Madhubala: हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री मधुबाला को भला कौन नहीं जानता। मधुबाला लोगों के दिलों में आज भी राज करती हैं और लोग उनकी खूबसूरती के दिवाने आज भी हैं। Valentine’s Day के मौके पर हम 36 साल की छोटी सी उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाली मधुबाला की अनसुनी कहानी के बारे में जानेंगे।

वैलेंटाइन डे को दुनिया प्यार का जश्न मनाती है लेकिन हिंदी सिनेमा के इतिहास में यह तारीख एक और वजह से खास है। इसी दिन 1933 में भारतीय सिनेमा की सबसे खूबसूरत और प्रतिभाशाली अदाकारा Madhubala का जन्म हुआ था। पर्दे पर उनकी मुस्कान, नजाकत और अदाकारी ने लाखों दिलों को जीत लिया लेकिन उनकी असल जिंदगी संघर्षों, जिम्मेदारियों और दर्द से भरी रही। गरीबी से उठकर शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचने वाली मधुबाला की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
मधुबाला का असली नाम मुमताज जहां बेगम देहलवी था। उनका जन्म दिल्ली के एक साधारण पश्तून मुस्लिम परिवार में हुआ। परिवार की आर्थिक हालत बेहद कमजोर थी जिसके कारण बचपन से ही उन्हें जिम्मेदारियां उठानी पड़ीं। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने समझ लिया था कि परिवार की मदद करना उनकी पहली प्राथमिकता है। अभिनय उनके लिए शौक नहीं बल्कि मजबूरी थी। घर का खर्च चलाने के लिए उन्होंने फिल्मों में कदम रखा और यहीं से उनके सुनहरे सफर की शुरुआत हुई।
महज नौ साल की उम्र में मधुबाला ने बाल कलाकार के रूप में काम करना शुरू कर दिया। 1942 में आई फिल्म ‘बसंत’ ने उनके करियर को नई दिशा दी। इसी फिल्म के बाद उनका नाम बदलकर मधुबाला रखा गया। उनकी मासूमियत और कैमरे के सामने सहज अभिनय ने निर्माताओं और दर्शकों का दिल जीत लिया। धीरे-धीरे वह फिल्म इंडस्ट्री की पहली पसंद बनने लगीं और उनके पास फिल्मों के लगातार ऑफर आने लगे।
1950 का दशक मधुबाला के करियर का स्वर्णिम दौर माना जाता है। फिल्म ‘महल’ ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद ‘तराना’, ‘हावड़ा ब्रिज’, ‘चलती का नाम गाड़ी’ और ‘हाफ टिकट’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय का जादू बिखेरा। रोमांटिक किरदार हो या कॉमेडी हर रोल में मधुबाला पूरी तरह ढल जाती थीं। उस समय जब अभिनेत्रियों को सीमित भूमिकाएं मिलती थीं मधुबाला ने अपनी शर्तों पर काम किया और अपनी फीस खुद तय की जो उस दौर में एक बड़ी बात थी।
मधुबाला की सबसे बड़ी पहचान बनी ऐतिहासिक फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’। इस फिल्म में अनारकली के किरदार ने उन्हें अमर कर दिया। शूटिंग के दौरान वह गंभीर दिल की बीमारी से जूझ रही थीं लेकिन उन्होंने अपने पेशेवर अंदाज से कभी काम में रुकावट नहीं आने दी। शूटिंग के दौरान कई दफा उनकी तबीयत बिगड़ी फिर भी उन्होंने फिल्म पूरी की। यही कामयाबी के शिखर पर पहुंचने के बावजूद उनकी निजी जिंदगी आसान नहीं रही। बीमारी ने धीरे-धीरे उनके करियर को सीमित कर दिया। लंबी बीमारी से जूझने के बाद 23 फरवरी 1969 को मात्र 36 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। मधुबाला का जीवन भले ही छोटा रहा लेकिन उनकी छाप इतनी गहरी है कि आज भी उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में गिना जाता है।