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Mehdi Hassan: लता मंगेशकर और मेहदी हसन की पहली मुलाकात 1970 के दशक में कनाडा में हुई थी। उस समय दोनों अपने-अपने क्षेत्र में बुलंदियों पर थे। कहा जाता है कि लता मंगेशकर, मेहदी हसन की ग़ज़लों की दीवानी थीं जबकि मेहदी हसन लता मंगेशकर की आवाज को संगीत की सबसे पवित्र आवाजों में से एक मानते थे।

Mehdi Hassan and Lata Mangeshkar: संगीत की दुनिया में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो मुलाकातों से नहीं सम्मान और मोहब्बत से बनते हैं। भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर और ग़ज़ल सम्राट मेहदी हसन का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था। दोनों अलग-अलग देशों में रहते थे लेकिन एक-दूसरे की कला के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान था। शायद यही वजह थी कि दोनों एक-दूसरे के सबसे बड़े प्रशंसकों में गिने जाते थे। आज मेहदी हसन की पुण्यतिथि पर जब उनकी यादें फिर से ताजा हो रही हैं तब उनकी जिंदगी का एक ऐसा किस्सा भी याद आता है जो संगीत प्रेमियों को भावुक कर देता है। यह किस्सा है उस इकलौते युगल गीत की जिसे गाने का सपना दोनों ने देखा था और जब वो ख्वाब मुकम्मल हुआ तो पूरी दुनिया ने उसे बेइंतिहा प्यार दिया।
लता मंगेशकर और मेहदी हसन की पहली मुलाकात 1970 के दशक में कनाडा में हुई थी। उस समय दोनों अपने-अपने क्षेत्र में बुलंदियों पर थे। कहा जाता है कि लता मंगेशकर, मेहदी हसन की ग़ज़लों की दीवानी थीं जबकि मेहदी हसन लता मंगेशकर की आवाज को संगीत की सबसे पवित्र आवाजों में से एक मानते थे। समय बीतता गया लेकिन दोनों के बीच सम्मान और अपनापन कभी कम नहीं हुआ। जब भी मेहदी हसन भारत आते वे लता जी से मिलने का अवसर जरूर निकालते थे। संगीत के प्रति दोनों का प्रेम उन्हें हमेशा एक-दूसरे के करीब लाता रहा।
साल 2007 में जब मेहदी हसन इलाज के सिलसिले में भारत आए तब लता मंगेशकर ने उन्हें अपने घर पर आमंत्रित किया। यह मुलाकात करीब छह घंटे तक चली। दोनों ने संगीत, ग़ज़लों और पुरानी यादों पर लंबी बातचीत की। बताया जाता है कि उस दिन दोनों बेहद खुश थे। लता जी ने इस मुलाकात को यादगार बनाने के लिए तस्वीरें भी खिंचवाई थीं। शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि यह दोनों दिग्गज कलाकारों की आखिरी मुलाकात साबित होगी।
लता मंगेशकर और मेहदी हसन की हमेशा यह इच्छा थी कि वे एक साथ कोई गीत रिकॉर्ड करें लेकिन मेहदी हसन की लगातार बिगड़ती सेहत इस सपने के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन गई। बीमारी के कारण उनके लिए स्टूडियो जाकर रिकॉर्डिंग करना मुश्किल हो गया था। ऐसा लगने लगा था कि शायद दोनों महान कलाकारों का साथ गाने का सपना कभी पूरा नहीं हो पाएगा लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
आखिरकार तकनीक ने वह कर दिखाया जो हालात नहीं कर पा रहे थे। मेहदी हसन ने अपने हिस्से की रिकॉर्डिंग विदेश में की जबकि लता मंगेशकर ने मुंबई में अपनी आवाज रिकॉर्ड की। बाद में दोनों रिकॉर्डिंग को जोड़कर एक पूरा गीत तैयार किया गया। इस तरह जन्म हुआ "तेरा मिलना बहुत अच्छा लगे" का। यह सिर्फ एक गीत नहीं था बल्कि दो महान कलाकारों का ख्वाब था। संगीत प्रेमियों के लिए यह किसी अनमोल धरोहर से कम नहीं था।
इस कहानी का सबसे भावुक पहलू यहीं से शुरू होता है। जब यह गीत तैयार होकर रिलीज हुआ तब उसकी रिकॉर्डिंग मेहदी हसन तक भी पहुंचाई गई लेकिन उस समय उनकी तबीयत इतनी खराब हो चुकी थी कि वे इस गीत को ठीक से सुन और समझ नहीं पाए। जिस गीत को गाने का सपना उन्होंने वर्षों तक देखा था उसे पूरी तरह से महसूस करने का मौका उन्हें नहीं मिल सका।
मेहदी हसन ने एक बार लता मंगेशकर की आवाज के बारे में कहा था कि उसमें "पाकीज़गी" का एहसास है। वहीं लता मंगेशकर भी उन्हें ग़ज़ल गायकी का सबसे बड़ा उस्ताद मानती थीं। दोनों कलाकारों के बीच कभी प्रतिस्पर्धा नहीं रही। वहां केवल सम्मान था, अपनापन था और संगीत के प्रति समर्पण था। शायद यही कारण है कि उनका यह रिश्ता आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।
13 जून 2012 को मेहदी हसन इस दुनिया को अलविदा कह गए। कुछ साल बाद लता मंगेशकर भी अपने चाहने वालों को छोड़कर चली गईं लेकिन इन दोनों महान कलाकारों की आवाज आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जिंदा है।
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