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Gadar vs Lagaan: 15 जून 2001 को दो बड़ी फिल्में आमने-सामने थीं। एक तरफ सनी देओल की ‘गदर: एक प्रेम कथा’ थी और दूसरी तरफ आमिर खान की ‘लगान’। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि दोनों फिल्में न सिर्फ सफल होंगी बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपना नाम भी दर्ज करा लेंगी।

बॉलीवुड में अक्सर माना जाता है कि जब दो बड़ी फिल्में एक ही दिन रिलीज होती हैं तो किसी एक को नुकसान जरूर होता है। यही वजह है कि निर्माता और अभिनेता अपनी फिल्मों की रिलीज डेट को लेकर काफी सावधानी बरतते हैं लेकिन 25 साल पहले भारतीय सिनेमा में कुछ ऐसा हुआ जिसकी मिसाल आज तक दी जाती है। 15 जून 2001 को दो बड़ी फिल्में आमने-सामने थीं। एक तरफ सनी देओल की ‘गदर: एक प्रेम कथा’ थी और दूसरी तरफ आमिर खान की ‘लगान’। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि दोनों फिल्में न सिर्फ सफल होंगी बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपना नाम भी दर्ज करा लेंगी। आज रिलीज के 25 साल बाद भी गदर और लगान की चर्चा उसी उत्साह के साथ होती है क्योंकि इन फिल्मों ने सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर कमाई नहीं की बल्कि दर्शकों के दिलों में भी खास जगह बनाई।
हिंदी सिनेमा के लिए 15 जून 2001 का दिन बेहद खास था। एक ओर सनी देओल, अमीषा पटेल और अमरीश पुरी जैसे कलाकारों से सजी गदर थी तो वहीं दूसरी ओर आमिर खान, ग्रेसी सिंह और कई शानदार कलाकारों के साथ लगान मैदान में थी। फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों को लग रहा था कि दोनों फिल्मों की टक्कर में किसी एक को भारी नुकसान हो सकता है लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। दर्शकों ने दोनों फिल्मों को जमकर प्यार दिया और दोनों फिल्मों ने अपने-अपने तरीके से बड़ी सफलता पाई।
गदर और लगान दोनों का विषय देशभक्ति से जुड़ा था लेकिन दोनों की प्रस्तुति (Presentation) अलग थी। गदर में जहां जबरदस्त एक्शन, इमोशन और देशभक्ति का जोश देखने को मिला वहीं लगान ने एक अलग अंदाज में दर्शकों के सामने कहानी परोसी। सनी देओल का तारा सिंह जब पर्दे पर दिखाई देता था तो सिनेमाघरों में तालियां और सीटियां गूंज उठती थीं। वहीं लगान में एक गांव की कहानी और अंग्रेजों के खिलाफ खेला गया क्रिकेट मैच दर्शकों को इमोशन से जोड़ देता था।
बॉक्स ऑफिस की बात करें तो गदर ने कमाई के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। फिल्म उस दौर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल हो गई। इसके गाने, डायलॉग और किरदार लोगों की जुबान पर चढ़ गए। दूसरी तरफ लगान ने भी शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि कमाई के मामले में वह गदर से पीछे रही लेकिन फिल्म को भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खूब सराहना मिली।
जहां गदर ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचा वहीं लगान ने भारतीय सिनेमा को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर नई पहचान दिलाई। फिल्म को ऑस्कर के लिए नामांकित किया गया था जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी गई। लगान को उसकी कहानी, निर्देशन, अभिनय और संगीत के लिए खूब सराहना मिली। आज भी इसे हिंदी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में गिना जाता है।
गदर और लगान की सफलता का सबसे बड़ा कारण दर्शकों का प्यार था। उस समय सोशल मीडिया नहीं था लेकिन लोगों की बातचीत ही फिल्मों के प्रचार का सबसे बड़ा माध्यम बनती थी। जो लोग पहले गदर देखकर आते थे वे लगान की तारीफ सुनकर उसे देखने पहुंच जाते थे। वहीं लगान देखने वाले भी गदर का अनुभव लेने सिनेमाघरों का रुख करते थे। इस तरह दोनों फिल्मों ने एक-दूसरे का नुकसान करने के बजाय एक-दूसरे को फायदा पहुंचाया।
दोनों फिल्मों ने अपने-अपने तरीके से इतिहास रचा। लगान को कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले और इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली। वहीं गदर ने कमाई के मामले में नए रिकॉर्ड बनाए और लंबे समय तक बॉक्स ऑफिस पर अपना दबदबा कायम रखा। 25 साल बाद भी जब हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों की बात होती है तो गदर और लगान का नाम जरूर लिया जाता है।
बहुत कम लोग जानते हैं कि गदर और लगान से पहले भी सनी देओल और आमिर खान की फिल्मों के बीच बॉक्स ऑफिस पर मुकाबला हो चुका था। साल 1990 में आमिर खान की फिल्म 'दिल' और सनी देओल की 'घायल' लगभग एक ही समय पर रिलीज हुई थीं। दिल ने रोमांटिक फिल्मों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई वहीं घायल ने दमदार एक्शन और कहानी के दम पर दर्शकों का दिल जीत लिया। दोनों फिल्मों ने शानदार कमाई की और बड़ी हिट साबित हुईं। खास बात यह रही कि घायल को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। इसके कुछ साल बाद फिर दोनों सितारों की फिल्मों की चर्चा साथ-साथ हुई। आमिर खान की 'राजा हिंदुस्तानी' और सनी देओल की 'घातक' ने अपने दौर में बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की।
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