम हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इस पर आतंकवाद के तार जुड़ने की आशंका ने जांच को NIA के हवाले कर दिया था।
हत्या के दो ही दिन में दोनों आरोपी गिरफ्तार हो गए थे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे देशभर में आक्रोश फैला। लेकिन बावजूद इसके, आज तक मामले का न्यायिक निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। यह वही रिक्तता है जिसे ‘उदयपुर फाइल्स’ सिनेमा के जरिए भरने का दावा करती है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद, जमाअत-ए-इस्लामी और समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी जैसे नामचीन चेहरों ने फिल्म की रिलीज पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह फिल्म सामाजिक सौहार्द को चोट पहुंचा सकती है और एक खास समुदाय को निशाना बनाकर विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देती है। जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दिल्ली हाई कोर्ट में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की याचिका दाखिल की है। याचिका में दावा किया गया है कि फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं जो सांप्रदायिक तनाव को भड़का सकते हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।
फिल्म के ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। जहां कुछ लोग इसे ‘सच का आईना’ बता रहे हैं, वहीं विरोधी गुट इसे समाज में जहर घोलने वाला ‘प्रोपेगेंडा टूल’ करार दे रहे हैं। मांग यहां तक पहुंच गई है कि फिल्म के ट्रेलर को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाया जाए। Udaipur Files