
पाक़ीज़ा और महल जैसी हिट फिल्में दे चुके थे। कास्ट से लेकर कहानी तक हर बात का बारीकी से ध्यान रखा जा रहा था। बनते-बनते इस फिल्म को पूरे 7 साल लग गए थे। जो किसी भी फिल्म के लिए लंबा वक्त था। कमाल ने इस फिल्म को बनाने के लिए बहुत मेहनत की हॉलीवुड से टेक्नीशियन बुलाए और तो और अपने बजट से बाहर भी चले गए। दरअसल फिल्म के लिए 8 करोड़ का बजट पास हुआ था। लेकिन बनी 10 करोड़ में। जो उस वक्त की सबसे महंगी फिल्म में गिनी जाती है। ये फिल्म दिल्ली की इकलौती महिला रजिया सुल्तान पर बेस्ड थी। जिसमे लीड रोल में थी हेमा मालिनी और धर्मेंद्र के साथ परवीन बॉबी भी लीड रोल में थी। इस फिल्म ने सिर्फ 2 करोड़ रुपये कमाए थे।
फिल्म की शूटिंग साल 1946 में ही शुरू हो गई थी। लेकिन इसी बीच हुए दंगों की वजह से फिल्म के फाइनेंसर सिराज अली पाकिस्तान चले गए थे। फिर डायरेक्टर के. आसिफ के पास पैसों की कमी हो गई थी। जिसकी वजह से शूटिंग को रोकना पड़ा था। अब फिल्म पर पैसा अच्छा खासा खर्च हुआ था।तो इस फिल्म ने भी कमाल कर दिखाया। मुग़ल-ए-आज़म ने उस यमय 5 करोड़ रुपये कमाए थे। अगर आज के समय के हिसाब से देखा जाए तो 132 करोड़। यानी यह पहली ऐसी फिल्म है जो 100 करोड़ के क्लब में शामिल हुई थी। Bollywood Film